Monday, May 2, 2011

सगी छोटी बहन के साथ सेक्स

मेरी छोटी बहन सीमा की उम्र सिर्फ 18 साल की है. वो 12 क्लास में पढ़ती है. मेरा नाम राकेश है और मेरी उम्र उन्नीस साल है. मैं कोलेज के फर्स्ट इयर में हूँ. घर पर हमारे ममी डैडी को मिलाकर हम कुल चार लोग रहते हैं. डैडी बैंक में काम करते हैं और अक्सर टूर पर रहते हैं और ममी घर पर रहती है. 

एक दिन मेरी बहन मुझ से बोली भय्या मैं मॉडल बनना चाहती हूँ.

मैं: अरे ये तुझे क्या भूत सवार हो गया? 

सीमा: क्यों? क्या मैं मॉडल नहीं बन सकती?

मैंने उसे पर से नीचे तक घूर कर देखा और् बोला तेरे बस की नहीं है. तू एक घरेलु लड़की है और मॉडल बनने के लिए बहुत बोल्ड बनना पड़ता है.

सीमा (छाती उभारकर): मैं भी बोल्ड बन जायुंगी, प्लीज़ आप मेरी मदद करो ना?

मैं (हैरानी से): तू बोल्ड बन कर कम कपडे पहन कर सब लोगों के सामने आ सकती है?

सीमा: हाँ क्यों नहीं? अगर आपको एतराज़ न हो तो.

मैं: ओके ठीक है. चल मैं तुझे ट्रेनिंग देता हूँ.



सीमा बहुत खुश हो गयी. पर मैं सोच रहा था कि अपनी सगी बहन को कम कपड़ों में देख कर मेरा क्या होगा? क्या मुझे ऐसा करना चाहिए? पर फिर मैंने सोचा कि जब वो सब लोगों के सामने आएगी तो मुझे भी तो देखना पड़ेगा तो अभी से क्यों न मन बना लूं? दरअसल मैंने कभी किसी लड़की को ब्रा और पैंटी मैं नहीं देखा था. मेरी बहन के बारे में मेरे कोई गलत विचार नहीं थे, पर पता नहीं क्यों आज मेरे मन में उसके लिए गंदे ख्याल आने लगे. मेरे लंड में हलकी उत्तेजना सी होने लगी. ये शायद भाई बहन की सेक्स की कहानियां पढ़ने का नतीजा था. दरअसल मेरी सगी बहन एक सेक्सी माल है. वो एकदम गोरी चिट्टी खूबसूरत छरहरे बदन की लड़की है जिसको कोई भी देखकर दीवाना हो जाए. उसके काले घने लंबे बाल उसके चूतड़ों तक आते थे. मैं भी कभी कभी सोचता था कि काश वो मेरी सगी बहन ना होती. उसकी हाईट पांच फुट एक इंच थी. बूब्स का साइज़ करीब संतरे के आकार का होगा. उसके चूतड़ गोल गोल और छोटे छोटे थे.



क्या सोच रहे हो भय्या? सीमा ने मुझे झंझोड़ा.

आँ...... कुछ नहीं. तुने क्या पक्का फैसला कर लिया है?

हाँ. और मैं कुछ भी करने के लिए तय्यार हूँ.

कुछ भी? मैंने उसकी आँखों मैं झाँका.

हाँ वो मुस्कुराई. शायद वो कुछ भी का मतलब समझ गयी थी.

तो चल मैं आज से ही तेरी ट्रेनिंग शुरू कर देता हूँ. वैसे भी आज ममी घर पर नहीं है और वो शाम तक ही आएगी. पर एक बात  ये मेरे और तेरे बीच की बात है. और किसी को पता नहीं लगना चाहिए. समझ गयी?

हाँ समझ गयी. आप बेफिक्र रहें. मैं किसी को नहीं बताउंगी.

और हाँ एक बात और, बोल्ड बनने के लिए सेक्सी पोज़ बनाने पड़ते हैं. तुझे मेरे सामने शर्म तो नहीं आएगी?

अरे नहीं भय्या. आपसे क्या शर्माना? आप तो मेरे सगे भाई हैं.

मैं मुस्कुराते हुए: और अगर मुझे शर्म आ गई तो?

सीमा: तो आप शर्माते रहना. अब बताओ ना क्या करना है?

मैं: पहले तो अपना ये सलवार कमीज़ उतारो और ढंग के कपडे पहन कर आओ.

सीमा (मायूसी से): पर मेरे पास तो सारे सूट सलवार ही है.

मैं: चिंता मत करो. जाओ अलमारी से मेरी शर्ट पहन कर आ जाओ और नीचे से सलवार उतार कर आना. 

सीमा: ओके भय्या. मैं अभी आती हूँ.
करीब पांच मिनट बाद सीमा बोली, भय्या कैसी लग रही हूँ?

सेक्सी, लाजवाब, क़यामत मेरे मुहं से अपने आप निकल गया.

सीमा (खुश होकर): थैंक्स. अब क्या करना है?

मैं: वही जो मोडेल्स करती हैं  कैटवाक.

सीमा: ओके

अब सीमा ने एक हाथ अपनी कमर पर रखा और कैटवाक करते हुए मेरी तरफ आने लगी. 

मैं: थोड़ा कमर को लचका के चल.

सीमा: ओके.

हाय. मेरा तो मेरी बहन को देख कर बुरा हाल था. वो मुस्कुरा कर मेरी तरफ देख रही थी. उसकी कमर चलते हुए लचक रही थी. गोरी गोरी टांगें चलते समय गजब कि लग रही थीं. मेरे पास आकर वो वापस मुड़ी. वापस जाते हुए उसके दोनों गोल गोल चूतड़ उपर नीचे हो रहे थे. मेरा लंड अब तक लिसलिसा हो चुका था. शायद यह प्री कम था. 

वापस जा कर सीमा फिर खड़ी हो गयी. 

सीमा: अच्छा भय्या अब क्या करूँ?

अब मैंने प्लान के मुताबिक उसे एक्स्पोज़ करवाने कि सोची और कहा अब तू धीरे धीरे सेक्सी अदाएं दिखाते हुए और मुस्कुराते हुए कमीज़ उतार दे.

सीमा के चेहरे पर थोड़ी झिझक उभरी पर फिर उसका चेहरा नोर्मल हो गया. मैं भी देखना चाहता था कि मेरी बहन किस हद तक जा सकती है. अगर वो यहाँ मना कर देती तो मैं भी यहीं रुक जाता. पर जब मेरी बहन ही नंगी होने को तैयार थी तो मैं ये मौका क्यों जाने देता?

अब सीमा ने मेरे कहे के अनुसार धीरे धीरे अपने शरीर को लहराते हुए अपनी शर्ट के बटन खोलने शुरू किये. वो मुस्कुरा कर मेरी आँखों में झांक कर ऐसा कर रही थी. मैं भी यही चाहता थ कि उसकी शर्म कम हो जाए और वो मस्त जवान लौंडिया मेरे लंड पर आके बैठ जाए और बोले आह भैया आओ मुझे चोदो. ये जवानी की जलन मुझ से सही नहीं जाती. मेरा बदन जी भर के भोगो
सीमा अब मेरे सामने काली ब्रा और काली पैंटी में मेरे सामने खड़ी थी. अब मैंने सोचा कि मुझे भी उसे उत्तेजित करने के लिए कुछ करना चाहिए. मैंने सीमा के सामने ही पजामे के ऊपर से अपने लंड को मसलना शुरू कर दिया और बोला वाह यार तू तो कमाल की लग रही है. इतनी सेक्सी लड़की मैंने जिंदगी में आज तक नहीं देखी. काश तू मेरी सगी बहन ना होती तो........... ये कह कर मैंने बाकी का वाक्य अधूरा छोड़ दिया. ब्रा और पैंटी में मेरी बहना का गोरा जिस्म अंदर से झांक रहा था. मैंने लंड का मसलना और उसे कामुक निगाहों से देखना जारी रखा. मैं उसकी प्रतिक्रिया देखना चाहता था. सीमा मेरी हालत पर खिलखिलाकर हंस पड़ीं और बोली भैय्या कण्ट्रोल नहीं होता तो ट्रेनिंग यहीं पर खतम कर दो और बाकी कल करेंगे

मैं: नहीं मेरी जान ट्रेनिंग तो अभी बाकी है. तुम अपने आप पर कण्ट्रोल रखना. 

मैंने जानबूझकर मेरी जान शब्द का इस्तेमाल किया था ताकि माहोल में थोड़ा रोमांटिक टच आ जाए.

सीमा: पर भय्या मैं और कपडे नहीं उतारूंगी. आज के लिए इतना ही काफी है.

मैं: अरे तुझे नंगी होने के लिए कौन कह रहा है जानेमन, मैं तो सिर्फ तुझे ट्रेनिंग का अगला पार्ट सिखाने कि बात कर रहा हूँ.

सीमा नंगी, जानेमन, मेरी जान जैसे मेरे शब्द सुन कर भी नोर्मल बिहेव कर रही थी. यह उसकी तरफ से संकेत था कि वो भी इस ट्रेनिंग का मज़ा ले रही थी. 

सीमा: ओके ठीक है. जैसा तुम चाहो. अब बताओ कि करना क्या है यार?

उसके मुहं से यार सुन कर मैं समझ गया कि वो अगले स्टेप के लिए तैयार है. पर वो ब्रा और पैंटी उतारने के लिए पहले ही मना कर चुकी थी. यह जायज़ भी था मॉडल बनने के लिए भला कौन पहली बार सारे कपड़े उतारता है? अब मैंने सोचा कि उस से अलग अलग सेक्सी पोज़ बनवाऊं. इस के लिए मैंने उस से नीचे लिखे पोज़ बनवाए:

१. अपने बूब्स को दबाना
२. पैंटी में हाथ डालना और दूसरे हाथ से ऊँगली मुहं में डाल कर चूसना 
३. एक साइड से थोड़ी से पैंटी सरका कर नीचे करवाना पर चूत नहीं दिखाना
४. एक चूतड़ नंगा कर के दिखाना
५. चौड़ी कर के टांगें हवा में उठा कर बैठना
६. मेरी तरफ पीठ के बल लेट कर बूब्स को ब्रा के अंदर से एक्स्पोज़ करवाना.
७. डौगी स्टायल मैं पोज़ बनाना
और यह सब सीमा मुस्कुराते हुए करती रही. दरअसल उसको भी मज़ा आ रहा था और मुझे भी. मैं उसके हर पोज़ पर वारी वारी जाता और पजामे मैं हाथ डालकर उसके सामने मुठ मारता रहा. उसने कोई एतराज़ नहीं किया.

मेरा लंड इस दो घंटे के खेल में दो बार झड़ चुका था. मेरे वीर्य से पूरा पजामा गीला हो चुका था पर लंड था कि बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था. सीमा ये देख कर मुस्कुराये जा रही थी. मैंने कहा सीमा १० मिनट का ब्रेक है. पर कपड़े मत पहनना. मेरे लिए चाय बना दो. मैं शोवर ले कर आता हूँ.

सीमा: ओके भैय्या.

मैं तुरंत बाथरूम में गया और पजामा निकाल दिया. एक शोवर ले कर मैंने सिर्फ फ्रेंची पहन ली. फिर मैं सीधा किचन में गया. वहाँ मेरी प्यारी सेक्सी बहना मेरे लिए चाय बना रही थी और साथ में एपल जूस पी रही थी. उसकी पैंटी साइड से ऊपर हो गयी थी जिससे उसके गोरे छोटे और गोल गोल चूतड़ और भी एक्स्पोज़ हो रहे थे. मुझसे रहा नहीं गया. मैंने पीछे से अपनी प्यारी बहना को पकड़ लिया और उसके दोनों हाथों से उसका पेट सहलाने लगा. उस वक्त मेरा लंड उसकी गांड में घुसा जा रहा था. 

सीमा: आह भैय्या, क्या करते हो? आप बैठो, मैं चाय लाती हूँ.

मैं: यार कण्ट्रोल नहीं होता.

सीमा (हंसकर): अरे भैय्या आपको कण्ट्रोल तो करना ही पड़ेगा. मैं तो आपकी सगी बहन हूँ. आपके सामने बेफिक्र होकर ब्रा और पैंटी में हूँ. किसी और के आगे मैं इस तरह से नहीं आ सकती क्योंकि वो तो मुझे चोद ही डालेगा.

मैं: तू है ही ऐसी. जो भी तेरी चूत लेगा, नसीबवाला होगा.

सीमा: और जो लड़की आपका लंड लेगी वो भी किस्मत वाली होगी.

हम दोनों खुलते जा रहे थे. चूत लंड की भाषा बोल रहे थे. मैंने सीमा के बूब्स दबाते हुए कहा तो तू ही किस्मत वाली बन जा और ले ले मेरा लंड अपनी चूत में. ऐसा कह कर मैंने उसे अपनी और घुमाया और उसके लिप्स पर किस करने लगा. मेरा एक हाथ उसके बूब्स दबा रहा हा और दूसरा पैंटी के ऊपर से उसकी चूत सहलाने लगा. वो पहले से ही गरम थी इसलिए मेरे टच करते ही झड़ गयी. मैंने देखा कि उसकी पैंटी गीली हो चुकी है. उसने तुरंत मुझे अलग किया और हाँफते हुए थोड़ा गुस्से से बोली, नहीं भैया ये ठीक नहीं है. आप अभी वहाँ ड्राइंग रूम मैं बैठो, मैं चाय लेके आती हूँ.

मैंने लंबी सांस लेते हुए उसे बुझे मन से छोड़ दिया. जब वो चाय लेके आई, तो मैं ड्राइंग रूम में टी वी देख रहा था. जब उसने चाय दी तो मैंने उसे बिना देखे चाय ले ली और चुप चाप चाय पीने लगा. ऐसा देख कर वो मेरी गोद में आ गई और मेरे बालों में उंगलियां फेरने लगी.

सीमा: नाराज़ हो?

मैं: नहीं तो

सीमा: तो फिर इतने चुप क्यों हो? 

मैं: कुछ भी तो नहीं.

मैंने चाय खत्म कि और टी वी की और मुहं कर के बैठ गया.

सीमा: चलो ना भैय्या ट्रेनिंग शुरू करते हैं.

मैंने उखड़े मन से जवाब दिया आज नहीं, फिर कभी मेरा लंड भी इस नाराज़गी के चलते सुस्त हो कर बैठ गया था. बेचारे को दो ढाई घंटे के बाद आराम मिला था. 

सीमा (मेरे गले में बाहें डालते हुए): क्या यार, तुमने इतना मज़ा लूट लिया. क्या इतना काफी नहीं? तुम तो सीधा मेरे साथ सेक्स की सोच रहे हो जो कि बहन और भाई में नामुमकिन है. जरा समझा करो मेरे प्यारे भाई.

सीमा की बात सही थी. अब तक मैंने सिर्फ पिक्चर देख कर या ब्लू फिल्म देख कर ही मुठ मारी थी. किसी लड़की को ब्रा और पैंटी में नहीं देखा था. आज मेरी कई हसरतें पूरी हुई थीं और वो भी मेरी प्यारी बहन के कारण. मझे इतने पर सब्र कर लेना चाहिए और सगी बहन को चोदना पाप है. मैं सब सोचता रहा, पर जैसे ही मेरी नज़र अपनी बहन पर पड़ी  उसका मस्त यौवन, छोटी संतरे जैसी चुचियाँ, मस्त गांड, लहराते हुए लंबे बाल, गदराया हुआ गोरा संगमरमर जैसा चिकना बदन - मेरा लंड विद्रोह करने लगा. एक मन कहने लगा  तेरी बहन पर जवानी आ गयी है, इसे भोग ले वर्ना कोई और इसे चोद देगा. मना हर लड़की करती है, फिर तुम तो उसके सगे भाई हो. क्या सोचते हो चूत खोल कर इनवाइट कर के कहेगी कि आओ मेरे राजा भैया, मेरे सैंया बन जाओ और अपनी बहन कि चूत फाड़ डालो, मैं तुम्हारे लंड की दीवानी हूँ?. मन कहने लगा उठो इस गोद में लेटी भरपूर जवानी का मज़ा लो. अपनी बहना की चूत चाटो, बूब्स चूसो, लाल लाल होंठों पर लिप्स किस करो. जी भर कर चुदाई करो. ऐसा मौका बार बार नहीं आता. 

मेरा लंड फिर उठने की तय्यारी में था. सीमा को मेरा लंड उसकी गांड में चुभता हुआ सा महसूस हुआ. सीमा ने मेरी तरफ प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा. जैसे मिन्नत कर रही हो प्लीज़ मान जाओ, ऐसा मत करो. मुझे भी थोड़ी आत्मग्लानी हुई और अंत में मेरा दिमाग जीत गया और मेरा लंड हार गया. वो फिर नाराज़ होकर सिकुड कर बैठ गया. मैंने सीमा से कहा सॉरी यार, मैं बहक गया था. जवानी के नशे में भूल गया कि तू मेरी सगी बहन है. मुझे माफ कर दे

सीमा (खुश होकर): इट्स ओके भैया. आज मेरी नज़र में आपकी इज्जत और बढ़ गयी है. क्योंकि इतना होने के बाद किसी का कण्ट्रोल नहीं हो पता.

मैं (हँसते हुए): तुझे कैसे पता?

सीमा: मेरी सीनियर सहेलियों ने बताया है जो चुदाई के मज़े ले चुकी हैं. 

मैं: अच्छा बस कर. अब से ऐसी भाषा मेरे साथ यूज़ मत करना और ऐसे मेरे सामने मत आना. हर बार मुझ से कंट्रोल करना मुश्किल होगा. समझ गयी मेरी प्यारी बहना?
(मैंने उसके प्यार से गाल पर चपत लगते हुए कहा).

सीमा: भैय्या आपने इतनी अच्छी ट्रेनिंग दी है और आपने मुझ से कोई जबरदस्ती भी नहीं की. इसलिए मैं आपको इनाम देना चाहती हूँ. 

मैं: क्या?

सीमा: ये आपको दस मिनट बाद पता लगेगा. मैं थोड़ी देर नहा कर आती हूँ.
यह कह कर वो बाथरूम में शोवर लेने चली गयी. मैंने भी कुरता पजामा पहन लिया. मन बहुत भरी हो रहा था. उठ कर पापा के कमरे में गया और एक बड़ा सा पेग वोदका का पी लिया. फिर चुपचाप ड्राइंग रूम में आकर टी वी देखने लगा. मेरा मन अभी भी अशांत था. करीब पन्द्रह मिनट बाद सीमा की आवाज आई भय्या, यहाँ आओ

मैं: क्या है? (मैं वोदका पीकर उसके सामने नहीं जाना चाहता था. वैसे वोदका की स्मेल नहीं होती, पर असर तो होता है. कहीं नशे में कुछ कर गया तो?)

सीमा: आपका इनाम यहाँ पर है. आकर ले लो.

मैं: बाद में ले लूँगा (मेरे लिए अब कोई भी इनाम इम्पोर्टेंट नहीं था)

सीमा ने जिद करते हुए बुलाया भैय्या आओ न, तुम्हे मेरी कसम है

मैं जबरदस्ती उठा और उसके कमरे में गया. वहाँ सीमा कमरे के दूसरे कोने में खड़ी थी. उसने एक चादर ओढ़ रखी थी. 

मैं: क्या है?

सीमा: मैंने आपको इनाम देने के लिए बुलाया है.

मैं: पर मुझे कोई इनाम नहीं चाहिए. मैंने जो कुछ भी किया अपना फ़र्ज़ समझ कर किया.

सीमा (अर्थपूर्ण दृष्टि से मुस्कुराते हुए): तो फ़र्ज़ समझ कर ही इनाम ले लो.

मैं (कुछ ना समझते हुए): ओके जैसा तुम चाहो. कहाँ है मेरा इनाम?

सीमा: ये रहा.

सीमा के इतना कहने के बाद जो हुआ मेरी आँखें फटी की फटी रह गयीं. सीमा ने अपने बदन से चादर हटा दी. उसके नीचे उसने कुछ नहीं पहना हुआ था. वो मादरजात नंगी मेरे सामने खड़ी थी. उसकी चुचियाँ एकदम टाईट थीं और उसके निप्प्ल हलके ब्राउन रंग के थे. सका नंगा मांसल गोरा बदन कसी हुई चूत मेरे सामने थी. उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था. मैं अब तक हलके से नशे में था. मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि यह सपना है या सच. सीमा ने अपनी दोनों बाहें मेरी और फैला दीं और कहा भैया आओ और अपना इनाम ले लो. मैं खुद को आपके हवाले करती हूँ. मैंने आप जैसा मर्द नहीं देखा जिसका इतना कण्ट्रोल हो. पर अब कण्ट्रोल मत करना, मैं खुद आपसे बिनती करके प्यार कि भीख मांग रही हूँ.

मैं यंत्रवत सा उसी और बढ़ा और उसकी बाँहों में समा गया. 

अआआह्ह्ह सीमा आई लव यु. उसकी चुचियाँ मेरी छाती से दब रही थी. मेरा लंड अंदर से फुंफकार उठा. कहने लगा अब तो अपनी बहन चोद ले अपनी कितना तरसाया है इस लौंडिया ने. अब मेरा जलवा देखना. इसकी चूत न फाड़ी तो मैं भी लंड राज नहीं. मेरा लंड पजामे के अंदर से मेरी प्यारी बहना कि चूत पर टक्करें मार रहा था. 

सीमा सिसकारी भर उठी. वो मेर से जोर से चिपक गई. उसकी चुचियाँ मेरे सीने में दब गयीं. मैंने सीमा के रसीले होंठ अपने होठों से सटा लिए और अपनी जीभ अंदर घुसा दी. मैं उसे पागलों की तरह चूमने लगा और दोनों हाथों से उसके चूतड़ दबाने लगा. सीमा ने भी अपनी जीभ मेरे मुहं में घुसेड़ दी. हम लगभग पन्द्रह मिनट तक वहीँ खड़े होकर एक दुसरे को चूमने लगे. बीच बीच में अपनी मस्त बहना की चूची दबा देता और कभी उसकी चूत का दाना मसल देता. मैं उसके सारे शरीर को सहला रहा था. वाह क्या चिकना बदन था मेरी बहन का. 

सीमा मदहोश हुए जा रही थी. मैंने उसके हर एक अंग को चूमना शुरू किया. वो तड़प उठी. मैं हाँफते हुए उससे अलग हुआ और एक झटके से अपना पजामा और कुरता निकाल दिया. सीमा ने भी देरी नहीं की. उसने झटके से नीचे बैठ कर मेरा अंडरवीयर उतार दिया. मेरा तन्नाया हुआ लंड मेरी प्यारी बहना के मुहं से जा टकराया. सीमा ने मेरे लंड पर एक प्यारी सी पप्पी ली. हम दोनों भाई बहन इस वक्त पूरे के पूरे नंगे थे. यानि एक भी कपडा नहीं. हम एक दुसरे के अंगों से खिलवाड़ करने लगे. मैंने लंड को पकड़ा और उसके मुहं पर फेरने लगा. उसके होठों पर लिपस्टिक की तरह अपने लंड फिराने लगा. मैंने एक हाथ से उसके चेहरे पर फैली जुल्फों को हटाया और अपना लंड उसके मुहं में डाल दिया. वो मज़े से मेरा लंड चूसने लगी. आह.......... मैं तो जैसे सातवें आसमान में पहुँच गया. मैं उसके बाल सहला रहा था और खुद बी आगे पीछे हो रहा था. सीमा कमाल का लंड चूस रही थी जैसे उसे पहले से प्रक्टिस हो. पर उसने ऐसा पहले कभी नहीं किया था. शायद उसने ब्लू फिल्म देख कर सीखा होगा.

सीमा: भय्या, इसमें से थोड़ा थोड़ा नमकीन लिक्विड निकल रहा है.

मैं: इसे चूस ले मेरी जान. अभी तो थोड़ा सा निकल रहा है. थोड़ी देर मैं फव्वारा छूटेगा. पर तू रुकना नहीं, और मेरा पूरा जूस पी लेना.

सीमा: ठीक है भैय्या.

और थोड़ी देर बाद जैसा कि मैंने कहा था, मेरा पूरा वीर्य पिचकारी के साथ उसके मुहं में भर गया. मैं अपनी सगी बहना के मुहं में झड़ गया. बेचारी सीमा थोड़ा तो निगल पायी, बाकी सारा वीर्य उसके मुहं से बह कर नीचे बूब्स तक फ़ैल गया. मैंने अपने लिसलिसे लंड से अपनी प्यारी बहना का फेशिअल किया और बचा हुआ उसके बूब्स पर मसल दिया. मेरा लंड बड़ी तेजी से सिकुड़ कर छः इंच से मात्र दो इंच का हो गया और सीमा बड़ी हैरानी से इस कौतुक को देखती रही.

सीमा: भैय्या ये तो बहुत छोटा हो गया. ये कमाल कैसे हुआ?

मैं: झड़ने के बाद हर लड़के कैसा ही हो जाता है. थोड़ी देर बाद देखना ये फिर से बड़ा हो जाएगा.

सीमा (बड़े आश्चर्य से): अच्छा?

मैं: हाँ तू देखना अभी.

सीमा: ओके. भय्या मैं अभी मुहं धो कर आती हूँ.
दस मिनट बाद सीमा आ गयी. मैं तब तब वोदका का दूसरा पेग मार चुका था. उसके आने के बाद मैं भी बाथरूम में फ्रेश हो कर आ गया और बोला,

चल मेरी बहना अब मैं भी तेरी चूत का रस पीना चाहता हूँ.

आज जो चाहे कर लो भैय्या. मैं आज से आपकी हूँ.

मैंने उसे बाँहों में भर लिया और गाल पर किस करके कहा, तो तू पहले मना क्यों कर रही थी?

मैं आप को परख रही थी. आप मेरी बात मान गए इसलिए मैं भी आपकी बात मान गयी. एक बात और, कोई लड़की एक बार में हाँ नहीं बोलती. अगर वो जल्दी से मान जाती है तो उसे बदचलन समझा जाता है. फिर आपकी हालत देख कर मैने सोचा कि अपना जिस्म दिखा कर अपने ही सगे भैय्या को तरसाना ठीक बात नहीं

ओह. अब समझा. पर तेरे दिल में पहले से मेरे लिए कुछ था?

नहीं भैया. कसम से कुछ नहीं था. मैं आपको एक भाई के नाते ही देखती थी. पर आज मोडेलिंग के चक्कर में ये सब हो गया.

मैंने प्यार से उसे अपने से चिपका कर कहा, आज से तू मेरी मॉडल है. मेरे लिए तू कपड़े उतारेगी, नंगी होएगी और किसी के सामने नहीं. समझ गयी?

सीमा: हाँ भैय्या समझ गयी. अब मुझे मोडेलिंग से कोई लेना देना नहीं है. 

मैं: चल अब जाकर बिस्तर पर लेट जा. 

सीमा (मचल कर): खुद ही उठा कर ले चलो ना.

मैंने अपनी फूल सी कोमल बहन को उठा लिया उसने झट से मेरे गले में बाहें डाल दीं. मैं उसे बिस्तर पर गिराते ही बोला, देख सीमा मेरा लंड किस तरह से खड़ा हो रहा है.

दरअसल सीमा को गोद में लेते ही मेरा लंड फिर खड़ा होने जा रहा था और मैं इसे अपनी प्यारी बहना को दिखाना चाहता था. सीमा बड़ी हैरानी से मेरे लंड के बढ़ते हुए साइज़ को देखती रही. फिर उसने मेरे लंड को बड़े प्यार से अपने हाथ में ले लिया और उसकी स्किन पीछे कर दी. मेरे लड़ का सुपाड़ा लाल होकर अंगारे की तरह गर्म था.सीमा के लिए ये एक नया अनुभव था. मैं सीमा के उपर लेट गया. उसकी कमसिन जवानी मेरे जिस्म के नीचे दबी हुई थी. मैं बड़े प्यार से अपनी बहना के बूब्स दबाने लगा और उससे पूछा सीमा, मेरी जान, मेरी प्यारी बहन, सच सच बता मज़ा आ रहा है ना?

सीमा मेरे होंठों को चूसते हुए बोली, आह भय्या, ऐसा मज़ा तो जिंदगी में कभी भी नहीं आया. जी चाहता है आप और मैं दिन रात ऐसे ही नंगे होकर एक दूसरे से लिपटे रहे.
उसने मुझको और जोर से भींच लिया.

सीमा की चूत सहलाते हुए मैंने पूछा मेरी जान, अपनी चूत देगी मुझको? बोल क्या चुदवायेगी अपने भाई से?

हाँ भैय्या, आज चोदो मुझे. जी भर के. मैं आज से तुम्हारी हूँ. (शर्माते हुए) आज से आप मेरे भाई भी हो और पति भी.

तो चल पहले अपनी चूत का रस पिला दे मेरी जान. फिर मैं बहनचोद बन कर अपनी प्यारी बहना की चूत का उदघाटन अपने इस मस्त लंड से करूँगा.

तो फिर देर किस बात की है? चूस लो अपनी बहना की चूत को आज भय्या

मैं सीमा को किस करते हुए बूब्स के नीचे पेट से होता हुआ उसकी मखमली चूत तक जा पहुंचा. उसकी साफ़ चूत पर हाथ फेरते हुए मैंने पूछा, इसकी शेव कब बनाई तुने?

सीमा (शर्माते हुए): अभी तक बाल भी नहीं आये.

वाह! क्या बात थी. मैं अपनी बहन कि चिकनी चूत देखकर निहाल हो गया. वो एकदम छोटी सी थी. दोनों फांकें जुड़ी हुई थीं. उसकी चूत से बड़ी मीठी खुशबु आ रही थी. मैंने अपनी बहन चूत की दोनों फांकों को अलग किया और जैसे ही अपनी जीभ का किनारा टच किया, सीमा जोर से उछल पड़ी.

मैं: अरे? क्या हुआ?

सीमा: ओह भैय्या, ये क्या कर रहे हो? मुझे बहुत गुदगुदी हो रही है.

मैं (शरारत से मुस्कुराते हुए): तो ना करूँ?

सीमा: नहीं नहीं. (शर्माते हुए) प्लीज़ चाटो ना! (फिर उसने मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत के मुहं के आगे कर दिया और टांगें खोल के लेट गयी).

फिर मैंने अपनी प्यारी गुड़िया सी बहना की मस्त चूत चाटनी शुरू की. सीमा से कण्ट्रोल नहीं हो रहा था. वो बार बार अपने चूतड़ उछल कर मेरा साथ दे रही थी. उसके मुहं से तेज सिसकियाँ निकल रही थीं.

आ आ आ हह हह हा य ओह उफ़ मेरी माँ. और चूसो तेज भैय्या बहुत मज़ा आ रहा है. आह...................वाह .......आप तो कमाल का चूसते हो भैय्या.........करते रहो.....

फिर एक आनंद से भरी चीख से वो निढाल हो कर शांत पड़ गयी. उसकी चूत से झर झर कर काम रस निकल रहा था जिसे मैं पूरा का पूरा पी गया. मैं फिर भी लगातार उसकी चूत चाटता रहा. वो दो बार झड़ चुकी थी. 

सीमा उठी और मुझे पीठ के बल लिटा कर मेरे ऊपर चढ़ गयी और मुझे ऊपर से नीचे तक चूमने लगी. उसने मेरे निप्पल चूसने शुरू किये तो मैं पागल सा हो गया. आनंद से मेरा बुरा हाल था. फिर वो मेरे ही स्टाइल से नीचे आई. पहले उसने मेरी बाल्स को मुहं में लिया और चूसने लगी. मैं सिस्कारियां भर रहा था.

ओह मेरी प्यारी बहन, ये कहाँ से सीखा तूने? तू तो पूरा मज़ा दे रही है मेरी जान. हाय मेरी तो जान ही निकल जायेगी. आह................उह..........आ...अ..आ.....अब चूस मेरे लंड को मेरी बहन. अपने भाई का लंड अपने मुहं में ले कर मुझे निहाल कर दे. तेरे जैसी बहन पा कर मैं धन्य हो गया. आह ..........चूस मेरे लौड़ा मेरी जान.........और जोर से.........निकाल दे मेरा रस...........रुकना मत......लगी रह.....आह.....और तेज....और तेज............आह....

सीमा तेज़ी से मेरा लंड चूस रही थी. इस बार वो एकदम परफेक्ट तरीके से चूस रही थी और एक हाथ से मेरी बाल्स से भी खेल रही थी. इस से मुझे दुगना मज़ा मिल रहा था. लगभग पन्द्रह मिनट चूसने के बाद मेरे लंड ने ढेर सारा वीर्य उगल दिया. इस बार मेरी प्यारी बहना ने एक भी बूँद बेकार नहीं जाने दी. उसने मेरा पूरा का पूरा वीर्य चाट चाट कर मेरे लंड को खाली कर दिया.

अब तक मैं तकरीबन छः सात बार झड़ चुका था और सीमा का भी यही हाल था. हम दोनों बुरी तरह से थक चुके थे पर असली चुदाई बाकी थी. मेरे लंड में थोड़ा थोड़ा दर्द होने लगा था. सीमा का बदन भी दुःख रहा था. मैंने घड़ी की और देखा, शाम के छः बजे थे. ममी के आने का वक्त भी हो चला था. इसलिए हम दोनों भाई बहनों ने कपड़े पहने और एक दूसरे को किस करके ममी के आने से पहले ही अलग अलग अपने कमरों में चले गए.

Wednesday, December 29, 2010

भाई ने बताया चुदाई क्या है?

बात उस समय की है जब मैं बी.ए. प्रथम वर्ष में पढ़ती थी। मेरी उम्र १८ थी। मुझे चुदाई के बारे में ज्यादा नहीं पता था, बस इतना जानती थी कि लड़का और लड़की कुछ करते हैं जिसमे बहुत मज़ा आता है। यहाँ तक कि मैंने किसी लड़के का लंड भी नहीं देखा था। इस उम्र में चुदाई के लिए तड़पना एक सामान्य बात थी तो मैं भी तड़पती थी लेकिन घर की बंदिशों के कारण कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं था इसलिए मैं अभी तक कुँवारी थी। मैंने यह कभी भी नहीं सोचा था, मेरी पहली चुदाई मेरे बड़े भाई (बुआजी के लड़के) के साथ होगी। मेरे घर में मेरे अलावा मेरी माँ, मेरा एक छोटा भाई है।

अब मैं सीधे अपनी कहानी पर आती हूँ, हुआ यूँ कि मेरी नानी की तबियत अचानक ख़राब हो गई जो कि शहर से लगभग ५० किलोमीटर दूर एक गाँव में रहती थीं। शाम के ७ बज रहे थे मम्मी को वहाँ जाना था लेकिन मम्मी को मेरी चिन्ता हो रही थी कि मुझे घर में अकेला कैसे छोड़े, क्योंकि सुबह मेरी एक विषय की परीक्षा थी। मम्मी सोचने लगी किसको मेरे साथ छोड़ कर जाए? उन्होंने सबसे पहले चाचाजी को फ़ोन लगाया लेकिन चाचाजी उस समय शहर से बाहर थे और सुबह से पहले वापस नहीं आ सकते थे तब उन्होंने मेरे भैया (बुआ जी के लड़के) को फ़ोन लगाया जो कि शहर में ही दुकान करते थे। मम्मी ने उनको सारी बात बताई तो वो आने के लिए तैयार हो गए। मेरी चिन्ता समाप्त होने के बाद मम्मी मुझे जरुरी हिदायत देकर मेरे छोटे भाई के साथ चली गई।

रात के ९ बज गए, मैं भैया का इंतज़ार कर रही थी। सर्दियों का समय होने के कारण रात जल्दी गहरा गई। चारो तरफ़ एकांत महसूस कर मुझे डर लगने लगा। मैंने भैया को फ़ोन लगाया और कहा- जल्दी आओ ! मुझे डर लग रहा है। भैया ने मुझे १० मिनट का कहकर फ़ोन रख दिया। मैं उनका इंतज़ार कर ही रही थी कि अचानक लाइट चली गई। अब मुझे और डर लगने लगा। मैं भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि भैया जल्दी आएँ, २० मिनट और गुजर गए लेकिन भैया नहीं आए। अब मैं रोने लगी। तभी दरवाजे से भैया की आवाज़ आई मैं जल्दी से उठी और दरवाजा खोलते ही भैया से लिपट के रोने लगी।

भैया ने कहा- क्या बात है क्यों रो रही हो?
मैंने कहा- सुनील भैया आपने आने में देर क्यों कर दी मेरा तो डर के मारे बुरा हाल था।
उन्होंने कहा दुकान पर थोड़ा काम था इसलिए देर हो गई। अब मैं आ गया हूँ अब डरने की कोई ज़रूरत नहीं।
सुनील भैया मुझसे उम्र में ५ साल बड़े थे लेकिन बचपन से ही साथ-साथ रहे थे इसलिए काफी हद तक दोस्त थे। उनके आने के बाद मैंने उनको खाना खिलाया और खाना खाने के बाद भैया हॉल में जाकर टी.वी. देखने लगे। मैं अपना काम निपटाकर उनके पास आकर पढ़ने लगी। उस समय तक मेरे मन बिल्कुल ख्याल नहीं था कि मैं भैया से चुदवाऊँ।

रात के ११.३० बज चुके थे। भैया अभी तक टी.वी. देख रहे थे। मुझे नींद आने लगी थी इसलिए मैं कपड़े बदलने के लिए दूसरे कमरे में चली गई। कमरे का बल्ब फ्यूज़ होने के कारण कमरे में अँधेरा था। मोमबत्ती की रोशनी में मैंने अपनी नाईटी उठाई और कपड़े बदलने लगी। मैंने सबसे पहले अपनी कमीज़ उतारी और उसके बाद ब्रा क्योंकि मुझे रात में ब्रा पहनकर सोने की आदत नहीं थी। मैंने अपनी सलवार का नाड़ा खोला ही था कि अचानक एक चूहा कहीं से फुदकता हुआ मेरे ऊपर आ गया और मेरी चीख निकल गई। मेरी चीख सुनकर भैया तुरन्त मेरे कमरे में आए। मुझे कुछ नहीं सूझा और डर के मारे चूहा-चूहा कहते हुए उनसे चिपक गई। मुझे इतना भी होश नहीं रहा कि इस समय मैं सिर्फ़ पैंटी में थी।
मेरे नंगे जिस्म का एहसास जब भैया को हुआ तो उनका लंड खड़ा हो गया जिसका एहसास मुझे मेरी कमर पर होने लगा। मैं एकदम उनसे अलग हुई और उनसे जाने को कहा। लेकिन भैया एकटक होकर देखते रहे। मोमबत्ती की मद्धिम रोशनी में उनको मेरे जिस्म के स्पष्ट दर्शन हो रहे थे। उनकी आँखों में वासना उतरती नज़र आने लगी। उनके इस तरह देखने से मेरा जिस्म भी गरम होने लगा और मैं मन ही मन अपनी चुदाई के सपने देखने लगी। मैं नज़रें नीची कर ख्यालों में उनके लंड को अपनी चूत में महसूस करने लगी। इतना सोचने से ही मुझे महसूस हुआ कि मेरी पैंटी गीली हो चुकी है। मैंने नज़र उठाकर भइया कि तरफ़ देखा तो चौंक गई। वो जा चुके थे और मेरी चुदाई के सपने पल भर में टूट चुके थे।
रात के १२.०० बज चुके थे। मैं अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी लेकिन अब मुझे नींद नहीं आ रही थी। भइया अभी भी हॉल में टी.वी. देख रहे थे। मेरा जिस्म अभी भी गरम था और चुदाई के पहले एहसास ने मेरे रोम-रोम में सेक्स भर दिया था। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ?
यही सोचते-सोचते कब मेरा हाथ मेरी पैंटी में चला गया पता ही नहीं चला। अब मेरी उँगलियाँ मेरी चूत के साथ खेल रहीं थीं। मैं अपनी उँगलियों से चुदाई करके अपने आपको संतुष्ट करने लगी। लेकिन उँगलियों से मुझे कुछ खास मज़ा नहीं आ रहा था इसलिए मैं किसी मोटी चीज़ की तलाश में अपने बिस्तर से उठी। मैंने मोमबत्ती के पैकेट में से एक नई मोमबत्ती ली और अपने रूम में आ गई। रूम में अभी भी मोमबत्ती जल रही थी।
मैंने अपनी पैंटी उतार कर फेंक दी, अब मैं सिर्फ़ नाईटी पहने थी उसके नीचे ना तो ब्रा थी ना ही पैंटी। मैंने अपनी एक टांग टेबल पर रखी और दीवार के सहारे स्थिति बनाकर अपनी नाईटी ऊपर कर मोमबत्ती को अपनी चूत में डालने लगी। मोमबत्ती काफी मोटी थी और मेरी चूत बिल्कुल कुंवारी थी इसलिए मोमबत्ती अन्दर नहीं जा रही थी। लेकिन मेरे ऊपर तो चुदाई का भूत सवार था सो मोमबत्ती को जबरदस्ती अपनी चूत में पेल दिया।
मोमबत्ती के अन्दर जाने से मुझे काफी दर्द हुआ और मेरे ना चाहते हुए भी एक घुटी सी चीख मेरे मुंह से निकल गई। दो मिनट तक मोमबत्ती को अपनी चूत में डाले मैं वैसे ही खड़ी रही। फिर मैंने मोमबत्ती को अन्दर-बाहर करना शुरू किया। अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह, उह्ह्ह्ह्ह्ह ................. मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं, मुझे मोमबत्ती से चुदाई करने में मज़ा आने लगा।
मैं कल्पनाओं में खोई हुई मोमबत्ती को सुनील भइया का लंड समझने लगी और बड़बड़ाने लगी 'हाँ............ सुनील भइया, जोर से डालो अपना लंड, आज मेरी प्यास बुझा दो, जाने कितने दिनों से प्यासी है मेरी चूत आज इसको जी भर के चोदो और अपने लंड की ताकत से इसके दो टुकड़े कर दो, फाड़ दो, हाँ...... फाड़ दो....... मेरी चूत को। अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह, उम्म्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह................. मेरी सिसकारियाँ तेज़ होती जा रही थीं।
अब मुझे मोमबत्ती से चुदाई करने में अत्यन्त मज़ा आ रहा था। मेरा हाथ तेज़ गति से मोमबत्ती को मेरी चूत में पेल रहा था। मैं मदमस्त होकर पूरा आनंद ले रही थी। मैं अपने चरम पर पहुँच चुकी थी। मेरे शरीर से पसीना आने लगा था और मेरी टाँगे काँपने लगी थीं। मेरा इस स्थिति में खड़ा होना मुश्किल हो रहा था लेकिन मुझे इस स्थिति में बहुत मज़ा आ रहा था इसलिए मैं अपनी स्थिति बदलना नहीं चाह रही थी। मेरा हाथ मुझे पूरी तरह से संतुष्ट करने के लिए बहुत तेज़ गति से चलने लगा। आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह,................. उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह,.............उम्म्म्म्ह्ह्ह्ह............ और आखिरकार वो पल आ ही गया, मेरा शरीर पूरी तरह जकड़ने लगा, अब मैं फर्श पर गिर पड़ी, अपनी दोनों टाँगे फैलाकर मोमबत्ती को फिर से डालने लगी और एक तेज़ आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह के साथ मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया जो फर्श पर फैल गया। अब मैं शांत हो चुकी थी, मेरी चूत की प्यास काफी हद तक बुझ चुकी थी। लेकिन मेरी असली चुदाई तो अभी बाकी थी।
सुनील भइया दरवाज़े पर खड़े थे। उनको देखकर मेरे होश उड़ गए। मैं फर्श से उठकर खड़ी हो गई और भइया को देखने लगी। भइया रूम में अन्दर आ गए और उन्होंने अपनी टी-शर्ट व हाफ-पैंट उतार दिया, अब वो सिर्फ़ अपनी फ्रेंची चड्डी में मेरे सामने थे जिसमे उनका तना हुआ लंड साफ़ दिखाई दे रहा था। वो पास आए और अपनी चड्डी में से अपना लंड निकालकर मेरे हाथ में रखकर बोले, "आयुषी, जरा चेक करो ये मोमबत्ती से मोटा है या नहीं?" उनके लंड को देखकर मेरी आँखें फटी की फटी रह गई। लंड वाकई में बहुत मोटा था और उसका सुपाड़ा तो कुछ ज्यादा ही मोटा था।
मैंने भइया से पूछा, "भइया, लंड इतना मोटा होता है?"
भइया ने कहा, "नहीं, आयुषी हर किसी का इतना मोटा नहीं होता है।"
मैंने फिर भइया से पूछा, "इसका, सुपाड़ा इतना मोटा है, ये चूत में अन्दर कैसे जाता होगा?"
भइया ने कहा, "अभी थोड़ी देर में पता चल जाएगा, ये अन्दर कैसे जाता है।"
और भइया ने इतना कहकर अपनी चड्डी उतार दी अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगे थे। उनका लंड किसी लोहे की रोड की तरह तना हुआ खड़ा था। मेरी नज़र उससे हट ही नहीं रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे मैं कोई अजूबा देख रही हूँ और क्यूँ ना लगे, लंड पहली बार जो देख रही थी। खामोशी को तोड़ते हुए भइया ने मुझे घुटनों पर बैठने को कहा और मैं बैठ गई।
फ़िर भइया मेरे पास आए और अपने लंड को मेरे होठों से लगाते हुए बोले, "इसे अपने मुंह में डालो।"
मैंने कहा, "नहीं, भइया ये बहुत मोटा है मेरे मुँह में नहीं जाएगा।"
भइया को अब थोड़ा गुस्सा आ गया और गुस्से में बोले, "मुँह में लेती है या सीधा तेरी चूत में डालूँ?"
मैंने कहा, "नहीं भइया चूत में नहीं, वो फट जायेगी, मैं मुँह में लेती हूँ।"
ऐसा कहकर मैंने उनका लंड अपने मुँह में लिया। लंड का सुपाडा बड़ा होने के कारण मुँह में फँस रहा था और मैं लंड को मुँह में लिए उसे चूस नहीं पा रही थी लेकिन भइया के इरादे कुछ और थे उन्होंने मेरे बाल पकड़े और मेरे मुँह में धक्के देने लगे। मैं कुछ नहीं बोल पा रही थी और मेरी आँखों से आँसू निकलने लगे थे। भइया पूरी तरह से वहशी हो गए थे और मेरे बालों को खीचते हुए मेरी मुँह को चूत समझकर चोदने लगे थे।
मेरी हालत बहुत ख़राब हो रही थी और आँसू भी लगातार बह रहे थे लेकिन भइया के धक्के लगातार तेज़ हो रहे थे। वो मेरे बालों को इस तरह खींच रहे थे जैसे मैं उनकी बहन नहीं कोई रण्डी हूँ। भइया का मुँह लाल पड़ गया था और उनके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं। मैं अपनी हालत से सचमुच में रोने लगी थी लेकिन उनको मेरे ऊपर जरा भी तरस नहीं आ रहा था। वो तो किसी जानवर की तरह मेरे मुंह को चोदते जा रहे थे, कभी वो मेरे बाल खींचते तो कभी मेरे गाल पर चपत लगाते, वो इतने वहशी हो गए थे कि मुझे उनसे डर लगने लगा था।
मैं मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रही थी, मुझे बचा लो। और भगवान ने मेरी सुन ली, भइया शायद झड़ने वाले थे इसीलिए उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह से बाहर निकाल लिया। मैंने एक गहरी साँस ली और सिर पकड़कर बैठ गई। भइया बोले, "आयुषी ज़रा अपनी जीभ से मेरे लंड को चाटकर इसका पानी निकाल दो।"
मैंने भइया के लंड की तरफ़ देखा वो अब भी तना हुआ खड़ा था, उनके लंड को देखकर मेरा शरीर गरमा गया, मैं घुटनों पर चलती हुई भइया के लंड के पास पहुँची और उसे हाथ में लेकर जीभ से चाटने लगी। मेरे चाटने से भइया की सिसकारियाँ निकलने लगीं और वो बोलने लगे, "शाबाश, मेरी प्यारी बहना ! चाट और चाट, अभी रसमलाई निकलेगी उसे भी चाटना।"
इतना कहकर भइया ने एक जोर की अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.......... के साथ वीर्य मेरे मुंह पर छोड़ना शुरू कर दिया, मेरा मुंह पूरी तरह से उनके वीर्य से नहा गया, कुछ मेरे होठों पर भी रह गया जिसे मैंने जीभ से चाट लिया और उसके बाद भइया के लंड को भी चाटकर साफ़ कर दिया
भइया ने मुझे खड़ा किया और तौलिए से मेरा मुंह साफ़ कर होठों से होंठ मिलाकर चूमना शुरू कर दिया। ५ मिनट के उस किस ने मेरे सेक्स को चरम पर पंहुचा दिया और मेरी चूत लंड खाने के लिए बेकरार होने लगी। भइया शायद इस बात को समझ गए थे इसलिए उन्होंने किस करते हुए ही मेरी नाईटी उठाकर अपना एक हाथ मेरी चूत पर ले गए और उसे सहलाने लगे।
मेरी बेकरारी भइया का स्पर्श अपनी चूत पर पाकर और बढ़ गई और मैं भइया से कहने लगी, "भइया, अब और सहन नहीं होता है, मेरी चूत में अपना लंड डालो प्लीज़ मुझे चोदो और बताओ चुदाई क्या है?"
भइया बोले, "आयुषी, चिंता मत करो पूरी रात अपनी है आज मैं तुझे वो मज़ा दूँगा जिसे तू जिंदगी भर याद रखेगी।"
ऐसा कहकर भइया ने अपनी एक उँगली मेरी चूत में डाल दी। मैं उनकी उँगली को चूत में पाकर कसमसा गई और सिसकारियाँ लेने लगी। भइया अपनी उँगली को मेरी चूत में अन्दर बाहर करने लगे उन्हें शायद मेरी नाईटी से दिक्कत हो रही थी इसलिए उन्होंने चूत में उँगली डालते हुए ही मुझसे नाईटी को उतारने के लिए कहा और मैंने किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह उनकी बात मानकर अपनी नाईटी को सिर के ऊपर से उतारकर फ़ेंक दिया।
भइया की उँगली मुझे पूरा आनंद दे रही थी और मैं सिसकारियाँ लेकर मज़ा ले रही थी। मुझे मज़ा लेते देख भइया ने अपनी दूसरी ऊँगली भी मेरी चूत में डाल दी। और स्पीड से अन्दर बाहर करने लगे साथ ही अपने अंगूठे से मेरी चूत के ऊपरी हिस्से को रगड़ने लगे। उनकी उँगलियाँ भी मुझे इतना मज़ा दे रही थी कि मुझे जन्नत का अनुभव हो रहा था, मुझे लग रहा था कि मैं आसमान में कहीं उड़ रही हूँ। भइया की उँगली-चुदाई ने मुझे एक बार फिर झड़ने के लिए मजबूर कर दिया, मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया और मैं एक बार फिर निढाल होकर फर्श पर गिरने लगी लेकिन इस बार भइया ने मुझे अपनी बाँहों में थाम लिया।
भइया ने मुझे उठाकर बेड पर लिटा दिया और मुझे चूमने लगे, भइया का एक हाथ अभी भी मेरी चूत को सहला रहा था। उनका ध्यान पहली बार मेरे वक्षस्थल पर गया उन्होंने अपना मुँह मेरे ३४ साइज़ की चूचियों पर रख दिया और बुरी तरह से मेरी घुंडियों को चूसने लगे, उनका हाथ बराबर मेरी चूत को सहला रहा था।
भइया काफी एक्सपर्ट थे वो अच्छी तरह जानते थे कि लड़की को कैसे गरम किया जाता है वो ये सब मुझे फिर से गरम करने के लिए कर रहे थे और वो इसमे सफल भी हो रहे थे क्योंकि धीरे-धीरे मेरे अन्दर सेक्स फिर से जागने लगा था। वो मेरी चूचियों को छोड़कर मेरी कमर पर आ गए, नाभि के आस-पास चुम्बन देते हुए वो सीधे मेरी चूत पर पहुँच गए और उन्होंने अपने होंठ मेरी चूत के होंठो पर रख दिए। उनके होठों का एहसास पाकर मेरे मुंह से सिसकारी निकल पड़ी, भइया ने मेरी चूत चाटना शुरू कर दिया।
हाय........... मैं क्या बताऊँ आपको उस समय मुझे ऐसा लगा मानो स्वयं कामदेवता मेरी चूत को चाट रहे थे और मेरी नस-नस में सुधा भर रहे थे, मेरी चूत के होंठ सेक्स की प्रबलता से हिलने लगे थे, मैं भइया से लगभग भीख माँगते हुए बोली," प्लीज़ भइया अपना लंड डालो नहीं तो मैं मर जाउँगी।"
भइया ने मुझसे कहा, "बस मेरी जान अब तुझे और इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।"
ऐसा कहकर उन्होंने मेरी दोनों टाँगे उठाकर अपने कंधे पर रखा और अपने लंड का सुपाडा मेरी चूत पर रगड़ने लगे, लंड को अपनी चूत पर पाकर मैं तड़प उठी और भइया से गाली देती हुई बोली," बहनचोद क्यों तड़पा रहा है, डालता क्यों नहीं?"
मेरी बात सुनकर भइया ने जोश में एक जोरदार धक्का दिया और उनका आधा लंड मेरी चूत चला गया। मैं दर्द के मारे छटपटाते हुए भइया से लंड को बाहर निकालने के लिए बोलने लगी तो भइया ने जोरदार चांटा मेरे गाल पर रसीद कर दिया और बोले, "साली, घंटे भर से चिल्ला रही थी डालो-२ ! अब डाल दिया तो चूत फट गई।"
एक और जोरदार धक्के के साथ भइया ने अपना पूरा लंड मेरी चूत में पेल दिया। मैं बुरी तरह से हाथ-पैर पटक कर भइया की कैद से छूटने की कोशिश करने लगी और चिल्लाने लगी, "भइया, प्लीज़ मैं मर जाउँगी, मेरी चूत फट जाएगी अपना लंड बाहर निकालो।"
लेकिन भइया ने मेरी अनसुनी करते हुए एक और तेज़ धक्का दिया तो मेरे मुंह से चीख निकल गई। मेरी चीख सुनकर भइया ने मेरा मुँह अपने एक हाथ से बंद कर दिया और धक्के देने शुरू कर दिए। ५ मिनट तक भइया के जोरदार धक्के सहने के बाद मुझे मज़ा आने लगा और मेरे मुँह की चीखें कामुक सिसकारियों में बदलने लगीं। अब मैं भइया को अपनी कमर उचका कर सहयोग करने लगी, भइया के धक्के लगातार तेज़ होते जा रहे थे और मेरी सिसकारियाँ और कामुक होती जा रहीं थीं। १० मिनट के बाद मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया लेकिन भइया अभी भी नहीं झड़े थे और धक्के मार-मार कर मेरी चूत का पूरा आनंद ले रहे थे।
चुदाई क्या होती है, चुदते समय मुझे मालूम हो गया, जितना मज़ा चुदाई में है उतना किसी और चीज़ में नहीं। भइया के धक्कों की रफ़्तार शताब्दी एक्सप्रेस को भी मात कर रही थी और मैं कामुक अंदाज़ में भइया के लंड की तारीफ़ कर रही थी। "भइया, तुम्हारे लंड में बहुत दम है, मोमबत्ती का मज़ा इसके सामने कुछ नहीं, प्लीज़ भइया आज मुझे जी भर चोदो, मेरी चूत की प्यास को ठंडा कर दो।"
भइया ने मेरी बात का जवाब मुंह से ना देते हुए अपने लंड से दिया, धक्कों की गति को दोगुना करते हुए भइया ने मेरी रेल बना दी, कुछ देर के बाद मुझे महसूस हुआ की मेरी चूत में कुछ गरम-गरम गिर रहा है, मैं समझ गई कि यह भइया का वीर्य है और उनके साथ मेरी चूत ने भी एक बार फिर पानी छोड़ दिया और इस तरह मेरी पहली चुदाई पूरी हुई।
भइया मेरी चूत में ही लंड डाले हुए मेरे ऊपर लेट गए। कुछ देर आराम करने के बाद मैंने किचन में जाकर चाय बनाई और हम दोनों बैठकर चाय पी, इस दौरान हम दोनों पूरी तरह से नंगे ही रहे। रात के ३ बजने के बाद मैंने भइया से सोने के लिए कहा तो भइया ने एक बार फिर चुदाई करने की इच्छा ज़ाहिर की। मैं भी राजी हो गई और भइया ने इस बार मुझे फर्श पर कुतिया बनाकर चोदा उसके बाद हम दोनों नंगे ही सो गए।
सुबह ६ बजे उठकर मैं जल्दी-जल्दी तैयार हुई और पौने सात बजे भइया को उठाया तो मुझे काली टॉप और काली लॉन्ग स्कर्ट में देखकर भइया का लंड एक बार फिर खड़ा हो गया और उन्होंने केवल मेरी पैंटी उतारकर किचन में दीवार के सहारे ही चोद डाला। भइया ने मुझे परीक्षा-केन्द्र पर छोड़ा और परीक्षा देकर जब मैं लौटी तो मम्मी आ चुकी थी। इसके बाद आज तक मुझे कभी मौका नहीं मिला कि मैं भइया से चुदाऊँ हालाँकि आज मेरी शादी हो चुकी है तो मेरी चुदाई हर रात होती है लेकिन भइया के लंड के लिए मैं आज भी बेकरार हूँ।


Tuesday, December 28, 2010

भाई बहन का प्यार

सबसे पहले मैं आप लोगों को पात्र-परिचय करा दूँ !

संजय : 25 साल, शादीशुदा युवक

मनोहर : संजय के पिताजी

सीता देवी : संजय की माताजी

सुष्मिता : संजय की बुआ

सुरेन्द्र : संजय के फ़ूफ़ा (सुष्मिता बुआ के पति)

सविता : 22 साल, संजय की बहन

निर्मला : 22 साल, संजय की बुआ की लड़की

अशोक : 27 साल का संजय की बुआ का लड़का

सुधा : 26 साल की संजय की भाभी (अशोक की बीवी)

सब लोग मुंबई में ही रहते हैं : संजय का परिवार मीरा रोड पर और बुआ का परिवार रहता है अंधेरी वेस्ट पर !

यह बात छः महीने पहले की है जब संजय के पिताजी मनोहर ने सुरेन्द्र से दो लाख रुपए कुछ महीने पहले उधार लिए थे।

तो एक दिन पिताजी ने संजय को दो लाख रुपए से भरा बैग देकर कहा- ज़ाओ अपनी बुआ के घर जा कर यह दे आओ।

संजय नाश्ता करके बैग लेकर सीधा अपनी बुआ के घर पहुँच गया। समय दोपहर का एक बजा होगा।

आगे की कहानी संजय की जुबानी !

मैंने डोर-बेल बजाई लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला। मैंने 3 बार कोशिश की लेकिन किसी ने दरवाज़ा नहीं खोला। मैंने दरवाज़े को धक्का दिया तो दरवाज़ा खुल गया, मैं जूते निकाल कर दरवाज़े को बंद करके सीधा अंदर गया और बुआ को आवाज़ देने लगा।

फिर मैं सीधा किचन में गया। वहाँ पर भी कोई नहीं था। फिर मैंने बुआ के बेडरूम के पास जा कर देखा कि बेड रूम लॉक है। मैं वहाँ से निर्मला के बेडरूम के पास गया और दरवाज़े को धकेला, दरवाज़ा खुला ही था। मैं अंदर गया और देखा कि निर्मला सिर्फ़ लाल रंग की पैंटी पहने हुए थी और अपने बाल तौलिये से सुखा रही थी।

वाह ! क्या नज़ारा था ! क्या मम्मे-चूची थी- एकदम दूध की तरह सफेद और गोल-गोल और कड़क और उसका फिगर- वाऽऽह ! 32-34 मम्मे, 25 कमर और 34 गाण्ड !

और मेरा लंड पैन्ट में खड़ा होने लगा। मेरे अंदर की वासना जाग गई क्योंकि मैंने एक महीने से चुदाई नहीं की थी क्योंकि मेरी पत्नी की तबीयत खराब चल रही थी और डॉक्टर ने साफ मना किया था।

मैंने सोचा- मस्त माल है क्यों ना मज़ा ले लूं ! मैंने बैग को नीचे रखा और सीधा निर्मला के पीछे गया और चूचियों पर हाथ रख कर गर्दन पर चुम्बन करने लगा।

निर्मला एक दम घबरा गई और मेरा हाथ पकड़ कर चिल्लाई- कौन हो तुम> यह क्या कर रहे हो? निकल ज़ाओ मेरे कमरे से बाहर !!

तो मैंने उसके कान में धीरे से कहा- मैं हूँ तुम्हारा संजू ! ( सब लोग मुझे संजू कहकर बुलाते थे)

संजू !! (उसने मेरी आवाज़ से पहचान लिया था) तुम यह क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- कुछ नहीं !

तुम अंदर कैसे आए?

मैंने कहा- दरवाज़ा खुला था और मैंने जब बुआ और तुमको आवाज़ लगाई तो किसी ने जवाब नहीं दिया तो मैं तुम्हारे कमरे में देखने आया कि तुम हो या नहीं ! और अंदर आकर देखा तो तुम नंगी खड़ी हो।

इतना कहते ही मैंने फिर निर्मला को अपनी बाहों में लिया और चूची पर हाथ रख कर धीरे धीरे मसलने लगा और उसकी तारीफ करने लगा- तुम कितनी सुंदर हो ! ऐसी सुंदर लड़की मैंने आज तक नहीं देखी। गले पर चूमने लगा और लंड को उसकी गाण्ड पर रगड़ने लगा।

निर्मला छटपटाने लगी और बोली- मुझे छोड़ दो भैया !

मैंने कहा- निर्मला, प्लीज़ !

और एक हाथ नीचे ले जा कर उसकी पैन्टी में डालने लगा और बोला- निर्मला तुम असल में अप्सरा से भी बहुत सुंदर हो ! अगर तुम मेरी पत्नी होती तो मैं तुमसे ही चिपका रहता ! एक पल भी अलग नहीं होता।

इतने में निर्मला ने मुझे धक्का दिया और कहने लगी- नहीं भैया ! यह पाप है आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते ! तुम अपनी बहन के साथ ऐसा नहीं कर सकते !

मैंने कहा- मैं तुम्हारा भाई नहीं हूँ, हम आज से हम दोस्त हैं बॉय फ्रेंड और गर्ल फ्रेंड की तरह ! और दोस्ती में यह सब ज़ायज़ है।

मैं अपने दोनों हाथों से निर्मला के चेहरे को पकड़ कर चूमने लगा और एक हाथ से बाईं बूब को मसलने लगा। मैंने फिर निर्मला को बेड पर लिटा लिया और निर्मला के उपर आकर चूची को मुँह में लेकर को चूसने लगा और एक हाथ को चूत के ऊपर रख कर मसलने लगा।

दोस्तो, अब निर्मला ने साथ देना शुरू कर दिया और धीरे धीरे बोलने लगी- नहीं भैया ! प्लीज़ मत करिए !

और मैंने खड़े होकर जल्दी से अपने कपड़े उतारे और पूरा नंगा हो गया। फिर मैं निर्मला के ऊपर आया और उसको बाहों में लेकर आंख से आंख मिलाकर कहने लगा- वास्तव में तुम बहुत सुंदर और सेक्सी हो ! आई लव यू ! निर्मला आई लव यू ! निर्मला आज मैं बहुत खुश हूँ कि एक अप्सरा जैसी लड़की के साथ मस्ती कर रहा हूँ !

वो अपनी आँखें बंद करके बोली- भैया आप बहुत गंदे हो ! मैं आपके साथ कभी भी बात नहीं करूंगी !

मैंने कुछ नहीं कहा और एक हाथ से चूची की घुंडी को ज़ोऱ-ज़ोऱ से मसलने लगा और वो छटपटाने लगी और सिसकारी निकालने लगी- ओइए माआआआ ओइए ! माआआआआआ !

मैंने भी उसे चूमना चालू कर दिया और वो भी साथ देने लगी। मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाली तो वो भी मेरी जीभ को चूसने का प्रयास करने लगी। करीब 5 मिनट के बाद मैंने उस का हाथ लेकर मेरे लंबे और मोटे लंड पर रख कर कहा- लो मेरे लंड से खेलो !

वो शरम के मारे आंख बंद करते हुए हाथ छुड़ाकर बोली- नहीं ! मैं नहीं खेलूंगी, तुम मुझे छोड़ दो !

मैंने कहा- एक बार हाथ में लोगी तो फिर कभी नहीं छोड़ोगी ! और उसको ज़बरदस्ती हाथ में पकड़ा दिया और उसका हाथ पकड़ कर हिलाने लगा। मेरा लंड करीब 9 इंच का है और हाथ लगने से और भी टाइट और लंबा होकर तड़पने लगा। निर्मला उसको देख कर घबरा गई और बोली- यह तो बहुत ही बड़ा है ! मैं नहीं लूंगी अपने हाथ में ! मुझे डऱ लगता है !

मैंने कहा- कैसा डर ? तुम एक जवान लड़की हो ! इस लंड को आज कल की लड़कियाँ अपनी चूत में लेने के लिए तड़पती हैं तुम इतनी बड़ी हो कर भी डरती हो ? कल जब तुम्हारी शादी होगी और तुम्हारा पति तुमको सुहागरात में चोदेगा तो तुम क्या करोगी ? डर के मारे तुम वापस अपने मायके आओगी या फिर पति से चुदवाओगी?

निर्मला बोली- तुम इतनी गन्दी बात क्यों कर रहे हो? मुझे तो बहुत शरम आ रही है, प्लीज़ ऐसी गंदी बात मत कऱो !

मैंने कहा- निर्मला तूने कभी अपनी मम्मी और डैडी की चुदाई देखी है?

दोस्तो, मैं उसकी शरम को हटाना चाहता था और उसको पूरी तरह से उकसा रहा था और मैं उसका हाथ अपने लंड पर रख कर धीरे धीरे से सहलाने लगा था।

तो वो बोली- नहीं !

इसलिए तो तुम को मालूम नहीं है कि चुदाई करते समय किस किस तरह की बातें होती हैं !

उसने मुझसे पूछा- भैया, आप भी भाभी के साथ ऐसे ही बातें करते हो?

मैंने कहा- हाँ !इससे भी ज्यादा गंदी !

तो वो आश्चर्य-चकित होते हुए बोली- आपको शरम नहीं आती?

मैंने कहा- पहले बहुत शरम आती थी, अब नहीं ! क्योंकि हम लोगों आदत पड़ गई है और हमको सिखाने वाली कौन है, तुमको पता है ? नहीं ? अगर बता दिया तो तुम पागल हो जाओगी सुन कर ! और शायद तुम मेरा विश्वास भी नहीं करोगी !

तो वो बोली- कौन है?

मैंने कहा- पहले तुम अन्दाज़ा करो ! बाद में मैं तुम्हें बताऊंगा !

वो बोली- तुमको बताना हो तो बताओ, नहीं तो भाड़ में जाओ !

मैंने कहा- बताता हूँ- और बोल पड़ा- तुम्हारी मम्मी ! मेरा मतलब- बुआ !

तो बोली- मेरी मम्मी ?

मैंने कहा- हाँ ! तेरी मम्मी !

मैं नहीं मानती !

मैंने कहा- मत मानो ! लेकिन मैंने तुम्हें अगर सबूत दिया तो तुम मुझे क्या दोगी?

वो बोली- पहले सबूत, बाद में मैं तुझे क्या दूँगी, तुम को बाद में पता चल जाएगा !

तो मैंने कहा- तुम को एक काम करना पड़ेगा !

क्या, कैसा काम ? मैं कोई काम नहीं करूंगी !

मैंने कहा- ऐसा वैसा कुछ नहीं बस मेरी आइडिया मानो और मैं जो कहूँ, तुम वैसा करो !

दोस्तो मैं बातें करते हुए उसकी चूत में अंगूठाअ और उंगली डाल कर दाने को मसलने लगा था, वो बातें करते हुए तड़प रही थी और मेरे को बोल रही थी कि छोड़ दो भैया प्लीज़ ! आप ऐसा मत करो ! मुझे बहुत दर्द हो रहा है ! आप बहुत खराब हैं !

मैंने उसे कहा- आज रात को जब सब लोग सो जाए तो तुम बिना आवाज़ किए ही मम्मी के कमरे के दरवाजे पर अपना कान लगा कर उनकी बातें सुनना ! तभी तुम को पता चलेगा कि कौन सच्चा है और कौन झूठा है !

तो बोली- ठीक है ! मैं आज ही पता कर लूंगी !

मैं चूत में उंगली डाल कर चूत के दाने को मसलने लगा और अब वो मेरे काबू में आने लगी और मीठी मीठी सिसकारी लेने लगी। उसकी चूत से पानी भी बहने लगा था। मैंने अब नीचे आकर उसकी चूत को हाथों से खोला और चूत के पास मुँह रख कर चूत को सूंघने लगा।

वाह ! क्या मीठी सुगंध थी ! ऐसी सुगंध तो मोंट ब्लांक के पर्फ्यूम में भी नहीं आती होगी ! मैं तो पूरा मदहोश हो गया और स्वर्गलोक के कमल के फूल की कल्पना करने लगा।

तभी निर्मला बोली- भैया, वहाँ मुँह लगाकर क्या कर रहे हो ?

मैंने कोई ध्यान नहीं दिया और मैं चूत सूंघने में मस्त था। तो निर्मला मेरे बाल खींच कर बोली- भैया, क्या कर रहे हो?

मैंने सिर उठा कर कहा- कुछ नहीं डार्लिंग ! तुम्हारी चूत ने तो मुझे पागल कर दिया है ! यह कह कर मैं उसकी चूची चूसने लगा और उंगली को चूत में डाल कर आगे पीछे करने लगा। तभी वो बोली- भैया, मुझे कुछ हो रहा है ! प्लीज़ आप मुझे छोड़ दो !

मैंने कहा- क्या हो रहा है?

तो बोली- मेरी चूत से कुछ आने वाला है !

मैंने कहा- प्लीज़ रुको ! और मैं मुँह को नीचे ले कर चूत में जीभ डाल कर चूत को चाटने लगा औऱ एक हाथ से उसकी चूची को मसलने लगा और वो पूरी पागलों की तरह होकर बोली- प्लीज़ भैया ! जल्दी कऱो ! नहीं तो मैं मर जाऊँगी !

मैं जल्दी जल्दी उसकी चूत को चाटने लगा और हाथ से उसकी चूची मसलने लगा। करीब पाँच मिनट में ही वो ज़ोऱ से आऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽ कर के झड़ गई और सारा चूतरस (प्रेमरस) मेरे मुँह में छोड़ दिया। मैंने पूरा माल चाट चाट कर साफ किया।

तभी मैंने उससे पूछा- मज़ा आया या नहीं ?

तो शरमाते हुए बोली- भैया प्लीज़ !

मैंने कहा- अब आगे का खेल खेलें या नहीं?

तो बोली- इससे आगे का खेल कौन सा है?

मैंने उसे सीधे ही कहा- अब मैं तुझे चोदूँगा !

तो बोली- कैसे?

मैंने लंड हाथ में लेकर हिलाते हुए उसकी चूत पर हाथ रखकर कहा- मैं इसे तुम्हारी चूत में डाल कर ज़ोऱ से चोदूँगा !

तो बोली- भैया, प्लीज़ आप अभी मुझे छोड़ दो ! आप कल कर लेना !

मैंने कहा- क्यों?

तो बोली- मुझे कहीं जाना है ! और मैं पहले ही लेट हो गई हूँ ! प्लीज़ मुझे जाने दें, मैं आपसे वादा करती हूँ !

तो दोस्तो, मैंने भी कोई जबरदस्ती न करते हुए उसके चूचुक को मुँह में लेकर हल्का सा काट कर कहा- मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ, मैं तेरे साथ कोई ज़बरदस्ती नहीं करूंगा ! तुम जब तुम्हारी मर्जी हो, मुझे बुला लेना, मैं हाज़िर हो जाऊंगा !

मैंने अपने कपड़े पहने और बाहर आकर हाल में बैठ कर टीवी. चला कर सोफ़ा पर बैठ गया। तभी वो पाँच मिनट के बाद निर्मला बाहर आई, मुझसे बोली- तुम आए क्यों थे?

मैं भी भूल गया था कि मेरे पास कैश का बैग था। मैंने कहा- तुम्हारे कमरे में मेरा कैश का बैग पड़ा है, मैं कैश देने आया था। लेकिन बुआ घर में नहीं थी तो मैंने सोचा कि तुम को दे दूँ। तो बोली- बैग कहाँ है?

मैंने कहा- तुम्हारे कमरे में कुर्सी के पास रखा है, तुम मुझे बैग ला कर दे दो।

निर्मला बैग लेने कमरे में गई। मैं भी पीछे गया और निर्मला को पकड़ कर घुमाया और उसके वक्ष मसलते हुए चूमने लगा। वो भी अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल कर घुमाने लगी। करीब़ पाँच मिनट के बाद हम अलग हुए और मैंने बैग निर्मला के हाथ में देकर कहा- यह बैग अपने पापा को दे देना और सेल पर बात करा देना ! और मैंने अपना सेल नम्बर उसे दे दिया।

और मैंने भी उसका सेल नम्बर ले लिया। उसको कहा- यह बात तुम किसी से मत करना और मैं भी किसी से नहीं कहूँगा, क्योंकि इसमें तुम्हारी और मेरे खानदान का इज़्ज़्त का सवाल है।

निर्मला बोली- मैं नहीं कहूँगी !

मैंने कहा- तुम्हारी फ्रेंड्स को भी नहीं बताना !

वो बोली- नहीं बताऊंगी भैया ! आप मुझे इतना भी बेवकूफ़ मत समझो !

मैंने कहा- ठीक है ! तुम मुझे फोन करोगी या मैं तुझे फोन करूँ?

तो बोली- मैं तुझे फोन करूंगी !

मैंने कहा- प्रॉमिस?

तो बोली- प्रॉमिस !

मैंने कहा- बाय !

और मैं घर से निकल गया और सीधा घर आकर सो गया। कब रात के नौ बजे, मुझे पता ही नहीं चला। मम्मी ने मुझे जगाया। मैं खाना खाकर घूमने चला गया, रात को ग्यारह बजे घर आकर सो गया।

अगले दिन मैं फोन का इन्तज़ाऱ करने लगा।

उसने फोन नहीं किया। करीब़ दो बजे तक इंतज़ार करने के बाद मैंने उसके सेल पर फोन किया पर उसने मेरा फोन नहीं उठाया और रिजेक्ट कर दिया। करीब़ 5-6 बार कोशिश की लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और फोन को स्विच-ऑफ़ कर दिया।

मैंने कपड़े बदले और उसके घर चला गया। घण्टी बजाई तो उसने दरवाज़ा खोला और बोली- तुम इस समय यहा क्यों आए हो?

मैंने जवाब दिया- तुम अपना फोन क्यों नहीं उठा रही हो? ओफ करके रखे हो ! इसलिए मैं सीधा यहाँ आया हूँ !

और मैंने अंदर आकर दरवाज़ा बंद किया और पूछा- मम्मी है?

तो बोली- वो अभी बाहर गई हैं !

मैंने पूछा- कब आएँगी?

तो बोली- आने में देऱी होगी !

फिर मैंने कहा- भाभी तो वो मायके गई हुई है !

मैंने चैन की सांस लेते हुए कहा- भगवान का लाख-लाख शुकर है।

मैंने उसको अपने बाहों में लिया और उस किस किया तो वो मुझसे छुड़ाते हुए बोली- भैया, मुझे छोड़ो ! प्लीज़ भैया !

मैंने कहा- निर्मला, क्यों मुझे इतना परेशान करती हो?

तो बोली- भैया परेशान तो आप कर रहे हैं !

फिर मैं किस करने लगा और एक हाथ चूची के ऊपर रख कर दबाने लगा। वो छटपटाने लगी और बोली- भैया प्लीज़ ! आप हाथ वहाँ से हटाओ !

मैंने कहा- क्या?

तो वो मेरा हाथ जो चूची के ऊपर था, हटाते हुए बोली- भैया दर्द करता है ! प्लीज़ आप हाथ मत रखो !

मैंने कहा- ओके ! और मैं उसका नीचे का होंठ को चूसते हुए दोनों हाथ उसकी पीठ पर फिरा रहा था और धीरे धीरे कमीज़ की ज़िप नीचे करने लगा।

मैं अब एक हाथ पीछे अंदर डाल कर उसकी नंगी पीठ पर फिराने लगा। जैसे ही मैंने उसकी नँगी पीठ को छुआ तो मुझे और उसे यानि दोनों को ऐसा करेंट लगा कि मैं व्यक्त नहीं कर सकता और वो एक दम घबराकर मुझे बोली- भैया, आप क्या कर रहे हैं !

मैंने कोई जवाब नहीं दिया और पीठ पर हाथ फिराता रहा। फ़िर एक ही झटके में उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। अब मैं उसे चूम रहा था और दोनों हाथों को उसकी नंगी पीठ पर फिरा रहा था।

और फ़िर उसको एक ही झटके में बाहों में उठा लिया और बेडरूम में ले जाकर बेड पे लिटा दिया। मैंने जल्दी से अपने कपड़े उतारे, सिर्फ चड्डी रह गई तो इतने में वो खड़ी हुई और बाहर जाने लगी। मैंने उसका हाथ झट से पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचा।

मैंने उससे कहा- कहां जा रही हो ?

वो बोली- भैया, आप क्या कर रहे हैं !

मैंने कहा- डार्लिंग मैं तो कुछ भी नहीं कर रहा हूँ, मैं तो कल की तरह तेरी सुंदरता देखना चाहता हूँ ! और तुझे प्यार करना चाहता हूँ !

तो बोली- भैया, प्लीज़, आप मुझे हाथ मत लगाओ !

मैंने उसके पास जाकर कहा- क्यों? तुझे अच्छा नहीं लगता?

वो बोली- नहीं भैया !

मैंने कहा- ठीक है ! मैं तुझे हाथ नहीं लगाऊँगा, तुम प्लीज़ एक बार मुझे अपनी सुंदरता दिखा दो !

वो बोली- प्लीज़, नहीं भैया !

मैंने कहा- कल भी तो मैंने सब देखा था !

तो बोली- मैं एक शर्त पर ही दिखाऊँगी !

मैंने कहा- ओके !

वो बोली- तुम मुझे दूर से ही देखोगे और मुझे हाथ भी नहीं लगाओगे !

मैंने कहा- ठीक है ! पर तुम भाग गई तो ?

निर्मला बोली- मैं नहीं भागूंगी !

मैंने दरवाज़े के पास जाकर कहा- अब तो तुम खुश हो?

वो बोली- ठीक है !

और वो मुझे देखने लगी और अपने कपड़े खोलने लगी, पूरे कपड़े उतारे लेकिन पेंटी नहीं उतारी और मुझे कहा- भैया लो मैंने पूरे कपड़े उतार दिए, अब आप भी कपड़े पहन कर मुझे जाने दीजिए !

मैंने कहा- नहीं ! तुमने पूरे कपड़े नहीं उतारे !

और मैं उसके पास गया, पेंटी पर हाथ लगाया और बोला- यह कौन उतारेगा ?

तो बोली- भैया प्लीज़ ! आपने क़हा था कि मेरे पास नहीं आओगे !

तो मैंने क़हा- मैं तेरे पास अपनी मर्ज़ी से नहीं आया, तुमने पेंटी नहीं उतारी तो मैंने सोचा कि मैं ही उतार देता हूँ !

तो बोली- छोड़ो मुझे और जाने दो !

मैंने कहा- रानी, अभी तो शुरुआत है !

मैंने उसको बाहों में उठाया और बेड पर लिटा दिया। और एक चूची मुँह लेकर चूसने लगा और एक हाथ से उसकी पेंटी उतारने लगा।

पेंटी को घुटनों तक ले आया और हाथ को उसकी चूत पर रखकर बोला- कितनी प्यारी चूत है ! ऐसी चूत तो मेरी पत्नी क़ी भी नहीं है।

अब मैं उसके मुँह को पकड़ कर चूमने लगा और उसका मुँह खोलकर जीभ अंदर डाल कर घुमाने लगा। एक हाथ उसकी चूत पर ही फिरा रहा था। अब चूत से भी पानी आने लगा था और मेरे हाथ गीले हो गए। मैंने गीला हाथ उसे दिखाते हुए कहा- निर्मला, देखा अब तेरी चूत भी साथ दे रही रही है !

निर्मला बोली- भैया मुझे जाने दो ! मैं यह सब आपके साथ नहीं कर सकती !

मैंने उसको कहा- डार्लिंग, मैं नहीं करूंगा ! और एक हाथ से उसकी चूची पर रख कर मसलने लगा और उसकी चूत में उंगली को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा। करीब पाँच से दस मिनट के बाद वो और गरम हो गई और सिसकारी लेते हुए बोली- भैया, प्लीज़ मुझे छोड़ दो !

मैंने कहा- अभी छोड़ देता हूँ !

और मैंने मुँह को उसकी चूत पर रखा और उसकी चूत चाटने लगा, पेंटी को निकाल कर फेंक दिया।

जैसे ही मैंने उसकी चूत पर मुँह रखा तो उसको करेंट लगा और ज़ोऱ से चिल्लाई- हाय भैया ! आप क्या कर रहे हो ! प्लीज़ ऐसा मत करो ! मुझे कुछ हो रहा है !

और वो सिसकारी लेने लगी उउउउउउउउउउउउईईईईईईईईईईईईईईईईीममम्म्म्म्म्म्म्ममा भ्हहहहहया प्लीज़ मत क्रऊऊओ !

मैंने भी जीभ चूत में डालकर चूत को ज़ोऱ ज़ोऱ से चोदने लगा और दोनों हाथों से उसकी च़ूंची की घुंडी को अंगूठे और उंगली में लेकर ज़ोऱ ज़ोऱ से मसलने लगा।

निर्मला मेरे हाथों को पकड़ कर बोली- प्लीज़, ज़ोऱ से मत करो ! ज़ोऱ से मत करो !

मैंने उसे पूछा- क्या नहीं करूँ ज़ोऱ से?

तो बोली- भैया, प्लीज़ आप मत करो !

मैंने उसे कहा- क्या नहीं करूँ?

और मैं फ़िर ज़ोऱ ज़ोऱ से करने लगा, वो तड़पने लगी और बोली- भैया प्लीज़ !

वो ज़ोऱ से सिसकारी लेते हुए बोली- भैया, प्लीज़ जल्दी करो ! नहीं तो मैं पागल हो जाऊँगी !

मैंने और स्पीड बढ़ा दी और जोर ज़ोऱ से करने लगा और वो लंबी सांस लेते हुए चिल्लाई- भय ईईईईईममम्म्म्म्म्म्म्म्मीईईईईईईए और मेरे मुँह पर झड़ गई।

मैंने उसका पूरा चूत रस पिया और चाट कर साफ किया, थोड़ा सा रस मुँह में रख कर उसके मुँह के पास आया और उसका मुँह खोल कर मैंने उसके मुँह में डाल दिया और बोला- लो डार्लिंग ! तुम भी अपना रस टेस्ट करो और बताओ कैसा है !

वो मुझे घूरते हुए बोली- भैया, आप कितने गंदे हो और बेशरम हो ! अब मुझे जाने दो !

मैंने कहा- मैंने तेरे लिए इतना किया, तुम मेरे लिए कुछ भी नहीं करोगी?

बोली- अब मैं क्या करूँ?

मैंने अपनी अंडरवीयर उतारी और 8 इंच का लंड उसके मुँह के पास ले जाकर बोला- लो इसे भी चूसो ना !

वो बोली- नहीं भैया ! मैं नहीं करूंगी !

मैं अपना लंड हाथ में पकड़ कर उसके होठों को छुआने लगा और जैसे ही वो कुछ बोलने लगी मैंने झट से उसका मुँह पकड़ कर लंड अंदर डाला और उसको बोला- प्लीज़ एक बार इसको चूसो !

और मैं निर्मला के बाल को पकड़ कर धक्का मारने लगा और मैं भी खुद आगे पीछे होने लगा। मैंने उसकी मुँह चुदाई चालू कर दी। करीब दस मिनट के बाद मैंने सारा लंडरस उसके मुँह में डाल दिया और उसके पास लेट गया।

करीब पाँच मिनट के बाद उसका एक हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर रख मैं खुद उसका हाथ पकड़ कर आगे पीछे करने लगा और उसकी चूत को मसलने और उंगली से चोदने लगा।

तो उसने कहा- भैया प्लीज़ मुझे जाने दो।

मैंने कहा- निर्मला, असली काम अब चालू होगा !

तो वो बोली- क्या?

हाँ, मैं तुझे अब चोदूँगा !

उसने कहा- नहीं आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते !

मैंने कहा- निर्मला ऐसा हर लड़की और लड़का चोदते हैं और चुदवाते हैं जैसे कि तुम्हारी मम्मी पापा से चुदवाती है, तुम्हारी भाभी भैया से चुदवाती है, मेरी पत्नी मेरे से चुदवाती है, फिर तुम क्यों मना कर रही हो !

उसका हाथ मेरे लंड पर रखते ही मेरा लंड टाइट होने लगा था और वो भी गरम हो गई इन सब बातों से, और बोली- भैया मैंने पहले कभी भी नहीं किया है !

(दोस्तो, मैं उसकी शरम मिटाना चाहता था और मैंने कल की तरह उस टॉपिक छेड़ दिया)

मैंने उससे पूछा- कल तो तुमने इतना नाटक नहीं किया, आज अचानक इतना नाटक क्यों ?

वो बोली- भैया,म कल जो हुआ वो एक हादसे की तरह था !

मैंने कहा- ठीक है !

मैंने उससे पूछा- कल तुमने अपनी मम्मी-डैडी की चुदाई देखी या नहीं?

तो बोली- भैया, नहीं !

मैंने कहा- क्यों ?

बोली- मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ !

मैंने उसको कहा- मैंने कब कहा कि तुम ऐसी लड़की हो ! मैं तो तुझे बता रहा था कि तुम सिर्फ एक बार देखो और तुमको सीखने को भी मिलेगा ! खैर कल नहीं देखी तो तुम आज देखना और मुझे बताना कि कैसी है ! ठीक है ? और मैंने चूत में उंगली आगे पीछे करना ज़ाऱी रखा और वो मेरे लंड को हिलाने लगी।

मैं अब उसके ऊपर आया और उसकी टाँगों को थोड़ा अलग किया और उसकी गीली चूत पर लंड को और मुँह पर मुँह को रख कर दोनों हाथों को उसकी गांड के नीचे रख कर एक ज़ोऱ का धक्का मारा, उसकी चीख मेरे मुँह में ही रह गई और लंड एक इन्च अंदर चला गया। मैं दोनों हाथों को नीचे से निकाल कर उसकी दोनों चूची के चूचुक मसलने लगा, साथ में चुम्बन भी कर रहा था। लंड अंदर रखा और धीरे धीरे उसको चोदने लगा। थोड़ी देर के बाद मैंने फिर एक ज़ोऱ का झटका मारा और लंड 3 इंच अंदर घुस गया और वो मेरी पीठ पर मारने लगी क्योंकि उसकी चीख मेरे मुँह में ही रह गई और उसकी झिल्ली भी फट गई। वो एक दम कुंवारी थी, खून निकलने लगा और वो तड़पने लगी, मेरे बालों को खींचने लगी। मैंने मुँह को हटाया और बोला- क्या हुआ?

वो बोली- भैया ! मुझे बहुत दर्द हो रहा है !

मैंने कहा- निर्मला, मुझे भैया मत कहो और मेरे नाम से ही पुकारो ! ऐसा दर्द पहली बार करने से होता है, तुम घबराओ मत, मैं हूँ ना !

और मैंने लंड बाहर निकाला और उसके मुँह पर हाथ रखा और एक हाथ से लंड को पकड़ कर उसकी चूत पर रख और ज़ोऱ का झटका मारा, इसके साथ ही मेरा लंड 6 इंच उसकी चूत में चला गया।

मैंने उसके मुँह से हाथ हटाया और चूची मसलने लगा- निर्मला, तेरी चूत तो कमाल की है !

वो बोली- भैया, प्लीज़ आप बाहर निकालो, मुझे बहुत जलन हो रही है और दर्द भी बहुत हो रहा है !

मैंने कहा- क्या निकालूँ रानी ?

भैया, आप इतने गंदे हो, इधर मैं मरी जा ऱही हूँ और आप मज़ाक के मूड में हो !

मैंने कहा- निर्मला, प्लीज़ एक बार कहो कि क्या निकालूँ!

वो बोली- प्लीज़ भैया ! मैं नहीं कहूँगी, आप बाहर निकालो !

मैंने कहा- ठीक है, जब तक तुम नहीं कहोगी, मैं बाहर नहीं निकालूँगा !

और इसके साथ ही उसको धीरे धीरे चोदने लगा और उससे बोला- तुम कितनी अच्छी हो, तुम्हारे बूब्स कितने प्यारे हैं, तुम्हारी चूत का कोई जवाब नहीं !

इतना कहने के बाद मैं उसकी चूची चूसने लगा साथ में धीरे धीरे चोदने लगा। थोड़ी देर के बाद उसको मज़ा आने लगा तो बोली- भैया प्लीज़ आप और अंदर मत डालना ! नहीं तो मैं मर जाऊँगी !

मैंने कहा- क्या अंदर नहीं डालूँ?

और मैंने लंड को बाहर निकाला और एक झटका मारा, मेरा फिर 6 इंच तक अंदर गया। निर्मला सिसकारी लेने लगी- ऊऊऊवीई ईईईईईई ईम्म्म्म्म्म्म् म्म्म्मा आआआआ !मार डाला इस पागल ने ! मैंने कहा था कि अंदर मत डालो ! फिर डाल दिया !

मैंने कहा- क्या डाल दिया?

तो बोली- भैया, मैं सिर्फ एक बार ही कहूँगी !

मैंने कहा- ठीक है, बोलो !

इसके साथ ही मैं उसको धीरे धीरे चोदने लगा और वो भी पूरी गरम हो गई और बोली- भैया, आप भाभी के साथ भी ऐसे ही करते हैं?

मैंने कहा- नहीं !

तो मेरे साथ मे ऐसा क्यों ?

मैंने कहा- मेरी बीवी तो मेरे साथ खुलकर पेश आती है, तुम्हारे जैसे नहीं है, जब मैं चोदने के मूड में नहीं होता हूँ तो मेरे पास आकर बोलती- जी आप मुझे चोदिए ना ! देखो मेरी चूत कितनी तड़प रही है तुम्हारे लंड के लिए !

भैया आप झूठ बोल रहे हैं !

मैंने कहा- तुम एक काम करो, मेरी पत्नी से कभी भी पूछ लेना !

भाभी को शरम नहीं आती?

मैंने कहा- तुमको कल ही बता दिया था- सब तेरी मम्मी ने ही सिखाया है, जब चुदाई करते हैं तो हम लोगों को गंदी भाषा बोलनी चाहिए, इससे प्रेम बढ़ता है और जीवन भर प्यार रहता है आपस में !

अब मैंने लंड को पूरा बाहर निकाला और फिर जोर का झटका मारा तो मेरा पूरा लंड चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया और मैं उसके ऊपर लेट गया।

निर्मला बोली- भैया प्लीज़ बाहर निकालो ! बाहर निकालो !

मैंने कहा- जब तक तुम नहीं कहोगी मैं तुझे ऐसे ही चोदता रहूँगा और रगड़ता रहूंगा !

तो बोली- भैया, मुझे शरम आती है !

मैंने कहा- अपनी आंख बंद करके एक बार कहो- प्लीज़ लंड को बाहर निकालो !

तो बोली- भैया मैं नहीं कह पाऊँगी !

मैंने कहा- एक बार बोल लोगी तो टईक रहेगा, नहीं तो जिंदगी भर नहीं बोल पाओगी ! और कुछ नहीं जल्दी से बोल दो !

तो बोली धीरे से- भैया प्लीज़ लंड को बाहर निकालो !

मैंने कहा- क्या निकालूँ?

तो बोली- लंड को !

मैंने लंड को बाहर निकाला और वापस ज़ोऱ से अंदर डाला और धीरे धीरे से चोदने लगा साथ में चूची को मुँह मे लेकर चूसने लगा।

मैंने उससे पूछा- कैसा लग रहा है?

तो बोली- प्लीज़ आप मुझे मत पूछो !

मैंने उससे कहा- निर्मला, तुमको आज मैंने एक बहन से पत्नी बना दिया है, तुम्हारी आज प्रमोशन हुई है, तुझे चोदने में बहुत मज़ा आ रहा है, ऐसा मज़ा तो मुझे कभी नहीं आया !

मैं ऐसे ही उसे गरम करके चोद रहा था और वो भी मेरा खुल्लम-खुल्ला साथ देने लगी थी।

दोस्तो मुझे इसको चोदने में इतना मज़ा आया कि आपको नहीं बात सकता ! आप समझ लीजिए कि मुझे जन्नत मिल गई थी !

मैं उसकी चूत से धीरे धीरे लंड बाहर निकालता और अंदर चूत में डाल कर चोद रहा था, बीच बीच में ज़ोऱ से शॉट भी लगाता था और वो हर शॉट के साथ वो सिहर उठती और मुझे बोलती -भैया, मुझे कुछ हो रहा है !

मैंने उसकी चूची को रगड़ते हुए पूछा- क्या हो रहा है रानी ?

तो बोली- मैं नहीं बता सकती !

मैं अब उसे ज़ोऱ ज़ोऱ से चोदने लगा और दोनों हाथों से उसकी चूची को मसलते हुए बोला- ले मेरी रानी, मेरा लंड ले ! और ले ! अभी तेरी चूत को भी मज़ा आ रहा है ! तू मुझे नहीं बताएगी तो तेरी चूत बताएगी !

मेरे हर शॉट का जवाब उसकी ओओओओओओओःःःःःःआआआआईईईईईईई ! जल्दी ! प्लीज़ जल्दी करो! ओओओओओओओओओ आआआआआआआआआआ ! में था।

मैं उसे ऐसे ही चोदने लगा और पूरे कमरे में पच पच और उसकी आवाज़ें गूंज रही थी। मैंने निर्मला को करीब़ 10 मिनट और चोदा !

वो कितनी बार झड़ी, मुझे नहीं मालूम ! जब मैं झड़ने को हुआ तो मैंने पूछा- निर्मला, मैं अब झड़ने वाला हूं, कहाँ निकालूं मेरा प्रेम रस? तेरी चूत में या फिर तेरे मुँह में?

वो बोली- भैया चूत में मत डालना ! आप बाहर ही निकाल लो !

मैंने लंड को चूत से बाहर निकाला और उसके मुँह के पास लेकर उसको बोला- रानी मुँह खोलो !

वो ना करने लगी और अपने मुँह पर हाथ रख लिया। मैंने उसका हाथ हटाया और लंड को मुँह में डालकर मुँह चोदने लगा और कुछ ही देर में मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ी और मैंने उसे प्रेम-रस पिला दिया। जब मेरा लंड सिकुड़ गया तो मैंने बाहर निकाला। निर्मला के मुँह से लंड निकालते ही वो बेड पर निढाल हो गई और मैंने बाथरूम ज़ाकऱ शॉवर लिया और बाहर निकल अपने कपड़े पहनने लगा, साथ में निर्मला को आवाज़ लगाई- निर्मला, उठो !

तो वो उठ नहीं पा रही थी, मैंने उसको सहारा दिया और बाथरूम ले गया और उसको मूतने के लिए बोला। वो बैठ कर मूतने लगी और मुझसे बोली- भैया तुम बाहर बैठो !

मैंने कहा- अब मेरे से शरम कैसी ! अब तो हम पति-पत्नी की तरह हैं !


रक्षाबंधन या सुहागरात

मेरी दीदी का नाम नीतू है, वो मुझसे तीन साल बड़ी है, उनका रंग गोरा चिट्टा है और हाँ उनके होंटों के नीचे एक काला तिल है, जिसकी वजह से वो बहुत सेक्सी लगती है! उनकी शादी एक अनिवासी भारतीय लड़के से यानि कि मेरे जीजा जी से हो गई, जो कि दुबई में नौकरी करते हैं ! दीदी उन्हीं के साथ रहती है। वैसे तो वो दोनों बहुत खुश रहते हैं मगर शादी के दो साल गुजर जाने के बाद भी उनकी कोई औलाद न होने से दीदी उदास सी रहती है!

मेरा नाम राज है मैं भी एक अनिवासी भारतीय हूँ और कनाडा में एक कम्पनी में जॉब करता हूँ। यहाँ आने से पहले मेरे माँ-बाप का स्वर्गवास हो गया था इसलिए दीदी, जीजाजी के सिवा मेरा और कोई नहीं है!

एक दिन मैं अपने जीजा जी के साथ फ़ोन पर बात कर रहा था तो बातों ही बातों में मैंने जीजा जी को दीदी के साथ अपने पास घूमने आने का निमंत्रण दे दिया। तभी जीजाजी ने यह कह कर टाल दिया कि उनको अभी छुट्टी नहीं मिल सकती, उन पर कम्पनी के काम का बहुत भार है।

थोड़ा रुकने के बाद जीजा जी ने कहा- मैं कुछ दिनों के लिए तेरी दीदी को तेरे पास भेज देता हूँ, उसकी नौकरी भी छुट गई है, सारे दिन भर घर में बोर हो जाती है, वो पहले से काफी उदास सी रहने लगी है, कुछ दिन पहले तुझे ही याद कर रही थी, शायद वो तुझको देखना-मिलना चाहती है। वैसे भी राखी का त्यौहार नजदीक आ रहा है, दोनों भाई-बहन मिल भी लेना और उसको कहीं घुमा भी देना, शायद इसी बहाने उसका मन ही बहल जाए !

मैंने कहा- ठीक है जीजा जी ! जैसा आप कहें !

और कुछ दिन बाद वो दिन भी आ गया जब दीदी मेरे पास आने के लिए दुबई से रवाना हुई। मैं भी दीदी को लेने के लिए ठीक समय पर एयरपोर्ट पहुँच चुका था। कुछ समय बाद दीदी की फ्लाईट लैण्ड होने की घोषणा हुई। मैंने अपनी आँखें एग्जिट-गेट पर जमा दी।

कुछ समय बाद मैंने दीदी को लोगों के साथ बाहर आते देखा तो मैं दीदी को देखता ही रह गया। सच क्या लग रही थी दीदी ! मैंने कभी भी दीदी को इस रूप में नहीं देखा था। उन्होंने ऊँची ऐड़ी की सेंडल पहनी हुई थी और काले रंग की फेंसी साड़ी और हाफ कट वाला ब्लैक ब्लाउज़ पहना हुआ था। ब्लाउज़ का गला काफी खुला और बड़ा होने से उनके आधे नंगे स्तन ऊपर से साफ दिखाई दे रहे थे। उनके वक्ष के ऊपर एक काला तिल था जो अलग ही चमक रहा था जैसे दूध में मक्खी !

तभी दीदी की नज़र मुझ पर पड़ी तो मैंने हाथ हिला कर उनको अपने होने का इशारा किया और दीदी ने एक हल्की सी मुस्कान देकर मेरी ओर बढ़ी और मेरे नजदीक आकर मेरे गले लगने लगी। मैंने भी मोके का फ़ायदा उठाया और दीदी की नंगी गोरी चिकनी कमर को अपने दोनों हाथों से सहलाते हुए जकड़ लिया। वहाँ खड़े सारे लोग शायद यही सोच रहे होंगे कि हम पति पत्नी हैं। फिर मैंने दीदी का सामान उठाया और हम दोनों घर की ओर चल दिए !

घर पहुँच कर दीदी फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चली गई ( क्यूँकि गर्मी के दिन थे और मेरी दीदी को बहुत पसीना आता है और वो तो उस दिन पसीने से बहुत भीग चुकी थी) मैंने दीदी जी का सामान सेट कर दिया और थोड़ी देर बाद दीदी भी फ्रेश हो कर बाथरूम से बाहर आ गई !

जैसे ही मैंने उनको देखा तो मेरी आंखें फटी की फटी रह गई। दीदी सिर्फ पेटीकोट-ब्लाउज़ में ही बाथरूम से बाहर आ गई थी। काले पेटीकोट और ब्लाउज में उनका गोरा-गोरा अंग एकदम सोने की तरह चमक रहा था। दीदी को देख कर मेरे अंदर थोड़ी अजीब सी घबराहट होनी शुरु हो गई। मैं दीदी को न चाह कर भी देखना चाहता था ! मैं कभी दीदी के वक्ष के ऊपर विराजमान काले तिल को देखता तो कभी उनकी नंगी कमर को, तो कभी उनके नाड़े वाले नंगे हिस्से को !

तभी दीदी ने मेरे पास आकर मेरे सर में प्यार से हाथ फेर कर पूछा- किया हुआ भईया? कहाँ खो गए ?

मैं थोड़ा घबरा कर और शरमा कर बोला- कुछ नहीं दीदी ! बस मैं..... आप काले कपड़ों में बहुत सुंदर लगती हो !

दीदी समझ गई कि मैं क्यों ऐसे बोल रहा हूँ। दीदी शरमा कर बोली- भाई मैं क्या करूं, बहुत गर्मी है और साड़ी में बहुत घुटन हो रही थी, इसलिए मैंने साड़ी अलग निकाल दी!

मैं बोला- दीदी कोई बात नहीं, हम दोनों के सिवा और कोई भी नहीं है यहाँ पर ! और मैं बिल्कुल फ्रैंक लड़का हूँ, तुम निश्चिंत रहो, मैं तालिबानी जैसा भी नहीं हूँ कि जो अपनी इतनी सुन्दर दीदी को बुरके में पसंद करे !

दीदी हंस दी और बोली- भईया, तू तो बहुत शैतान हो गया है ! चल जल्दी से तू भी नहा धो ले ! आज राखी है राखी नहीं बंधवानी क्या !

फिर मैं भी बाथरूम मैं नहाने चले गया। बाथरूम में बहुत ही अच्छी खुशबू आ रही थी। आज से पहले कभी ऐसी खुशबू बाथरूम में नहीं थी ! मैं समझ गया कि यह खुशबू दीदी के बदन की है! आज मैं इस खुशबू में समां जाना चाहता था और मैंने पहली बार अपनी दीदी के बारे में कर उनके नाम की मुठ मार दी। इसका एक अलग ही आनंद आया और जब मैं बाथरूम से नहा धो कर बाहर आया तो दीदी बोली- क्या बात है, बड़ी देर लगा दी तूने?

मैं बोला- क्या करूँ दीदी जी ! आज मेरा तो बाथरूम से बाहर आने का मन ही नहीं कर रहा था !

दीदी बोली- क्यों ?

मैं चुप रहा और मैंने दीदी को एक स्माइल दी ! दीदी भी शायद मेरा इशारा समझ गई थी और वो शरमाकर बोली- लगता है अब जल्द से जल्द तेरे लिए एक लड़की तलाशनी पड़ेगी ! बोल मेरे राजा भइया, तुझको कैसी लड़की पसंद है, मैं अपने राजा भइया के लिए वैसी ही लड़की लाउंगी !

मैं दीदी से बोला- सच !

दीदी हँस कर बोली- मुच !

मैंने तुंरत ही दीदी का हाथ पकड़ा और उनको शीशे के आगे ले जा कर बोला- मुझे ऐसी लड़की चाहिए !

दीदी थोड़ी शरमा कर बोली- पागल ऐसी लड़की लायेगा तो सुहागरात के बदले रक्षा बंधन मनाना पड़ेगा तुझे !

और जोर जोर से हँसने लगी!

मैं दीदी के पीछे की तरफ खड़ा था और दीदी मेरे आगे थी। हम दोनों भाई बहन एक दूसरे को शीशे में देख कर बातें कर रहे थे !

मैं बोला- दीदी अगर आप जैसी सुंदर लड़की मुझे मिल जाए तो मैं उससे राखी भी बंधवाने के लिए तैयार हूँ !

दीदी बोली- ऐसा क्या है मुझमें जो तू अपनी दीदी का इतना दीवाना हुआ पड़ा है ! क्या देखा तूने मुझमें ?

मैं बोला- दीदी आप गुस्सा तो नहीं होंगी ना !

दीदी बोली- मैं आज तक अपने राजा भइया से गुस्सा हुई हूँ जो अब होंऊगी !

मैं बोला- दीदी ! मैं सच में तुम्हारा दीवाना हूँ !

जब से मैंने तुम्हें एयर पोर्ट पर देखा है, मैं तुम्हारा दीवाना हो गया हूँ। पता नहीं क्यों मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ, तुम्हें छूना चाहता हूँ, तुम्हें तुम्हारे नाज़ुक होटों के नीचे काले तिल का अहसास दिलाना चाहता हूँ !

और मैंने आव देखा न ताव ! और दीदी की गर्दन के नीचे प्यार से एक किस कर दिया। दीदी मुझे शीशे में देख रही थी और वो वैसे ही खड़े रह कर मेरे गाल पर प्यार से हाथ फेरने लगी ! मैंने भी दीदी को अपने दोनों हाथों से आगे से जकड़ लिया और दीदी ने अपनी दोनों आँखें बंद कर ली जिससे मेरा थोड़ा और साहस बढ़ा और दीदी के कान में मैंने हल्की सी आवाज में ' आई लव यू दीदी ' बोल दिया और बोला- अगर आप मेरी बहन न होती तो मैं आप को ज़रूर प्रपोज़ करता ! आप कितनी सुंदर हो ! मैंने आप सी सुंदर कोई लड़की नहीं देखी ! हम भाई बहन क्यों हैं ?

दीदी ने अभी तक अपनी आँखें बंद कर रखी थी क्योंकि मैं उनके पेट पर, नाभि पर हल्का-हल्का हाथ फेर रहा था। अचानक मैंने दीदी के पेटीकोट के नाड़े की तरफ हाथ बढ़ाया तो दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और गर्दन हिला कर मना करने लगी और बोली- भईया मैं तुम्हारी बहन हूँ !

मैंने बोला- मैं जानता हूँ ! आज मैं सारे रिश्तों को भुला देना चाहता हूँ, तुम मेरी हो और मैं आज अपनी बहन की बाँहों मैं समा जाना चाहता हूँ !

दीदी बोली- किसी को मालूम चल गया तो समाज में हमारी थू-थू हो जायेगी !

मैंने कहा- हमें समाज देखने थोड़े ना आ रहा है !

दीदी चुप हो गई और कुछ सोचने के बाद मेरे से लिपट गई और रोने लगी।

मैंने पूछा- दीदी क्या हुआ? क्यों रो रही हो ?

तो बोली- मैं बहुत प्यासी हूँ ! तेरे जीजाजी से मुझे वो खुशी नहीं मिली जो हर औरत को शादी के बाद अपने पति से मिलती है !

मैं बोला- दीदी साफ साफ बताओ ना ! मैं समझ नहीं पा रहा हूँ !

वो बोली- तेरे जीजा जी मर्द नहीं हैं !

यह सुनकर मुझे तो पसीना आ गयाऔर मैं अंदर ही अंदर सोचने लगा- यानि कि दीदी अभी कुँवारी हैं और उनकी सील भी नहीं टूटी !

मैंने दीदी के आँसू को अपनी जीभ से चाट कर साफ किया और बोला- दीदी ! तुम चिंता मत करो मैं हूँ ना ! तुम बस मुझको यह बताओ कि तुम मुझको पसंद करती हो?

दीदी बोली- जान से भी ज्यादा !

क्या तुम मुझे भाई की जगह अपना पति मानोगी? मैं तुम्हें हर वो खुशी दूंगा जो तुम चाहती हो !

दीदी ने फ़ौरन मेरे होटों पर किस कर दिया और बोली- आज से तुम ही मेरे पति हो ! मेरा तन-मन सब तुम्हारा है ! जो तुम बोलोगे, वो मैं करूंगी !

मैंने दीदी को बोला- आज मैं तुमसे शादी करूंगा !

यह सुन कर दीदी जल्दी से सिंदूर और अपना मंगल सूत्र ले कर मेरे पास आ गई। मैंने उनकी मांग भर कर मंगल सूत्र उनके गले में पहना दिया।

दीदी बोली- भइया ! मैं अपने कमरे में जा रही हूँ, तुम थोड़ी देर बाद कमरे के अंदर आ जाना ! मैं तुम्हारा इन्तजार करूंगी !

और जब मैं थोड़ी देर बाद दीदी के कमरे में गया तो दीदी सज-संवर के अपने शादी के जोड़े में घूँघट ओढ़े पलंग पर बैठी मेरा बेसबरी से इंतजार कर रही थी। मैं दीदी के पास गया और प्यार से उनका घूँघट उठाया और उनकी ठुडी को अपने हाथ से ऊपर उठाने के साथ ही उनके होटों का चुम्बन ले कर बोला- ओह दीदी ! आई लव यू ! मैंने आज तक तुम जैसी सेक्सी लड़की नहीं देखी !

और उनके होटों के नीचे वाले काले तिल को अपने दाँतों में बुरी तरह दबोच लिया और चूसने लगा। दीदी को दर्द हो रहा था मगर दीदी मुझ से भी ज्यादा प्यासी थी, उसे दर्द में भी मज़ा आ रहा था।

तभी मैंने दीदी के ब्लाउज़ को अपने दोनों हाथों से फाड़ दिया और उनके गोरे गोरे आम के जैसे बूब्स बाहर आ गये। मैं उनको चूसने लगा। थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरी पैन्ट की ज़िप खोल कर मेरे लंड को बाहर निकाला और अपने कोमल गोरे हाथों से उसे सहलाने लगी। कुछ देर बाद जब मेरा लंड लौड़ा बन गया तो उसको अपनी जीभ से चाटने, सहलाने लगी और होटों से रगड़ कर उसे खड़ा कर दिया !

हम दोनों भाई बहन नंगे थे, मैंने दीदी को बिस्तर में लिटा दिया और उनकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा।

दीदी ओह माय भईया डार्लिंग ! आई लव यू ! बोल रही थी।

मैंने अपनी दीदी को गीध की तरह नौचना शुरु कर दिया। कुछ देर बाद जब मैंने अपनी बहन की चूत में अपना लौड़ा डाला तो दीदी ने उई माँ ! बोल कर मुझको जोर से जकड़ लिया और मुझको फ्रेंच किस करने लगी और अपने दोनों हाथों को मेरे चूतड़ों पर रख कर भइया और जोर से ! और जोर से ! बोलने लगी।

कुछ देर बाद मैंने दीदी को डौगी स्टाइल में चोदना शुरू किया। दीदी के गद्देदार चूतड़ को देख मैं ललचा गया और उनके चूतड़ चाटने लगा। दीदी को मैंने सारी रात चोदा !

सुबह जब मैं जागा तो दीदी मेरे लंड को चूस रही थी, मुझको प्यासी आँखों से देख रही थी और मेरा लौड़ा खड़ा करके उसके ऊपर बैठ गई और फिर दुबारा से मैंने दीदी को चोदना शुरु कर दिया।

हम दोनों चार साल बीत जाने के बाद भी हमेशा एक दूसरे के साथ सेक्स में डूबे रहते हैं।

सच अपनी बहन के साथ कितना मजा आता है, मैं क्या बताऊँ !

अब हम दोनों भाई बहन एक पति पत्नी की तरहं जिन्दगी जी रहे हैं। मेरी दीदी से मेरी एक लड़की हुई है .....