Monday, June 2, 2014

मेरी सांवली दीदी

मेरा नाम निशु है और मेरी उमर १९ साल की है। मेरी दीदी मुझसे दो साल बड़ी है लेकिन उनका रंग काला है। पर फ़िगर के मामले में करीना कपूर है- ज़ीरो फ़िगर ! लेकिन उनके काले रंग के कारण कोई कभी उनकी तरफ़ देखता ही नहीं है। इसी कारण वे हमेशा उदास रहती और ज्यादातर घर में ही रहती हैं और पढ़ती रहती हैं।
मेरा रंग साफ़ है और शरीर भी गठीला है। मैं इन्ज़िनीयरिंग के दूसरे साल में हूँ। मेरे कॉलेज़ में कई लड़कियाँ पढ़ती हैं। मैंने कई लड़कियों से मित्रता की पेशकश की पर कोई भी घास नहीं डालती और मैं सेक्स का भूखा लड़का हूँ। मेरे घर में मैं, दीदी और और मम्मी-पापा हैं। पापा एक दवाई की कंपनी में एरिया मेनेजर हैं जो हमेशा टूर पर ही रहते हैं। मम्मी हमेशा घर और बाहर के कामों में ही लगी रहती हैं। दीदी मुझे अपना एक अच्छ दोस्त समझती हैं और हर छोटी बड़ी बात, समस्या के बारे में मुझसे बात करती हैं।
उनके रंग के कारण उनका कोई दोस्त नहीं है तो वो मुझे ही अपना बॉयफ़्रेंड समझती हैं। मैं उनको शुरू शुरू में तो दीदी के रूप में ही देखा लेकिन कुछ दिनों में मेरे अन्दर कुछ बदलाव आ गया था। मैं उनकी सेक्सी जीरो फिगर का दीवाना हो गया था इसलिए मैं उनके साथ रहने के लिए उनको अकेलेपन का अहसास नहीं होने देता था और उनके साथ साथ ही रहता था। उनको भी अच्छा लगता था इसलिए उनको जहाँ कहीं भी जाना होता तो मुझे साथ लेकर जाती हैं। दीदी मेरे साथ बाइक पर हमेशा चिपक कर बैठती हैं लेकिन मैं उनका इस तरह बैठने की अदा को समझा नहीं। उनके स्तन मेरी पीठ से हमेशा चिपके रहते थे और वो इस बात पर कभी ध्यान नहीं देती थी। इस लिए मैं भी कुछ नहीं कहता था या करता था।
दीदी काफ़ी समय से अध्यापिका की नौकरी के लिए कोशिश कर रही थी और किस्मत से उन्होंने प्रवेश-परीक्षा पास भी कर ली। जिस दिन उनको परिणाम मिला, वो बहुत खुश थी, उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। खुशी में उन्होंने मुझे अपने सीने से लगा लिया और उनके स्तन मेरे सीने में गड़ गए। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
थोड़ी देर के बाद मम्मी आईं तो दीदी ने उन्हें भी अपने सीने से लगा लिया तो मैंने इस बात को सामान्य हरकत समझा और भूल गया।
कुछ ही दिनों में उनका साक्षात्कार था, जिसके लिए उन्हें भोपाल जाना था। तो मम्मी ने मुझे उनके साथ जाने की जिम्मेदारी सौंप दी क्योंकि और कोई था ही नहीं जो उनके साथ जा सके। मैंने भी हाँ कर दी।
हमें कुल तीन दिन लगने थे। हम लोगों ने पूरी योजना बना कर अपने कपड़े वगैरह लेकर भोपाल के लिए रवाना हो गए। दीदी के साथ अकेले रहने का इससे अच्छा मौका और नहीं मिल सकता था इसलिए मेरी खुशी का कोई पारावार ना था।
हम लोग शाम के छः बजे भोपाल पहुँचे। वहाँ पहुँच कर हम कोई होटल ढूंढने लगे। करीब तीन घण्टे तक होटल खोज़ने पर भी किसी होटल में कमरा खाली नहीं मिला क्योंकि अध्यापकों की भर्ती की संख्या ज्यादा थी इसलिए बहुत अधिक लोग पहुँचे हुए थे साक्षात्कार के लिए।
अंत में हम दोनों बहुत थक चुके थे कि एक होटल में हमें एक ही कमरा मिला। मैंने दीदी को बताया तो वो कहने लगी कि यही ले लो, हम काम चला लेंगे।
मैं कमरा बुक करने लगा और मैंने दीदी को कमरे में जने को कहा क्योंकि दीदी बहुत ज्यादा थकी हुई थी। दीदी वेटर के साथ कमरे में चली गई और मैं होटल का रज़िस्टर भरने लगा।
सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जब मैं चलने लगा तो रिसेप्शन पर बैठे व्यक्ति ने कहा- मैंने रज़िस्टर देखा है कि आप दोनों भाई बहन हैं इसलिए बता रहा हूँ कि रात को साढ़े दस बजे के बाद टीवी के चैनल ५ मत चलाईएगा क्योंकि तब इस पर केवल व्यस्कों के देखने लायक कार्यक्रम चलाए जाते हैं और आपके साथ आपकी दीदी हैं !
तो मैंने कहा- ठीक है ! धन्यवाद ! मैं अपने कमरे में आ गया। वहाँ वेटर दरवाज़े पर मेरा इन्तज़ार कर रहा था। मैंने उसे टिप दी तो उसने मुस्कुराते हुए कहा- हैपी हनीमून सर ! कुछ चाहिएगा तो मुझे याद कर लीज़िएगा सर !
वेटर तो बोल कर चला गया, मैं समझ गया कि वेटर हमें पति पत्नी समझ रहा है। फ़िर मैं कमरे में आया तो दीदी पलंग पर लेटी हुई थी।
मैंने कहा- दीदी ! तुम बहुत थक गई हो ! थोड़ा फ़्रेश हो लो। फ़िर हम खाना खाएंगे।
दीदी बोली- तुम ठीक ही कहते हो !
और दीदी ने बैग खोल कर अपने कपड़े निकाले और बाथरूम में चली गई।
मेरे मन में वेटर की बात घूम रही थी और मैं दीदी के साथ अपने ही बारे में सोचने लगा। बाथरूम से दीदी के नहाने की आवाज़ आ रही थी। मैं कल्पना करने लगा कि काश मैं और दीदी साथ साथ नहाते !
मुझे लगता था कि वेटर की बात सच हो सकती है। मैं इस बारे में योजना बनाने लगा तो मुझे रिसेप्शन वाले की व्यस्क फ़िल्म वाली बात याद आई। तभी मैंने घड़ी में देखा तो सवा दस बजे थे। तो मैंने ५ नम्बर का चैनल लगाकर बैठ गया और रिमोट को तकिए के नीचे छुपा दिया, साथ में खाने का ऑर्ड्र भी दे दिया।
५ मिनट के बाद दीदी बाहर आई। उन्होंने सेक्सी फ़िगर पर सफ़ेद रंग की नाईटी पहनी थी। मैंने कभी भी उनको ऐसी नियत से नहीं देखा था। आज वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी। उन्होंने कहा- जाओ तुम भी नहा लो !
दीदी दर्पण में बाल बनाने लगी थी। उनका ध्यान टीवी पर नहीं था।
मैं तुरन्त बाथरूम में घुस गया। मैंने बाथरूम में देखा कि दीदी की पैन्टी और ब्रा वहाँ सूख रही थी और मैंने उन्हें बैग से कपड़े निकालते देखा था तो उन्होंने पैन्टी नहीं निकाली थी, सिर्फ़ ब्रा ही थी। तो मैं समझ गया कि दीदी ने पैन्टी नहीं पहनी है। मुझे लगा कि दीदी थकी हुई हैं इसलिए फ़्री होकर सोना चाहती हैं इसलिए पैन्टी नहीं पहनी।
फ़िर मैंने उनकी पैन्टी को सूंघा, उसमें से एक अजीब सी खुशबू आ रही थी। मैंने मस्तराम की किताबों में पढ़ा था इसीलिए यह सब कर रहा था। लेकिन मेरा ध्यान टीवी पर था। तभी मुझे ब्ल्यू फ़िल्म चालू होने की आवाज़ आई। मेरा ध्यान से दीदी की हरकतों पर था। मुझे कुछ देर तो टीवी की आवाज़ आई लेकिन थोड़ी देर बाद टीवी की आवाज़ बंद हो गई।
मैं समझ गया कि दीदी ब्ल्यू फ़िल्म देख रही हैं। उन्होंने रिमोट ढूंढ कर टीवी की आवाज़ बंद कर दी थी ताकि मैं ब्ल्यू फ़िल्म से आती कामुक आवाज़ें ना सुन लूँ।
बाथरूम में मैंने दीदी के नाम से मुठ मारी और उनकी चड्डी को पूरी तरह गीला कर दिया, फ़िर मैंने उसे धोया। मैं सिर्फ समय बिता रहा था ताकि दीदी अच्छे से गर्म हो जाये। करीब १५ मिनट के बाद मैं बाथरूम से बाहर निकला और कमरे में गया। मैंने देखा कि दीदी का हाथ दीदी की चूत में है उनकी नाईटी उठी हुई है। मुझे देखते ही वो घबरा गयी और तुंरत खड़ी हो गयी। जल्दी में वो चैनल भी बदल नहीं पाई। मैंने टीवी की तरफ देखा तो लड़का लड़की को पलंग पर लेटकर उसकी चूत चाट रहा था।
दीदी की ऑंखें लाल हो गई थी और शर्म से सर झुका हुआ था। शर्म तो मुझे भी आ रही थी, फिर मैंने चैनेल बदल कर दिया। दीदी चुपचाप दर्पण पर अपने बाल बनाने लगी और मैं भी कपड़े पहनने लगा। फिर मैं कोई पत्रिका पढ़ने का नाटक करने लगा। कमरे में शांति का माहौल था, न उनको और न मुझको बोलने की हिम्मत हो रही थी।
और फिर डोर-बेल बजने की आवाज़ आई मैं उठा और दरवाज़ा खोला तो देखा कि वेटर खाना ले कर आया है। उसने खाना मेज़ पर रखा, फिर खाना लगाकर कहा,“ सर मैं इसे कल सुबह ले जाऊंगा।”
मैंने उसे टिप दी और वो हंसते हुए चला गया।
मैं और दीदी खाना खाने लगे। दीदी की सहेली नहीं होने के कारण उन्होंने शायद कभी भी ब्लू फिल्म नहीं देखी थी, उनकी यह पहली बार थी इसीलिए उनका शरीर गर्म हो गया था और दीदी को सेक्स के बारे में भी खुछ खास पता नहीं था। खाना खाने के बाद हम दोनों ने पेपर-नैपकिन से हाथ पोंछा लेकिन पेपर नैपकिन के नीचे कंडोम के ४-५ पैकेट थे जो कि देखने में सौंफ के पाउच लग रहे थे। दीदी ने उसे सौंफ का पाउच समझ कर फाड़ा लेकिन उसके अंदर से कंडोम निकला।
दीदी ने कभी कंडोम देखा नहीं था इसीलिए मेरी तरफ देख कर पूछा और टीवी वाली घटना के बाद पहली बार मुझसे बात की- भाई ! यह क्या है?
“दीदी ये कंडोम है !”
तो दीदी ने टीवी पर कंडोम के बारे में सुना था तो समझ गई, फिर शर्म से चुप हो गई, फिर पूछा,”वेटर हमारे खाने के साथ कंडोम क्यों लाया है?”
तो फिर मैंने दीदी को पूरी बात बताई तो हंसने लगी और बोली- तुझे पता था कि टीवी पर ब्लू फिल्म चलेगी तो तूने जानबूझ कर उसी चैनल पर टीवी चलाया था !
दीदी थोड़ी देर में मेरे साथ खुल गई और सेक्स की बातें करने लगी। मुझे समझ में आ गया था कि वो ब्लू फिल्म देखने के बाद सेक्स के लिए तड़प रही है। दीदी ने कहा- मैंने कभी भी ब्लू फिल्म नहीं देखी है !
तो मैंने तुरंत ही टीवी पर ब्लू फिल्म लगायी। उसमें एक लड़की को लड़का डौगी स्टाईल में चोद रहा था।
दीदी- ये सेक्स का कौन सा तरीका है?
तो मैंने कहा- दीदी इसे डौगी-सेक्स कहते हैं !
दीदी- तू बहुत जानता है रे ! कभी किसी के साथ सेक्स किया है क्या?
तो मैंने कहा- दीदी कोशिश बहुत की लेकिन कोई लड़की पटी ही नहीं !
तो मैंने हिम्मत करके कहा- दीदी तुम मेरे साथ सेक्स करोगी?
तो उसने मुझे बहुत ही बुरी तरह डांटा और कहा- तुझे अपनी दीदी से ऐसी बातें करते हुए शर्म नहीं आती !
फिर मैं चुप चाप सो गया लेकिन मेरी आँखों में नींद नहीं थी और न ही दीदी की आँखों में।
रात को १ बजे दीदी ने मुझ से पूछा- क्या तुझे सेक्स करना है?
तो मैंने कहा- हाँ दीदी !
वो बोली- मैं तो काली हूँ?
मैंने कहा- दीदी सेक्स का मजा काले या गोरे से नहीं, फिगर से आता है और तुम सेक्सी हो !
मेरी बातों से वो गर्माने लगी और फिर सेक्स के लिए तैयार हो गई। मैंने दीदी को पूरी नंगी कर दिया और उनकी बिना बालों की चूत को चाटने लगा। वो ब्लू फिल्म की एक्ट्रेस की तरह चिल्लाने लगी- आ अ अह ! उ ऊ ऊउउऊ !
मैं उनको झड़ने तक चूसता रहा, फिर उनकी कुंवारी चूत के नीचे तकिया लगाकर थोड़ा ऊपर किया, फिर अपना खड़ा लण्ड उनकी चूत में घुसाया। धीरे धीरे लण्ड अंदर जाने लगा, वो दर्द से चिल्लाने लगी। फिर थोड़ी देर के बाद शांत हो गई और सेक्स का पूरा मजा लेने लगी।
दीदी के साथ उस रात मैंने कई बार सेक्स किया और फिर मैं और दीदी तीन दिन तक होटल के कमरे में मियां बीवी की तरह ही रहे।
घर आकर भी हम मौका देख कर सेक्स करने लगे ……

बहन की ख्वाहिश

हमेशा की तरह माँ पापा के कमरे से जोर जोर से चिल्लाने की आवाजें आ रही थी… मेरे कमरे के दरवाजे पर दस्तक हुई, मैंने दरवाजा खोला तो मेरी छोटी बहन थी। हमारे घर में हम चार लोग थे माँ, पिताजी, मैं और मेरी छोटी बहन। मैं तब कॉलेज में पढ़ रहा था और मेरी छोटी बहन सोनिया बारहवीं में थी।
मैंने उसे पूछा- क्या हुआ?
तो उसकी आँखों में आँसू थे, और वो मुझसे लिपट गई, कहने लगी- भैया, आज भी माँ और पिताजी झगड़ रहे हैं, मुझे डर लग रहा है, मैं आपके कमरे में रुक सकती हूँ?
मैंने उसे कमरे के अंदर कर लिया। मेरी बहन सोनिया बहुत प्यारी है, गोरा रंग, दिखने में बेहद खूबसूरत, उसके वक्ष के उभार बहुत ज्यादा नहीं हैं।
वो आकर मेरे बिस्तर पर लेट गई, मैंने तकिया लिया और जमीं पर सोने ही वाला था कि सोनिया ने कहा- भैया, आप भी ऊपर सो जाओ, बचपन में तो हम साथ में ही सोते थे !
और तभी लाइट चली गई, मैंने मोमबत्ती जला दी। मैंने अपनी बहन को मोमबत्ती की रोशनी में देखा उसने सफ़ेद नाइटी पहनी थी और वो परी जैसी लग रही थी।
मैं बिस्तर पर लेट गया और सोनिया मेरी बगल में थी। मैंने उसे कहा- तुझे तो अब आदत हो जानी चाहिए माँ-पिताजी के झगड़े की ! तुम इस बात से डरा मत कर और वे लोग बिना लड़े एक दिन भी नहीं रह सकते। यह उनके प्यार करने का तरीका समझ ले।
वो मुस्कुराई और फिर उसने कहा- भैया लाइट नहीं है, बहुत गर्मी हो रही है, क्या मैं नाईटी उतार दूँ?
मैं कुछ समझ नहीं पाया कि क्या कहूँ, मैंने कहा- हाँ उतार दे अगर तुझे तकलीफ हो रही है तो !
“आप भी अपना शर्ट-पजामा निकाल दो, वर्ना आप पसीने से नहा जाओगे और बिस्तर गीला हो जायेगा।” उसने शरारत भरी मुस्कराहट के साथ कहा।
मैंने कहा- नहीं, मुझे कोई परेशानी नहीं है !
वो तपाक से बोली- ठीक है, फिर मैं भी नहीं निकालती, आपकी छोटी प्यारी बहन गर्मी से परेशान हो तो आपको क्या?
“ठीक है, निकालता हूँ मैं भी !” कह कर मैंने अपने कपड़े उतारे और फिर देखा तो वो मुझे मुस्कुराते हुई देख रही थी- अब मेरे कपड़े उतारो !
मैं भाई होने के नाते उसके कपड़े उतारने लगा, यह एक भाई बहन का प्यार ही था, एक भाई जो अपनी बहन को गर्मी से परेशान होते हुए नहीं देख सकता था, मगर में हैरान हुआ जब देखा उसने अंदर कुछ भी नहीं पहना था।
“सोनिया यह क्या? तुमने ब्रा और नीचे भी कुछ नहीं पहन रखा?”
“भैया, आपको तो पता ही है मुझे ब्रा की जरुरत नहीं और रात को नीचे कुछ पहन कर क्या फायदा है, और आप कौन सा मेरे साथ कुछ शरारत करने वाले हो। मैं आपको बहन हूँ, आपका मुझ पर पूरा हक है, अगर आपका जी करे तो आप मुझे प्यार भी कर सकते हो !”
वो मेरा अंडरवीयर उतारने लगी, मैंने उसे रोका तो बोली- भैया, चलो भी, मैंने कुछ नहीं पहना और आप पहन कर बैठे हो? उतार भी लो ! वैसे भी गर्मी बहुत हैम आपको तकलीफ होगी। और आपका शेर भी अंदर अकेला होगा उसे मेरी गुफ़ा देखने दो, मैंने भी आपका शेर कभी देखा नहीं है। अब छोटी प्यारी बहन से भला क्या शरमाना?”
मैं उसकी बातें सुन कर हतप्रभ रह गया कि यह आज कैसी कैसी बातें बोल रही है, पर मैंने उसे मदद की मेरा अंडरवीयर उतारने में…
फिर हम बिस्तर पर लेट गए आजू बाजु नंगे, उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने बदन पर रखा और बोली- भैया, आप सो गए क्या?
“नहीं तो, क्यों?”
उसने मेरे तरफ देखते हुए कहा- मुझे आपकी मदद चाहिए थी !
“कैसी मदद?” मैंने कहा।
मेरी प्यारी बहन मेरे ऊपर आ गई, मेरे ऊपर लेट कर मेरी आँखों में देख रही थी।
अब मेरे लंड को कौन बताये कि भाई बहन का रिश्ता कितना पवित्र होता है, वो खड़ा होने लगा था बेशरम की तरह !
उसने मेरे लंड को देखा, उसको हाथ में पकड़ा और अपने चूत को निशाना लगा कर मेरे ऊपर बैठ गई.. उसने कहा- आप मेरे बूब्स चूसो ताकि यह बड़े हो जाये और फ़िर मुझे चोदना !
मेरा दिमाग काम करना बंद कर रहा था, फिर भी मैंने जैसे तैसे कहा- तू मेरी बहन है, यह सब गलत हो रहा है, तू अभी अपने कमरे में जा !
“चलिए भी ! आप चाहते हो कि आपकी बहन की इज्जत कोई और लूटे? आप मेरे भाई हो और मैं अपनी इज्जत आपको दे रही हूँ ताकि आप इसकी रक्षा कर सकें, एक भाई जब बहन को चोदता है तो उन दोनों का रिश्ता और भी मजबूत होता है। मैं हमेशा से आप में अपना रक्षक देखती आई हूँ। अगर आप मुझे चोदोगे तो मुझे किसी गैर से नहीं चुदना पड़ेगा। आप दिमाग की नहीं, अपने लंड की सुनो, वो सिर्फ चूत देखता है, आपका लंड मेरी चूत में मजे करेगा। प्लीज़, बहनचोद बन जाओ !
मेरी छोटी बहन मुझे भाई का फ़र्ज़ सिखा रही थी, मोमबती के प्रकाश में उसका पसीने से भीगा हुआ बदन चमक रहा था और मेरा लंड उसकी चूत में अटका हुआ था।
मैं मुस्कुराया और उसे गले लगाते हुए कहा- मैं अपनी बहन की हर ख्वाहिश पूरी करूँगा, तूने आज मुझे मेरा फ़र्ज़ याद दिलाया है, बहन आज से तेरी इज्जत मेरी इज्जत है, मैं तुझे चोद कर तुझे किसी गैर के हाथों का खिलौना नहीं बनने दूंगा।
मैंने उसके एक चुचूक को मुँह में लिया और लंड को धक्का मारना शुरू किया, वो आहें भरने लगी।
सोनिया ने कहा- भैया और जोर से करो और मेरे बूब्स को काटो !
उसने मेरे बालों को पकड़ा, उसने अपने चूतड़ों को हिलाना शुरू किया जिससे मुझे उसे चोदने में मदद मिलने लगी।
अब उसने मुझे दूर धकेला और चूत को लंड से अलग किया। मैं पागल हो रहा था कि वो ऐसा क्यों कर रही है..
“भैया अब आप अपनी बहन का पेशाब पियोगे, आपके लिए स्पेशल !” कहते हुए उसने चूत मेरे मुँह पर लगाई।
मैं ‘छीः’ कहते हुए दूर हटा, तो उसने मेरा सर पकड़ा और कहा- भाई जब हमने सोच ही लिया है कि दो जिस्म एक जान हो जायें तो मेरा पेशाब क्या और आपका पेशाब क्या, आप मेरा पेशाब पी लीजिये, आपको पसंद आयेगा !
मैंने कहा- पर छोटी, मुझे घिन आ रही है। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।
“भैया भैया मेरे प्यारे भैया, पेशाब से कैसी घिन, याद है आपको दूध नहीं पसंद, फिर भी आप दूध पीते ही हो ना बॉडी बनाने के लिए, वैसे ही पेशाब पी लीजिये, मैं और नहीं रोक सकती जल्दी से मुँह लगाओ, फिर हमें चुदाई भी पूरी करनी है।”
मैं नीचे लेटा और छोटी मेरे मुँह में मूतने लगी। झूठ नहीं कहूँगा, बहुत अजीब सा स्वाद था, पर मुझे पसंद आया।
उसने मुझे गले लगाया- बहनचोद भाई हो आप, बहन की खुशी के लिए उसका पेशाब भी पी डाला ! आओ हम चुदाई पूरी करें। और याद रखो अपना पूरा माल मेरे अंदर डालना भैया, मैं आपके लिए ऐसा कर रही हूँ ताकि आप सिर्फ घर में रह कर मुझे चोदें और बाहर मुँह ना मारें। जिसकी बहन इतनी खूबसूरत हो, उसका भाई किसी और लड़की को चोदे तो अच्छा नहीं लगता !
मेरी आँखों में आँसू आ गए, मेरी बहन मुझे इतना प्यार करती है- सोनिया, आई लव यू बहना ! उसकी चूत में फिर से लंड डालते हुए मैंने कहा।
“भैया, आई आल्सो लव यू !” और मुझे आराम से लेटने को कह कर खुद ऊपर नीचे होने लगी, पूरी मेहनत वो कर रही थी, उसका पसीना मेरे बदन पर गिर रहा था, वो चिल्लाना चाहती थी पर घर के लोग ना जाग जायें इसलिए चुपचाप सब दर्द सहन करके चुद रही थी।
मैंने कहा- मैं आने वाला हूँ।
उसकी आँखों में चमक थी- भैया, आ जाओ, रास्ता साफ़ है !
पचक पचक की आवाज आनी शुरू हुई और उसका रस और मेरा रस एक हो गया, वो मुझ पर गिर गई, मैंने उसे लेटाया और उसकी चूत को चाटने लगा, उसने मेरे बालों में हाथ फेरना शुरू किया, मैं उसे चाट रहा था और वो सिसकारियां ले रही थी। थोड़ी देर में उसकी चूत मैंने चाट के पूरी साफ कर दी।
फिर उसने मेरे लंड को मुँह में लेकर पूरा साफ़ किया।
“भैया आपने मुझे आज सबसे बड़ा तोहफा दिया है !” ऐसा कह कर वो मेरे लंड को सहलाने लगी।
“पर छोटी, दुनिया क्या कहेगी, मैं तुम्हारा भाई हूँ और मुझे तुम प्यारी हो, मगर यह सब गलत है, मैं अपने आप को रोक नहीं पाया अपने लंड की बातों में आकर !”
“भैया, बुरा ना मानो, दिमाग और लंड की जंग में हमेशा लंड ही जीतता है, यह सृष्टि का नियम है, भाई के लिए बहन इसी लिए बनाई गई है ताकि बहन भाई की और भाई बहन की जरूरतें पूरी कर सके, अपनी बहन होते हुए दूसरों की बहन को चोदना पाप है। चूत तो हर एक की होती है फिर बहन की और दूसरी लड़की की चूत में क्या फर्क है?”
मेरी बहन जो कह रही थी, मुझे कुछ कुछ सही लग रहा था फिर भी मैं अज्ञानी उससे पूछ बैठा- फिर लोग शादी क्यों करते अगर बहन चोदना सही होता..?
“भैया आप भी ना बुद्धू हो, अरे हर एक को बहन नहीं होती उसके लिए पुराने ज़माने में लोगों ने शादी करना शुरू की, पहले किसको पता था कि बहन और भाई कैसे रहते थे। सभी भाई अपनी बहन को चोदते थे और सभी बहने अपने भाई का लण्ड लेती थी, पर इस जालिम समाज ने ऐसा होने नहीं दिया। आपका लंड इतना बड़ा और प्यारा है और वीर्य भी इतना मीठा है, अब आप ही बताओ, इस पर पहला हक़ आपकी बहन का ही होना चाहिए ना? अरे लीजिये आपका लंड खड़ा हो गया, डालिए फिर से इसे चूत में !”
मैंने उसकी चूत में लंड डाला और धक्के मारने लगा, मुझे अपनी बहन की शिक्षाप्रद बातें भाने लगी।

Wednesday, May 28, 2014

सोनी दीदी की कामाग्नि

मेरा नाम अंकित जैन है। मैं 24 वर्षीय हट्टा कट्टा नौजवान हूँ, इंदौर में रहता हूँ। मैंने इंजीनियरिंग की है। मेरा लौड़ा 8 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा और बिल्कुल काला है। मुझे चोदने की काफी इच्छा थी पर पूरी नहीं होती थी। इसलिए दिन में कभी कभार मैं मूठ मार लिया करता था।
एक बार मैं अपनी मामी की लड़की यानि मेरी दीदी के यहाँ मुंबई गया। मेरी दीदी के घर में तीन लोग थे। मेरी दीदी, जीजा जी और उनका तीन साल का एक लड़का। मेरी दीदी का नाम सोनी है। उसकी उम्र 28 साल थी फिगर 36-30-38 था। वह बहुत सेक्सी लगती है, जब चलती तो ऐसा लगता कि दिल पर छुरियाँ चला गई। उसकी गांड बहुत ही मस्त और मोटी है। उस पर उसका गोरा बदन और मोटे मोटे बोबे ! उसको देखते ही ऐसा लगता था कि बस कैसे भी इसे चोद डालूँ !
अब मैं असली बात पे आता हूँ। जीजा जी बहुत शराब पीते थे इसीलिए वो बहुत परेशान रहती थीं। एक दिन कुछ ऐसा हुआ जो शायद दीदी और मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। हुआ यूँ कि जीजा जी ऑफिस से आये और मुझसे कहा- आ आज शराब पियेंगे।
मैंने मना किया पर वो नहीं माने और मुझे उनके साथ बैठना पड़ा। उन्होंने एक शराब की बोतल निकाली और हम पीने लगे। हम लगभग पूरी बोतल पी गए। जीजा जी को बहुत नशा हो गया था। हमने खाना खाया और अपने अपने कमरे में सोने चले गए।
अचानक रात में मुझे कुछ आवाज़ सुनाई दी।
मैं उठा और दीदी के कमरे की खिड़की से देखने लगा कि कुछ हुआ तो नहीं है।
तभी मैंने देखा कि जीजा जी ने दीदी की साड़ी को ऊपर उठाया और उसकी पैंटी को उसके बदन से अलग कर दिया और अपना लंड पेल दिया उसकी बुर में। जीजा जी का लंड बहुत छोटा था। दो मिनट बाद ही जीजा जी झड़ गए और वहीं नशे में सो गए।
दीदी की आँखों में आँसू थे, वो उठी और कमरे से बाथरूम जाने लगी कि अचानक उन्होंने मुझे देख लिया। मैं भी वहाँ से चला गया और रात भर उनकी बुर के बारे में सोचता रहा। उसकी चूत क्या मस्त थी ! बिल्कुल गुलाबी ! एक भी बाल नहीं था उसकी चूत पर ! उसे सोचते सोचते ही मैं तो जैसे पागल हो गया। मैंने रात में मुठ मारी और सो गया।
सुबह जब उठा तो पता लगा कि जीजा जी दस दिनों के लिए पुणे गए हैं। मैं और दीदी एक दूसरे को देख रहे थे।
मुझे उसके पतली कमर के साथ डोलते हुए चूतड़ बहुत विचलित करते थे, मैं सोचता था कि उसे नंगी करने के बाद उसके गोरे गदराये चूतड़ कितने प्यारे लगेंगे.. उन्हें सहलाने में और दबाने में कितना मजा आएगा ! और कमर से ऊपर नज़र जाते ही.. उफ़ उसकी भरी हुई छातियाँ.. उसके स्तन एकदम कसे हुए थे.. एक बच्चे की माँ लेकिन स्तन जैसे बीस साल की कुंवारी लड़की के.. 36 साइज़ होगा उनका.. दोनों उसके ब्लाऊज़ या कुरते के अन्दर एक दूसरे से चिपके हुए रहते थे.. जिसके कारण उसके बीच की घाटी बहुत ही उत्तेजक दिखाई देती थी। सब कुछ मिला कर मेरे जैसे कामी पुरूष के लिए वो एक विस्फोटक औरत थी…
अब मैंने उन्हें और उन्होंने मुझे अलग नजरों से देखना शुरू कर दिया था। शायद वह मेरी नजरों की भाषा समझ रही थी। हम दोनों एक दूसरे से खुल कर बातें करने लगे थे। जब भी मैं उसके उभरे संतरे जैसे चूचियों को देखता था तो मेरे मन में एक ही ख्याल आता था कि अभी जाकर उनका सारा रस निकालकर पी जाऊं। सूट पहने हुए उसकी कमर एवं जांघों को देखकर मुंह में पानी आ जाता था।
एक रात मैं दीदी के कमरे में झांक रहा था तो जो देखा उससे मेरे रोंगटे खड़े हो गए ! दीदी टीवी पर ब्लू फिल्म देख कर अपनी चूत को जोर जोर से अपने हाथों से रगड़़ रही थी ! मेरा लण्ड एकदम से तन कर खड़ा हो गया, मुझसे रहा न गया और मैंने वहीं खड़े खड़े मुठ मार कर उसे शांत किया।
मैं समझ गया कि जीजा जी से दीदी की बुर शांत नहीं होती है, वो प्यासी है उसकी बुर में आग लगी है और मेरा काम बन सकता है।
एक दिन मैं सोने के लिये बेडरूम में आ गया तो देखा की दीदी अपनी गैलरी में खड़ी थी। मैंने सोचा कि मौका अच्छा है। फ़िर तुरन्त ही अपना पैन्ट उतार कर, वो मुझे देख सके, उस तरफ़ मुँह करके अपने लण्ड को तेल लगा-लगा कर मालिश करने लगा।
जैसे ही उसने मुझे नंगा देखा, तुरन्त अपने कमरे में भाग गई। दोस्तो, मेरा लण्ड अगर किसी भी औरत या लड़की ने देखा तो चखने का मन बन ही जाता है। फ़िर मैंने खिड़की के काँच से देखा तो पता चला कि वो दरवाजे के पास कुर्सी डाल कर चुपके से मेरे कमरे में झांक रही थी।
मैंने सोचा कि मेरा काम हो गया। अब दीदी की आँखों में मुझे वासना नज़र आने लगी थी, बस मैं मौके के इंतज़ार में था। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।
एक दिन वो मेरे पास आई और उसने कहा- मेरे कंप्यूटर में कुछ खराबी आ गई है और मैंने एक जरूरी इमेल करनी है। क्या मैं तेरा लैपटॉप प्रयोग कर सकती हूँ?
मैंने कहा- हाँ हाँ ! क्यों नहीं !
मैंने कहा- दीदी, आप बैठिये, मैं लैपटॉप देता हूँ !
मैंने ऐसे ही लैपटॉप पकड़ा दिया। जैसे ही उन्होंने लैपटॉप देखा तो दीदी का चेहरा लाल हो गया, उसने झिझकते हुए कहा- भैया, तुम ही वेब साईट खोल कर दे दो।
मैंने लैपटॉप लिया तो देखा कि नंगी वेब साइट्स खुली हुई थी, मैं घबरा गया और बोला- सॉरी, यह लीजिये ! अब सब ठीक है !
दीदी बोली- शादी नहीं हुई है तो खूब ऐश हो रही है?
मैंने कहा- मन तो बहुत करता है मगर कुछ भी नहीं कर पाता, सिर्फ इन्टरनेट का ही सहारा है !
उसने कहा- क्या तुम मुझे इन वेब साइट्स के लिंक लिख कर दे सकते हैं?
मैं हैरान रह गया ! मैंने कहा- क्या दीदी?
वो बोली- हाँ ! वो असल में तुम्हारे जीजा जी को दिखानी हैं, शायद ये देख कर वो थोड़ा रोमांटिक हो जायें !
मैंने पूछा- क्यों? क्या वो अभी रोमांटिक नहीं है?
तो दीदी बोली- रोमांटिक का र भी नहीं आता उनको ! रात को आते हैं, शराब पीते हैं और मेरे हाथों में अपने छोटे से लंड को देकर कहते हैं- हिला दो ! मैं उसे झरवा देती हूँ और फिर वो सो जाते है। मेरे अरमान और बदन की गर्मी वहीं की वहीं रह जाती है। मैंने कई बार कोशिश की, मगर वो समझते ही नहीं ! कहते है कि बहुत थक गया हूँ।
शादी से लेकर आज तक बस बहुत कम ही हमने सेक्स किया है जिसमें वो पूरा अन्दर तक भी नहीं जाता।
वो बोली- अंकित, ये मेरी बहुत व्यक्तिगत बातें हैं, किसी को नहीं बताना ! मैं तुम्हे ये सब बता रही हूँ कि तुमने रात सबकुछ देख लिया था।
मैंने घबरा कर कहा- आप चिंता मत करो !
मैं समझ गया था कि लोहा गर्म है, हथौड़ा मारने की देर है।
फिर वो बोली- मेरा काम हो गया है, मैं चलती हूँ अपने रूम में सोने को। तुम भी सो जाओ।
पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैंने कहा- बस एक चीज दिखानी है आपको !
और कह के अपनी जींस नीचे कर दी, मेरा नौ इंच का लंड खड़ा हुआ फुफकार रहा था। वो पलटी और उसकी आँखें फटी की फटी रह गई, पसीना उसके गाल से बहने लगा और चेहरा लाल हो गया। वो मेरे पास आई, मेरी आँखों में गुस्से से देखा और मुझे जोरदार थप्पड़ मार दिया।
मैं बहुत घबरा गया, शायद मैंने उसकी बातों से गलत समझ लिया था कि वो मेरे साथ अपनी प्यास बुझा लेगी। मुझे लगा कि अब मेरी बदनामी कर देगी ये !
मगर वो बोली- तुमने इतनी देर लगा दी इस चीज़ को दिखाने में??
मेरी सांस में सांस आई और जान में जान ! गिरता हुआ लंड फिर से तन गया और दीदी को मैंने बिना कुछ और सोचे समझे अपनी बाहों में भर लिया। मेरे बदन की जैसे बरसों की प्यास बुझ रही थी। मैंने अपना लंड उसके हाथ में दिया, अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए और जोर जोर से चूसने लगा। मेरा हाथ उनके कुरते में घुसे और उसकी ब्रा का हुक ढूंढने लगे।
उसकी साँसें गरम हो गई, मैं बता नहीं सकता कि उसके जिस्म से आग निकल रही थी, वो पागलों की तरह मेरे लंड से खेल रही थी और मुझे चुम्मे दे रही थी, एकदम जवान नई दुल्हन की तरह तड़प रही थी। मैंने उसको दीवार के साथ खड़ा किया और अपनी छाती से उसके मम्मे दबा दिए, उसके माथे से लेकर छाती तक सैंकड़ों चुम्मियाँ ली और कई जगह तो लाल निशान भी बना दिए।
वो भी भूखी शेरनी की तरह मेरे बदन से खेल रही थी और मेरे होंठों को, गालों को, और छाती को चाट रही थी। उसके मुँह से बस आऽऽह…ऽऽ आऽऽ ऊऽऽऽ… म्म्मऽऽऽ आऽऽऽ लव यू जान, मेरे असली मर्द… म्म्मम्म्म्म… आआआअ… यही आवाजें निकल रही थी।
मैंने पंद्रह मिनट तक उनके दोनों मम्मे चूसे और वो तब पागल सी हो है थी। मेरे लंड को रबड़ का खिलौना समझ कर खेल रही थी और अपनी चूत पर रगड़ रही थी। लेकिन मैं भी कम नहीं था, मैंने और भड़काया, उसके हाथों से लंड खींच लिया और उसका सर नीचे की ओर दबाकर इशारा किया कि मुँह में लो !
तो वो फट से तैयार हो गई और मेरा नौ इंच लम्बा लंड देख कर बोली- तुम्हारा तो बहुत लम्बा है, और मोटा है, बिल्कुल काला नाग है ये, तुम्हारे जीजा जी का तो छोटा सा ही था।
मैंने कहा- लम्बे लंड से चुदने में जो मजा आपको अब आएगा वो कहीं नहीं आएगा।
वो बोली- तो जल्दी से चोद दो ना !
और मेरा लंड जल्दी जल्दी चूसने लगी। मैंने उनकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और सलवार निकाल कर पैंटी भी उतार दी और चूत में उंगली डाल दी। मैं उंगली से चोदने लगा, वो बिस्तर पर लेट गई और मैं उसकी चूत चाटने लगा। वो मेरा लंड चूसने लगी 69 की पोजिशन में।
तभी उन्होंने मेरा लंड छोड़ कर मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा दिया और आआअह ह्ह्ह्ह्हा आआऊऊउईईइ म्म्म्म्मा करने लगी और जोर से झड़ गई। मैंने उनका पूरा पानी साफ़ कर दिया चाट चाट कर !
फिर मैंने उनसे कहा- अपना कमीज उतार दो।
तो उन्होंने उतार दिया और मैंने उनकी चूची चूसनी शुरू कर दी। वो फिर से गर्म होने लगी और आआअह्हह्ह म्मम्माआअ करने लगी और अपनी चूत रगड़़ने लगी।
मैंने उनके मुंह में अपना लंड डाला, वो तो जैसे तैयार थी, पूरा लंड मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी, जैसे रेगिस्तान की गर्मी में किसी को पानी मिल जाए !
कुछ देर बाद मैं अपनी जीभ से उनकी नाभि चाटने लगा।
वो बोली- क्या बात है तुममें ! कमाल की कला है बिस्तर में औरत के साथ खेलने की ! मैं एक अरसे से इस सपने के साथ जी रही थी, जो आज पूरा होने जा रहा है।
मैंने कहा- मैं भी इसी सपने को आज तक देख रहा था दीदी।
अब वो पूरी नंगी थी, चूत बिल्कुल साफ़ और पूरी गीली ! मैंने उनकी टांगें थोड़ा फैलाई और चूत का पानी चाट कर साफ़ किया। वो छटपटाई और मेरे बालों को जोर से खींचा। मैंने उनकी चूत को खोला तो वो पूरी लाल थी, मैंने अपनी जीभ से चाटना शुरू किया और उनका चिल्लाना और तड़पना !
मैं कैसे बताऊँ कि जितनी देर तक चाटा, वो फिर पानी छोड़ती रही जैसे की महीनों से उन्होंने पानी न झारा हो।
तवा पूरा गर्म था, मैंने फटाफट उनकी गांड के नीचे तकिया रखा और दोनों हाथों से उनके हाथ पकड़ कर लण्ड चूत पर रख दिया ! मुझे पता था कि वो बहुत चिल्लाएगी इसलिए अपने होठों से उनके होंठ बंद कर दिए और एक झटका मारा, मेरा तीन इंच लंड उनकी बुर में घुस गया। उनकी चूत वाकई काफी कसी हुई थी, लगभग अनचुदी !
अभी तीन इंच लंड ही गया था कि वो दर्द से कराह उठी, अन्दर ही अन्दर चिल्ला रही थी और पैरों को जोर जोर से पटकने लगी।
मैंने कहा- दीदी, जीजाजी ने तुमको चोदा हुआ है, फिर भी ऐसे चिल्ला रही हो जैसे पहली बार चुदवा रही हो !
तो बोली- एक तो तुम्हारा मोटा है, दूसरा तुम्हें पता है कि उनका लंड कितना बड़ा है, जरा धीरे करो ना !
मैंने कहा- ठीक है !
तो फिर मैं फिर से धक्का लगाने लगा और उनकी चूची चूसने लगा।
मैंने एक मिनट बाद दोबारा धक्का मारा और पूरा लंड अन्दर घुसा दिया। उन्होंने मेरा मुँह अपने मुँह से हटाया और जोर से चिल्लाई- यह क्या किया ? मैं मर गई, उई माँ ! मैं मर गई ! निकालो इसे…
वो बोली- तुम जानवर हो ! मुझे छोड़ दो ! मेरी चूत फट गई ! मेरी जान निकल रही है, बाहर निकालो।
मैंने झटके लगाने शुरू कर दिए तो वो और चिल्लाने को हुई तो मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और जोर जोर से चोदने लगा। 5 मिनट बाद उसको मजा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी और फिर शुरू हुआ असली चुदाई का मजा !
मैं जितनी तेज ऊपर से झटके मारता वो नीचे से उतनी ही तेजी से जवाब देती। सच दोस्तों क्या बताऊँ क्या क़यामत चुदाई चल रही थी कि तभी वो मुझसे चिपक गई और मेरे कंधे पर काटने लगी और उसने अपने नाखून मेरी पीठ में चुभा दिए। वो आअ आआ आआ आह्ह्ह्ह करती हुई झड़ गई, फिर कहने लगी- जल्दी करो अब सहन नहीं हो रहा।
मैंने भी उन्हें खूब चाटा, करीब पंद्रह मिनट तक उसे चोदने के बाद मैंने अपनी पूरी पिचकारी अन्दर छोड़ दी। तब तक वो दो बार झड़ चुकी थी। वो मेरे शरीर को कस के पकड़े हुए थी और चाट रही थी।
मैं थक कर उनके मम्मों पर गिर गया और वो मेरे बालों में प्यार से हाथ फेरने लगी। दो मिनट के बाद मैं उठा और अपना लंड उनकी चूत से निकाला।
मैंने प्यार से उन्हें खूब सारे और चुम्मे दिए। उनकी चूत से थोड़ा सा खून छलक आया था जो मैंने रुमाल से साफ़ कर दिया। वो बहुत खुश थी, इस चुदाई के बाद जैसे उसका मन और बदन का हर अंग खिल उठ था। वो इतनी खुश थी कि उनकी आँखों से आँसू छलकने लगे और वो मुझसे काफ़ी देर तक चिपकी रही जैसे मन ही मन वो चाह रही हो कि काश मैं उसका पति होता !
उसके बाद मैंने और मेरी सोनी दीदी ने अगले दस दिनों तक खूब सेक्स किया। मैंने उन्हें उन दस दिनों में औरत होने का पूरा सुख दिया।

आत्मकथा

मैं नहीं जानता कि मैंने गलत किया या सही, परन्तु मैंने जो भी किया वो लिख रहा हूँ। दोस्तो, मेरा फ़ैसला आपके हाथों में है। अब आपको ही निर्णय करना है कि मैंने सही किया या गलत। ज्यादा बोर न करते हुए मैं अब सीधे अपनी कहानी पर आता हूँ।
मेरा नाम लव कुमार है। मेरा परिवार एक बड़ा परिवार है। मेरे परिवार में मेरे अलावा मेरे पापा, मम्मी, दादा, दादी, चाचा, चाची, दो भाई और चार बहनें है, दो मेरी और दो चचेरी। मैं अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ा हूँ। मेरी उम्र 24 साल है। मेरी एक बहन 20 की और एक 18 की है। बड़ी का नाम स्वाति और छोटी का अदिति। मेरे मम्मी पापा की तरह मैं और मेरे सभी भाई बहन काफ़ी खूबसूरत हैं। मैं बचपन से ही थोड़ा शर्मीले स्वभाव का हूँ इसीलिए मेरा कोई अच्छा दोस्त नहीं था।
तब मैं ग्यारहवीं में था। जब एक दिन खेलने के लिए जाते समय मुझे रास्ते में एक किताब मिली उसे पलट के देखने पर मेरे होश ही गुम हो गये क्योंकि उसमें लड़कियों की नन्गी तस्वीरें और गन्दे शब्दों वाली कहानियाँ थी। उस समय मैंने पहली बार सेक्स की एक किताब पढ़ी। मुझे ना जाने क्या होने लगा, मेरा पूरा शरीर एक अनजान सी गर्मी से भर गया। अचानक मेरा ध्यान मेरे अपने लण्ड पर गया, वो दर्द कर रहा था क्योंकि मैंने जीन्स पहन रखी थी और मेरे लन्ड को खड़े होने की जगह नहीं मिल रही थी।
मैंने उस किताब को छुपा कर रख दिया। दोस्तो, उस समय मेरी स्थिति का आप केवल अनुमान कर सकते हैं, मुझे उस समय हस्तमैथुन का कोई ज्ञान नहीं था।
अगले दिन मैंने वो किताब अपने एक साथी को दिखाई। उसने मुझसे वो किताब ले ली और तालाब के पीछे चला गया जहाँ शाम को इक्का-दुक्का लोग ही आते जाते हैं। हम सब खेलने में लग गये। अचानक मुझे अन्कित का ख्याल आया जिसे कि मैंने वो किताब दी थी। मुझे एक शरारत सूझी। सितम्बर की गर्मी थी, शाम के 7 बजे थे, मैं अन्कित को डराने के लिये चुपके से तालाब के पीछे गया। वहाँ जाते ही मैं दंग रह गया। वो अपने खड़े लण्ड को पकड़ कर आगे-पीछे कर रहा था। उसे देखकर मुझे जोर की हँसी आई। उसने मुझे देखा और हड़बड़ा कर अपने लण्ड को अन्दर किया।
मैंने उससे पूछा- क्या कर रहा था?
तो उसने मुझे कहा- कभी मुठ नहीं मारा है क्या?
मैंने पूछा- यह क्या होता है?
तब उसने मुझे हस्तमैथुन करने का तरीका बतलाया।
मैंने कहा- मुझे यह सब अच्छा नहीं लगता ! ऐसी गन्दी बातें मत करो।
पर अगले दिन जब नहाते समय जब मैं बाथरुम में था तब अचानक मस्तराम की वो कहानी याद आ गई और मेरा लण्ड खड़ा हो गया। अनायास ही मेरा हाथ मेरे लण्ड को आगे-पीछे करने लगा। क्या बताऊँ यारो ! क्या मज़ा आ रहा था ! करीब 7-8 मिनट ऐसा करते रहने के बाद अचानक मेरे हाथ की गति एकाएक ही बढ़ गई, मेरा पूरा शरीर अकड़ने लगा, अचानक मेरी आँखें बन्द हुई और मेरे लण्ड से कुछ निकला। मेरा पूरा शरीर एक आनन्दमय लहर से भर उठा।
30 सेकंड के बाद जब मैंनें अपनी आँखें खोली तो देखा कि बाथरुम का फ़र्श उजले गोन्द जैसे चिपचिपे पदार्थ से भरा था। मैं डर गया और शाम में अन्कित को अकेले में बुलाकर उसे यह सारी बात बतलाई और उससे पूछा- वो सफ़ेद सा चिपचिपा सा क्या था?
तो उसने बताया- अरे बुद्धु ! वो ही तो वो चीज है जो लड़कियों के पेट में बच्चा पैदा करता है इसे माल कहते हैं।
फ़िर उस घटना के बाद मैं उससे घुलमिल गया। वो और मैं अक्सर सेक्स की बातें करने लगे। वो कहीं से मस्तराम की चुदाई वाली किताब लाता था और हम दोनों उसे साथ बैठकर पढते थे। उसके बाद हस्तमैथुन का दौर चलता था। उसने मुझे सेक्स के बारे में बहुत कुछ बताया।
जब मैं बारहवीं में था तब हमने होली के दिन ब्लू फ़िल्म देखी और उसी के बाद से मेरी जिन्दगी में एक नया मोड़ आया। उस दिन अन्कित ने मुझे बतलाया कि असली मजा तो लड़कियों को चोदने में है।
उसके बाद लड़कियों को देखने का मेरा नजरिया बदल गया।
अब लड़कियों को देखते ही मेरा ध्यान उनकी चूचियों पर जाता था और मेरे लण्डाधिराज एक जोरदार सलामी ठोकते थे।
बारहवीं के परीक्षा के बाद मैं पटना आ गया और स्नातक की पढ़ाई शुरु कर दी। कोचिंग पर मेरे बहुत सारे दोस्त बने और उन्होने हमें साइबर ज्ञान दिया और शुरु हो गया नेट पर ब्लू फ़िल्म, तस्वीरें देखने का सिलसिला। मैंने मोबाईल फ़ोन पर नेट का कनेक्शन ले रखा था और उस पर  कहानियाँ पढ़ा करता था।
अब शुरु होती है लव की जिन्दगी का वो पल जिसके बारे में मैंने कभी सोचा भी ना था।
दिसम्बर का महीना था मैं अपने गाँव गया हुआ था। एक दिन  मैंने भाई-बहन की चुदाई की कहानी पढ़ी। अब तक किसी से सेक्स नहीं किया था मैंने और उस कहानी को पढ़ने के बाद मैं स्वाति के बारे में सोचने लगा- उसकी हाहाकारी चूचियाँ उसके मांसल चूतड़। मेरा लण्ड उसके शरीर के कल्पना से ही तन गया।
तभी मेरी मम्मी ने मुझे पुकारा, मैं जैसे नींद से जागा और सोचने लगा- छिः ! मैं अपनी बहन के बारे में यह क्या सोच रहा हूँ?
पर वो कहते हैं कि जब दिमाग में कोइ चीज घुस जाये तो वो आसानी से नहीं निकलती ! वो भी चोदने का ख्याल- कभी सोच कर देखिएगा।
अब मैं अपनी बहन स्वाति के बारे में सोचने लगा। कभी सोचता- नहीं यह गलत है ! पर कभी सोचता- इसमें गलत क्या है। मैं इसी अन्तर्द्वद्व में फ़ंसा था।
एक रात को मेरी एक चचेरी बहन और मेरी दोनों बहनें पढाई कर रहे थे, ठण्ड काफ़ी थी, मैं एक रजाई ओढ़े लेटा हुआ था और एक रजाई में वो तीनों बहनें पढ़ रही थी।
तभी अदिति और दिव्या, मेरी चचेरी बहन जिसकी उम्र 10 साल थी रजाई को लेकर खींचातानी करने लगी।
स्वाति ने उस दोनों की नोंकझोंक को रोकने के लिए कहा- तुम दोनों शांत होकर पढ़ाई करो !
तो दिव्या ने कहा- दीदी, रजाई छोटी है तीनों के लिए !
तो उसने कहा- कोई बात नहीं ! तुम दोनों इसे ओढ़कर पढाई करो, मैं भैया की रजाई ओढ़ लेती हूँ।
वो लेटकर पढ़ रही थी, उसने मेरे पैर के तरफ़ की रजाई खींचकर ओढ़ ली।
करीब 15 मिनट के बाद मेरा पैर अचानक किसी गुदाज वस्तु से टकराया और मैंने स्वयं यह कल्पना कर ली कि यह शायद स्वाति की चूची थी।
मेरा लण्ड खड़ा हो गया। अब मेरे मन का चोर जाग उठा था, मैंने धीरे से अपना पैर थोड़ा सा आगे खिसकाया अब मेरे पैर का अँगूठा उसके चूचियों को छू रहा था। मैंने अपने पैर का दबाव थोड़ा सा और बढ़ाया, तभी स्वाति ने मेरे पैर के अँगूठे को पकड़ कर उसे हटा दिया। मैंने नींद में होने का नाटक करते हुए कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई। स्वाति ने भी शायद यही सोचा और थोड़ा सा खिसक गई।
मेरी हिम्मत जवाब दे गई लेकिन वो क्या कहते हैं कि जब चुदाई का भूत सवार होता है तो आदमी को चुदाई के अलावा कुछ नहीं सूझता है। मेरी भी हालत कुछ ऐसी ही थी।
तभी दिव्या ने मुझे पुकारा- भैया ! भैया !
पर मैं कुछ नहीं बोला।
अदिति ने कहा- भैया शायद सो गये हैं ! क्या बात है?
तो दिव्या ने कहा- सवाल पूछ्ना था !
तो स्वाति ने कहा- लाओ, मैं बता देती हूँ ! भैया थके हुए हैं, उन्हे सोने दो।
मैंने सोचा- सभी सोच रहे हैं कि मैं सोया हुआ हूँ, इसका फ़ायदा उठाया जाये !
पाँच मिनट के बाद मैं थोड़ा सा नीचे की ओर खिसका और धीरे-धीरे अपना पैर उसकी चूचियों की ओर बढ़ाने लगा। मेरा प्रयास रंग लाया और एक मिनट के बाद मेरा पंजा उसकी चूचियों पर था। वो थोड़ा सा कुनमुनाई पर उसके और खिसकने के लिये जगह भी नहीं थी सो वह यूँ ही लेटी रही।
मैंने अपने पैर का दबाव उसकी चूचियों पर थोड़ा सा बढ़ाया, कुछ देर उसी तरह रहने के बाद मैंने धीरे से अपना दूसरा पैर भी बढ़ाकर उसकी चूचियों से लगा दिया। वो पेट के बल लेटी हुई थी और मेरे दोनों पैर उसकी दायीं चूची पर थे। कुछ देर के बाद मैं अपने दाएँ पैर के अँगूठे से उसके चूची के बाहरी भाग को स्वेटर के ऊपर से सहलाने लगा। उसने ना तो कोई हरकत की और ना ही कुछ बोली।
मेरी हिम्मत कुछ और बढ़ गई। अब मैंने अपने दाएँ पैर को धीरे धीरे आगे खिसकाना शुरु किया। उसे भी शायद मज़ा आने लगा था, उसने मेरी इस हरकत का कोई विरोध नहीं किया।
पर मेरा पैर अब आगे नहीं जा रहा था, कि तभी उसने करवट बदली अब उसकी दोनों चूचियाँ मेरे पैर की तरफ़ थी। मैंने धीरे से अपने दोनों पैर उसकी दोनों चूचियों पर लगा दिए।
तभी उसने लेटे-लेटे ही अदिति से कहा- मेरी किताब बंद करके रख दो ! मेरे पेट में दर्द हो रहा है !
और उसने थोड़ी सी और रजाई खींचकर अपने सिर और मुँह को भी ढक लिया। मेरे पैर अब उसकी चूचियों का मुआयना कर रहे थे पर उसके स्वेटर पहने होने के कारण उसकी चूचियों को महसूस करने में ज्यादा मज़ा नहीं आ रहा था।
मैंने थोड़ा हिम्मत करके अपने बांए पैर को उसके स्वेटर के नीचे से घुसा दिया। स्वाति कुछ नहीं बोली, शायद वो सो गई थी।
मैंने अपनी शंका का समाधान करने के लिए अपने पैर से उसकी चूचियों को जोर से दबाया पर वह कुछ नहीं बोली।
अब मैं थोड़ा सा बेफ़िक्र हो गया और अपने दोनों पैरों को उसके स्वेटर के अन्दर घुसा दिया अब मेरे पैर उसकी शमीज के ऊपर से उसकी चूचियों को छू रहे थे ! क्या मांसल और गुदाज चूचे थे उसके !
अब मैं अपने पैर के पन्जे से उसकी चूचियों को सहला रहा था, वो वैसे ही लेटी रही। मेरे पैर के पंजे उसकी चूचियों पर थे और धीरे-धीरे मैं अपने अपने अँगूठे से उसके चुचूक को मसलने लगा। वो थोड़ी सी कुनमुनाई पर मैंने अपने पैरों का काम जारी रखा।
अब मैं अपने पैरों को उसकी नाभि की ओर बढ़ाने लगा। मेरी हिम्मत धीरे-धीरे बढ़ रही थी। पैरों को बढ़ाते हुए मैंने उसे उसकी सलवार के अन्दर ले जाना चाहा पर सलवार का नाड़ा काफ़ी मजबूती से बँधा था। मैं अब उसकी चूचियों को पंजे और अँगूठे दोनों की मदद से दबा रहा था।
तभी अदिति और दिव्या किताब और लैम्प उठाकर बोली- दीदी, मैं खाना खाने जा रही हूँ।
पर वह कुछ नहीं बोली।
दिव्या बोली- शायद दीदी भी सो गई !
मैंने जल्दी से अपने दोनों पैर वहाँ से हटाए लेकिन दिव्या और अदिति स्वाति को उठाये बिना खाना खाने चली गई। उनके जाने के मैं खिसककर उसके बगल में आ गया और उसके समांतर लेट गया। अब मैंने अपना हाथ उसकी चूचियों पर रखा। क्या मजा आ रहा था। मैं उसकी चूचियों को स्वेटर के अन्दर से मसल रहा था उसकी चूचियों के दाने खड़े थे। मैंने अपना पैर उसके पैर पर रख दिया। अब मैं एक हाथ उसकी शमीज के अन्दर ले गया और उसकी चूचियों को सहलाने लगा।
कुछ देर इसी तरह सहलाने के बाद मैंने अपने हाथ से उसके सलवार का नाड़ा खोल दिया और हाथ को उसके अन्दर ले गया। मेरा लण्ड बुरी तरह से खड़ा हो चुका था और उससे लिसलिसा द्रव्य निकल रहा था।
मैं अपने हाथ को उसकी पैंटी पर ले गया, वो चिपचिपी और गीली थी। मैं समझ गया कि वो जाग रही है और उसे भी मजा आ रहा है। यह जानकारी मुझे अन्तर्वासना से मिली थी। अब मैं पुरी तरह से बेफ़िक्र हो गया था, मैं समझ गया था कि वो भी मजा ले रही है।
मैंने अपने हाथ को उसकी पैंटी के अन्दर घुसा दिया। आज से पहले मैंने केवल इसके बारे में पढ़ा था, आज महसूस कर रहा था।
मेरे हाथ उसकी बुर को छू रहे थे। उसकी बुर पर थोड़े से रेशम जैसे मुलायम बाल थे, चूत पूरी तरह से गीली थी। मैं उसकी बुर को एक हाथ से टटोलने लगा और मेरा दूसरा हाथ उसकी दोनों चूचियों को बारी-बारी से मसल रहा था।
मैं अपने बाँए हाथ को उसकी पैंटी के अन्दर ही खिसकाकर उसके पीछे गाँड पर ले गया और अपने शरीर को उसके बदन से चिपका दिया। मेरा लण्ड उसकी जांघों को छू रहा था। एक हाथ से मैं उसकी चूचियों को दबाये हुए था।
अब मैंने अपने होंठ उसके होंठ से लगा दिए और उसके होंठों को चूसने लगा। मैंने अपनी जीभ को उसके मुँह से सटाई तो उसने अपना मुँह खोल दिया। अब वो भी मेरी जीभ चूसने लगी, शायद वो इतनी गर्म हो चुकी थी कि अपने आप को रोक नहीं पाई।
मैंने अपना हाथ उसकी गांड से हटाया और पकड़ कर अपने पजामे के अन्दर घुसा दिया। उसने अपना हाथ झट से हटा लिया, शायद वो मेरा लण्ड पकड़ने में हिचकिचा रही थी। मैंने फ़िर से उसके हाथ को अपने लण्ड से सटा दिया। अबकी बार उसने अपना हाथ नहीं हटाया और मेरे लण्ड को पकड़ कर सहलाने लगी।
मैंने उसका चुंबन लेना बन्द किया और अपने मुँह को उसकी शमीज के ऊपर से उसकी चूचियों से सटा दिया।
वो मेरा लण्ड लगातार सहलाए जा रही थी, मैं भी उसकी चूचियों को उसकी शमीज के ऊपर से ही चूस रहा था।
उसने तभी कहा- रुकिए !
मैं रुका और बोला- क्या हुआ?
उसने कहा कुछ नहीं और अपनी शमीज का हूक खोल दिया।
मैंने उसे थैंक्यू कहा और उसकी शमीज को नीचे कर दिया और उसकी नंगी चूचियों को चूसने लगा।
अचानक मम्मी ने आवाज लगाई- बेटा लव, आओ, खाना खा लो।
स्वाति हड़बड़ाकर उठी अपने कपड़े ठीक किये और चली गई।
मैं भी उठा और पजामा ठीक किया पर मेरा लण्ड काफी तना हुआ और फ़ूला हुआ था जो पजामे के ऊपर से भी महसूस होता था।
मैं तेजी से उठकर बाथरुम गया और हस्तमैथुन किया।
खाना खाने के बाद मैंने सोने जाते समय स्वाति से कहा- सबके सोने के बाद मेरे कमरे में आ जाना।
उसने मना कर दिया, कहा- नहीं, यह गलत बात है ! हम दोनों भाई बहन हैं ! हमें इस तरह की बात सोचना भी नहीं चाहिए। पता नहीं क्यों मैंने आपको मना नहीं किया ? हमने जो किया, वो हमें नहीं करना चाहिए था।
यह कह कर वो चली गई।
मैं उस रात काफ़ी अनमना सा महसूस कर रहा था। एक तो मुझे स्वाति की बातों का ख्याल आ रहा था, दूसरे मेरी वासना मुझ पर हावी थी। मैं दुखी सा मन लेकर सोने चला गया। पर आँखों में नींद कहाँ थी। सारी रात मैं चुदाई के सपने देखता रहा और मन मसोसता रहा। पर मैं कर भी क्या सकता था। अगली सुबह मैं स्वाति से नजरें नहीं मिला पा रहा था, मुझे लग रहा था जैसे मैं खुद की नजरों में गिरता जा रहा हूँ।
कुछ दिनों तक तो सब ठीक ठाक चलता रहा। मैंने पता नहीं क्यों सेक्स कथाएँ पढ़नी छोड़ दी थी।
चार दिन बाद मैं शाम के समय में घर की छत पर बैठकर मोबाइल फोन पर भाई बहन की सेक्स कहानी पढ़ रहा था। तभी अचानक स्वाति आ गई और पूछने लगी- क्या कर रहे हैं।
मैंने कहा- कुछ नहीं।
तो उसने पूछा- आप किसी लड़की से बात कर रहे थे ना?
तो मैंने कहा- नहीं तो !
फ़िर उसने कहा- मुझे प्लीज एक विडियो दिखा दो ना मोबाइल पर !
मैंने कहा- ठीक है !
और जल्दी से  साईट को बन्द करके उसे ग़दर मूवी का ‘उड़ जा काले कावां” वाला गीत लगाकर दे दिया।
वो उसे देख ही रही थी कि मम्मी ने मुझे पुकारा, मैंने स्वाति से कहा- तुम तब तक वीडियो देखो, मैं आता हूँ।
यह कह कर मैं नीचे चला गया। मम्मी ने मुझे दुकान से चायपत्ती लाने को कहा। करीब 20 मिनट के बाद मैं जब आया तो देखा स्वाति छत पर ही है। मैं भी छत पर गया तो देखा कि स्वाति जल्दी से वीडियो बन्द करना चाहती थी।
मैंने जब उससे मोबाइल लिया तो देखा उस पर बूम फ़िल्म का गाना चल रहा था। स्वाति ने कहा- छी ! कैटरीना कैफ़ कितना गन्दा सीन करती है।
मैंने कहा- इसमें गन्दा क्या है?
तो उसने कहा- कितने छोटे कपड़े पहने हैं उसने !
तो मैंने कहा- इसने तो छोटे ही सही पर कपड़ा तो पहना है, विदेश की हिरोइन तो कुछ भी नहीं पहनती है।
तो उसने कहा- आप झूठ बोलते हैं।
मैंने कहा- मैं तुम्हें अभी दिखा सकता हूँ पर तुम वादा करो कि किसी और से नहीं कहोगी।
तो उसने कहा- ठीक है।
मैं उसे नेट पर विदेशी हिरोइन की नंगी तस्वीरें दिखाने लगा। मैं उससे सटकर खड़ा था, दो चार फोटो दिखाने के बाद मैं उसके और करीब सट गया। अब मेरी कोहुनी उसकी मांसल चूचियों से सट गई। उसने कोई विरोध नहीं किया।
कुछ देर के बाद मैंने उसके कन्धे पर अपना एक हाथ रख दिया, वो कुछ नहीं बोली, वो फोटो देखने में मग्न थी। तभी धोखे से एक वीडियो खुल गया जिसमें चुदाई का सीन चल रहा था।
उसने अचानक कहा- मुझे अब नहीं देखना है !
और नीचे चली गई, मैं भी कुछ नहीं बोला।
उस दिन पड़ोस में शादी थी। मेरी मम्मी और दादी वहीं चली गई। उन्होंने स्वाति को भी चलने को कहा तो उसने कहा- मेरे सर में दर्द है।
तो मम्मी ने कहा- ठीक है, मैंने खाना बना दिया है, भैया को खिला देना और तीनों बहन भी खा लेना !
और वो चली गई। रात में जब अदिति और दिव्या पढ़ने के लिये आई तो मैंने पूछा- स्वाति कहाँ है?
तो दिव्या ने कहा- नहीं पता !
मैने कहा- कोई बात नहीं, तुम लोग पढ़ो, मैं उसे बुला कर लाता हूँ। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉंम पर पढ़ रहे हैं।
मैं दूसरे कमरे में गया तो देखा कि स्वाति रजाई ओढ़कर पेट के बल लेटी हुई है। मैंने उसे आवाज दी- स्वाति ! स्वाति !
उसने कुछ नहीं बोला। मैं उसे हिलाकर उठाने लगा, तभी अचानक मेरी अन्तर्वासना ने फिर से जोर मारा। मैं उसके बगल में जाकर लेट गया और रजाई खींचकर ओढ़ ली।
मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी पीठ पर रख दिया, वो कुछ नहीं बोली।
मैं धीरे-धीरे उसकी पीठ को सहलाने लगा। वो उसी तरह लेटी रही। मैंने अपना घुटना उठाकर धीरे से उसके चूतड़ों पर रख दिया। मेरा 6′ का लौड़ा खड़ा हो गया और उसकी कमर से मैं सट गया। मैं अपना हाथ उसके बगल से ले जाकर उसकी चूचियों को सहलाने लगा। मैं अपने दायें हाथ से उसकी दाईं चूची को सहला रहा था।
मैं तो जैसे जन्नत की सैर कर रहा था। क्या गुदाज और मांसल चूचियाँ थी उसकी।
अब मुझसे रहा नहीं गया और और मैंने उसको अपनी ओर घुमा दिया।
वो थोड़ी सी कुनमुनाई पर मेरी ओर घूम गई। अब मेरा पैर उसकी जान्घों पर था और मेरा हाथ उसकी चूचियों पर ! मैं उसके स्वेटर के बटनों को एक एक करके खोल दिया और अपने होंठ उसके होंठों से लगा दिए। अब मैं पूरी तरह से स्वाति के ऊपर चढ़ गया। मैं अपने दायें हाथ से उसकी चूची को सहला रहा था और बायाँ हाथ से उसकी चूत को जो कि मेरे लण्ड के नीचे थी।
कुछ देर तक यूँ ही करने के बाद मैंने उसके टॉप को खोल दिया। अब स्वाति भी मेरे होंठ चूस रही थी। तभी मुझे कुछ आवाज सुनाई दी, मैं झटपट उठा और बाहर निकल आया तो देखा दिव्या रो रही थी।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो अदिति ने कहा- कह रही है कि दादी के पास जाना है शादी देखने !
मुझे तो मानो मनचाही मुराद मिल गई, मैंने कहा- ठीक है, जाओ इसे दादी के पास ले जाओ।
अदिति दिव्या को लेकर चली गई। मैंने दरवाजा बन्द किया और स्वाति के कमरे में आ गया स्वाति अभी भी उसी तरह बिना टॉप के रजाई के अन्दर लेटी हुई थी। मैं भी रजाई के अन्दर गया और उसके चुचूक को चुसना शुरू कर दिया। उसका एक हाथ मेरे सर पर आ गया और वो मेरे बालों को सहलाने लगी। अब मैं बारी बारी से उसकी दोनों चूचियों को चूसने लगा, ना जाने कौन सा आनन्द आ रहा था, मेरे लण्ड से कुछ चिपचिपा सा निकल रहा था।
मैंने उसके स्कर्ट को नीचे सरका कर निकाल दिया फिर पैंटी को भी उतार दिया। अब वो पूरी तरह नंगी थी। हालाँकि कमरे में कम रोशनी के कारण मैं उसके बदन को देख नहीं पाया पर उसके सारे शरीर को टटोल रहा था।
मैंने उसकी चूची को चूसना छोड़ा और उसकी बुर को जीभ से सहलाने लगा। उसने दोनों हाथों से मेरे सिर को थाम लिया और मेरे बालों में उंगलियाँ फिराने लगी।
मैं धीरे धीरे उसकी बुर को चाटे जा रहा था। मैंने अपना शर्ट और पैंट खोला और अण्डरवीयर भी उतार दिया अब मैं भी पूरी तरह से नंगा था।
मैं उल्टा लेट गया और अपना लण्ड उसके मुँह में दे दिया। दो सेकण्ड मुँह में रखने के बाद उसे उबकाई आने लगी तो मैंने अपना लण्ड उसके मुँह से निकाल कर उसके हाथों में थमा दिया।
पहले तो उसने उसे पकड़ने में ना-नुकुर किया पर कुछ देर बाद वो मेरा लण्ड पकड़कर आगे-पीछे करने लगी। मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से सहला रहा था।
कुछ देर के बाद मैं उसके ऊपर आ गया और उसको बोला- अपनी टाँगों को थोड़ा सा फैला !
तो उसने फैलाया मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर रखकर दबा दिया, वो दर्द से कराह उठी और मुझे अपने ऊपर से धकेलने लगी। मैंने लण्ड उसकी चूत से हटाया और उसके ऊपर ही लेटकर उसकी चूचियों को चूसने लगा। जब वो थोड़ा रिलैक्स हुई तो मैंने उसे कहा- पहली बार थोड़ा दर्द होता है, तुझे बरदाश्त करना होगा।
तो उसने कहा- ठीक है।
मैंने फिर से उसकी चूत पर अपन लण्ड सटाया और धीरे से दबाना शुरु कर दिया। वो अपने होठों को दांतों से दबाये दर्द पीने की कोशिश कर रही थी। मैंने जोर से अपने लण्ड को दबाया तो लण्ड उसकी चूत को चीरता हुआ उसके अन्दर चला गया, उसके मुँह से दबी दबी सी आह निकल पड़ी। मुझे लगा जैसे मेरा लण्ड किसी ने छिल दिया हो, इतने जोर का दर्द हुआ कि मन किया लण्ड को उसकी चूत से निकाल लूँ।
पर मैं यह मौका गवाँना नहीं चाहता था, कुछ देर वैसे ही उसके ऊपर लेटे रहने के बाद मैंने अपने लण्ड को उसकी बुर में धीरे-धीरे ऊपर नीचे करना शुरु कर दिया।
धीरे-धीरे मेरी स्पीड बढ़ती चली गई। एकाएक हम दोनों एक साथ ही एक दूसरे से जोर से चिपक गये। हम दोनों ही की आँखें बन्द हो गई और एक आनन्द की धार सी फ़ूट पड़ी। कुछ देर बाद हम दोनों एक दूसरे से अलग हुए। स्वाति ने मेरे लब चूम लिए और उठकर खड़ी हो गई। उसका नंगा जिस्म मेरे सामने था, कसी-सख्त चूचियाँ, चूत पर हल्के रेशमी बाल, हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने, बिछावन पर थोड़ा लाल लाल खून लगा हुआ था।
स्वाति ने उसे बाथरूम में साफ किया। उस रात हमने एक बार चुदाई और की।