Sunday, August 2, 2015

बड़ी बहन का योनी भेदन

हैल्लो दोस्तो मेरा नाम रॉकी है और में जबलपुर का रहने वाला हूँ.. मेरे घर में मेरे पिताजी, माताजी, मेरी बड़ी बहन गायत्री और में रहता हूँ. गायत्री और में बचपन से ही एक दूसरे के बहुत ही करीब है और हम दोनों में कभी भी सेक्स नहीं हुआ था लेकिन हम दोनों को एक दूसरे से चिपकना मस्ती करना बड़ा ही पसंद था और हम हमेशा ही अपने कॉलेज से घर पर आने के बाद साथ में ही रहते थे. आप ऐसा कह सकते है कि अलग नहाने और कॉलेज की क्लास टाईम के अलावा हम हमेशा करीब होते है. गायत्री को मेरे सारे राज़ पता है और मुझे उसके.. हमारा रिश्ता ऐसा था कि हमे कभी एक दूसरे के अलावा और किसी भी दोस्त की ज़रूरत ही नहीं पड़ी और हम हमेशा ही एक दूसरे के बहुत करीब थे. गायत्री मेरे साथ अधिकतर बिना बाह की कमीज़, सलवार में ही रहती थी और हम चिपककर बात करते रहते है और मुझे उससे चिपकना बहुत अच्छा लगता है. इससे उसके बदन की महक और उसकी सांसो की महक मुझे आती है और उसके कंघो से लेकर हाथ तक मुझे उसे छूना बहुत अच्छा लगता.
तो दोस्तों अब में उस किस्से पर आता हूँ.. जहाँ से हमारी ज़िंदगी ने बदलाव लिया और हमने जहाँ से शारीरिक सुख लेना शुरू किया. यह बात पिछले महीने की है और हमारे घर पर सिर्फ़ गायत्री और में ही था.. हमारे माता, पिता दोनों ही किसी शादी में दो दिन के लिए बाहर गये थे. गायत्री और मुझे कहीं भी किसी भी शादी में जाना पहले से ही पसंद नहीं था और हमे वहां पर कोई भी अच्छा नहीं लगता था तो गायत्री और मैंने घर पर ही रहने का फैसला लिया.. पहले हमने खाना खाया और फिर हम गेम खेलने बैठ गये.. गेम के बीच ही गायत्री मुझे बार बार छेड़ती जाती.. कभी मेरे हाथ पर चिकोटी देती तो कभी मेरे गालो को खींचती या फिर कभी मेरे कान पकड़ती तो मुझे भी अब कुछ देर बाद शरारत सूझने लगी और में गायत्री के पीछे चुपके से जाकर अपनी दोनों हाथ की उंगलियों से गायत्री के पेट पर दबाता और वो झट से उछलती और इस तरह हमारा एक दूसरे के साथ गुदगुदी करना शुरू हुआ.
हमने एक दूसरे को गुदगुदी करते करते एक दूसरे को अपनी बाहों में भरकर गुदगुदी करने लगे.. में गायत्री के बदन को पूरा उसके कपड़ो के ऊपर से पकड़कर महसूस कर रहा था और उसका बदन मेरे बदन से ऐसे चिपका हुआ था कि में उसके बदन की पूरी गरमी को एंजाय कर रहा था और हम दोनों अपनी ही मस्ती में खोते जा रहे थे.
फिर एक दूसरे की बाहों में मस्ती करते करते हम रूम में पहुंचकर बेड पर गिर पड़े और हम एक दूसरे के कपड़ो के अंदर हाथ डालकर गुदगुदी करने लगे और वो मेरी पेंट के अंदर हाथ डालकर मेरे लंड पर गुदगुदी करने लगी तो मुझे भी शरारत सूझी और मैंने उसका टॉप उसकी कमर से ऊपर चड़ा दिया और मैंने देखा कि गायत्री ने काली कलर की ब्रा पहनी हुई थी.. में गायत्री की नेवेल को फैलाकर गायत्री की नेवेल पर बीच में किस करने लगा तो गायत्री अब मेरे बालों के साथ खेलती जा रही थी और हम दोनों को इस खेल में बड़ा मज़ा आ रहा था और फिर मैंने गायत्री की सलवार पूरी उतार दिया था और अब गायत्री सिर्फ़ ब्रा और पजामे में बिस्तर पर लेटी थी तो मैंने उससे कहा कि क्यों ना मम्मी, पापा जो करते है.. वो हम भी करे और इस पर गायत्री ने पूछा कि वो लोग क्या करते है तो मैंने गायत्री को कहा कि जो में करता हूँ. तुम बस उसमे मेरा साथ देना.. तुम्हे बड़ा मज़ा आएगा.
फिर उसके लिए उसने खुशी से हाँ कर दी और अब मैंने गायत्री को आराम से लेटने के लिए कहा और उसके दोनों हाथों को फैला दिया और में गायत्री के कंधे को पकड़कर अपना पैर उसके फैले हुए पैरों के बीच में डालकर उसकी छाती और कंधो पर किस करने लगा और में बीच बीच में गायत्री के बदन को किस भी करता जा रहा था. फिर में गायत्री के होंठो पर भी किस करने लगा और मैंने गायत्री का थोड़ा मुहं खुलवाया और अपनी जीभ गायत्री के मुहं में डालकर गायत्री के मुहं को अंदर से चूस रहा था और मेरे ऐसा करने से हम दोनों को बड़ा मज़ा आ रहा था.
फिर मैंने अपना एक हाथ उसके पीछे ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोलकर धीरे धीरे से उसकी ब्रा भी उतार दी और में गायत्री के बूब्स को देखकर मदहोश होने लगा और धीरे धीरे बूब्स को दबाने लगा और में गायत्री के होंठ को किस भी करता जा रहा था.. में गायत्री की जीभ को अपने मुहं में सक करने लगा.. ऐसा जैसे में उसकी जीभ का रस पी रहा हूँ.
फिर धीरे धीरे अब गायत्री की साँसे तेज़ हो रही थी और वो मेरे किस का और मेरे हाथों के छूने का जवाब दे रही थी और में बीच बीच में गायत्री के गाल पर किस करता.. उसकी गर्दन पर किस करता और में उसे किस करते करते उसकी छाती तक आ गया तो में गायत्री के भूरे कलर के निप्पल को उंगलियों में लेकर दबाने लगा.. गायत्री के निप्पल बहुत कड़क थे और वो मेरी इस हरकत से मोन करने लगी थी और मैंने गायत्री के निप्पल को चूसना शुरू कर दिया और बारी बारी से उसके निप्पल को मुहं में लेकर चूसता तो गायत्री अपनी मस्ती में मस्त होकर मोन करती जा रही थी.. इससे मुझे और भी मज़ा आ रहा था और कोई भी घर में मौजूद नहीं था तो मुझे किसी बात का डर भी नहीं था और हम बेफ़िक्र होकर मस्ती कर रहे थे.
फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और गायत्री के ऊपर लेट गया और उसके ऊपर के बदन पर चुम्मा चाटी करता रहा और जगह जगह मैंने उसके बदन पर काटा भी जिससे वो आअहह उह्ह्ह की आवाज़ में चिल्लाती. फिर में अब थोड़ा नीचे जाकर उसका पैर चूमने लगा और उसकी नाभि में उंगली डालकर खेलने लगा और वो आराम से बिस्तर पर लेटकर मज़े लेती जा रही थी तो मैंने इसी दौरान उसके पजामे का नाड़ा ढीला कर दिया और धीरे से उसका पजामा और उसकी पेंटी को उतार कर उससे अलग कर दिया और अब हम दोनों ही बिस्तर पर नंगे लेटे हुए थे. फिर में नीचे गायत्री के पैरों के बीच में आ गया और में गायत्री की चूत पर हाथ घुमाने लगा.. दोस्तों गायत्री और मैंने कभी अपने अन्दर के हिस्सों से बाल साफ नहीं किए थे तो हमारे अंगो पर झांट उगे हुए थे लेकिन इसके बावजूद गायत्री की चूत मुझे आमंत्रित कर रही थी.. उसकी चूत पूरी तरह से गीली थी और उस में से महक आ रही थी और में गायत्री की चूत की झांटो को थोड़ा हटाकर उसकी चूत के गुलाबी हिस्से को चाटने लगा.. वहाँ पर एक छोटा दाना था.. तो में उसे उंगली से सहलाने लगा.. जिसकी वजह से गायत्री बहुत गरम होकर पैर मारने लगी. दोस्तों में एक और बात बता दूँ कि हमे सेक्स का ज्यादा अनुभव नहीं था. हम वही कर रहे थे.. जो हमे अच्छा लग रहा था.
फिर में गायत्री की चूत को थोड़ा फैलाकर उसकी चूत के अंदर भी चाटने की कोशिश कर रहा था और मेरी जीभ गायत्री की चूत की जड़ से भी टकराई और में चूत के दाने को अपने मुहं में लेकर बड़े मज़े से चूसने लगा लेकिन गायत्री तो अपनी ही दुनिया में मज़े में थी. वो पागलों की तरह मोन कर रही थी अह्ह्ह उह्ह्ह रॉकी तुम यह क्या कर रहे हो? सिसकियाँ लेती हुई चिल्लाती जा रही थी.
फिर में अब सीधा उसके ऊपर लेट गया और अपना एक हाथ नीचे ले जाकर अपने लंड को गायत्री की चूत के छेद पर सेट किया और में एक हाथ से अपने लंड को पकड़कर गायत्री की चूत पर दबाने लगा लेकिन उसकी चूत बहुत टाईट थी तो मेरा लंड इधर उधर हो रहा था तो में लंड को गायत्री के मुहं के पास लाया और अपना लंड उसके मुहं के पास ले जाकर मुहं में डाल दिया और उससे लंड को गीला करने को कहा तो गायत्री ने मेरा लंड झट से मुहं में ले लिया और वो उसे अपनी जीभ से चाटकर गीला कर रही थी और वो बड़े मज़े से मेरे लंड को चूस रही थी.
फिर मैंने जब अपना लंड उसके मुहं से बाहर निकाला तो गायत्री ने कहा कि मेरे लंड का स्वाद नमकीन है और उसे मेरे मोटे लंबे लंड को चाटकर बहुत मज़ा आया और फिर मैंने सही मौका देखकर अपना खड़ा हुआ कड़क लंड गायत्री की चूत पर रखा और मैंने अपने हाथ और शरीर का पूरा दम लगाकर एक ज़ोर का झटका दिया तो मेरा आधा लंड गायत्री की चूत को चीरता हुआ घुस गया और इसकी वजह से गायत्री ज़ोर से चीखने चिल्लाने लगी.. वो मेरे लंड को अपनी चूत में नहीं सह सकी.
फिर मैंने झट से गायत्री के मुहं पर अपना मुहं रख दिया और उसके होंठो को चूमने लगा और उसके बूब्स को सहलाने लगा.. गायत्री की चीख मेरे मुहं में समाए जा रही थी तो कुछ देर बाद जब वो थोड़ी शांत हुई तो मैंने ऐसा ही एक और दमदार झटका लगाकर अपना पूरा का पूरा लंड गायत्री की चूत में घुसा दिया लेकिन गायत्री के आँसू बाहर निकल रहे थे और वो मेरी पीठ पर मुक्का मारती जा रही थी. तो में अब अपना लंड उसकी चूत के अंदर ही घुसाए उसे हग कर रहा था और उसके बदन को सहला रहा था.. तभी थोड़ी देर के बाद गायत्री एकदम शांत हुई और मेरे हाथ फेरने से उसका बदन फिर से उत्तेजित हो गया.. में उसके नंगी पीठ पर हाथ फैरता, कभी उसकी कमर पर हाथ फैरता और बीच में प्यार से उसके बूब्स भी दबाता.. जिससे उसका दर्द मज़े में बदल गया और अब में उसकी चूत में अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर अंदर बाहर करने लगा लेकिन गायत्री की चूत बहुत टाईट थी.. जिसकी वजह से मुझे मेरे लंड पर उसकी चूत की रगड़ महसूस हो रही थी और मुझे ऐसा लग रहा था.. जैसे गायत्री की चूत मेरे लंड को चूस रही हो और में गायत्री की चूत को चोदता जा रहा था.
मैंने गायत्री को मजबूती से पकड़ रखा था और बार बार उसके होंठो को किस करता जा रहा था और उसके मुहं के अंदर चाट रहा था.. अपने बदन से उसका गरम जोश से भरा बदन रगड़ते हुए महसूस कर रहा था. फिर गायत्री भी गरम होकर मेरी पीठ पर अपने नाखून गड़ा रही थी.. जिससे मेरे बदन पर निशान भी हो गये लेकिन में फिर भी लगातार गायत्री की चूत में अपने लंड को लगातार अंदर बाहर करता जा रहा था.
फिर उसके कुछ देर बाद मैंने अपनी चुदाई की रफ़्तार बड़ा डाली और मुझे महसूस हुआ कि गायत्री का बदन अकड़ रहा था और वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी.. चिल्लाते ही उसने अपना पानी छोड़ दिया तो मुझे भी लगा जैसे में भी झड़ने वाला हूँ लेकिन में लगातार धक्के दिए जा रहा था और उसका पानी निकलने के तुरंत बाद ही मेरा बांध भी टूट गया और मेरा भी गरम गरम वीर्य निकलने लगा और मैंने गायत्री की चूत के अंदर ही अपना पानी छोड़ दिया और गायत्री की चूत में हम दोनों का पानी मिल गया. हम ज़ोर ज़ोर से साँसे ले रहे थे और हम दोनों का बदन पसीने से भीगा हुआ था.. मेरा लंड भी सिकुड़कर गायत्री की चूत के बाहर निकल गया. में सीधा होकर उसके पास में लेट गया.. थकावट के कारण हम एक दूसरे से बात भी नहीं कर पा रहे थे और हम वैसे ही नंगे एक दूसरे की बाहों में सो गये. उस टाईम हमे ग़ज़ब की नींद आई और जब हम उठे तो हमने देखा कि बेड शीट पर सूखा हुआ खून और वीर्य के निशान है तो हम बहुत डर गये और हम उठकर सीधे बाथरूम में नहाने चले गये.
फिर हम एक साथ में बाहर आए कपड़े पहने वो बेडशीट को लेकर मशीन में धोने डाल दिया और दवाई की दुकान से दर्द की दवाई लेकर मैंने गायत्री को दी और गर्भनिरोधक गोली लाकर दी.. जिससे गायत्री प्रेग्नेंट ना हो पाए. उसके बाद हमारे माता, पिता के आने तक हमने चुदाई का सिलसिला शुरू ही रखा और माता, पिता आने के बाद हम नॉर्मल व्यहवार करने लगे भाई बहन की तरह. पापा मम्मी के सोने के बाद रात में हमारी चुदाई का प्रोग्राम होता रहता है.. हमने चुदाई के हर तरीके को आजमाया और चुदाई का मज़ा लिया.

Monday, July 27, 2015

दीदी की महक

मैं शहर से दूर फॉर्म हाउस में रहता हूँ। मेरे परिवार में छह लोग हैं। मैं सबसे छोटा हूँ.. मेरी दो बहनें और एक भाई है.. मेरी दोनों बहनें मुझसे बड़ी हैं
मैं जब छोटा था.. तब से मैं अपनी बड़ी दीदी को देखता रहता था। मैं जब स्कूल में पढ़ता था.. तब एक बार मैंने अपनी दीदी को कपड़े बदलते हुए देखा था.. उस वक्त वो टॉपलैस थीं और उस वक्त उनके बड़े-बड़े मम्मे हवा में तने हुए थे.. 32 इन्च नाप के रहे होंगे.. उस समय वो फर्स्ट इयर में पढ़ती थीं और बस तब से मैं उसको देखता रहता था।
उनके चूतड़ इतने मस्त उठे हुए थे कि क्या बताऊँ..
मैं दीदी को याद करके मुठ मारता था और मैंने सोच रखा था कि उनको एक दिन मैं ज़रूर चोदूँगा.. पर कभी मौका नहीं मिला..
उसे मैं हमेशा खा जाने वाली नजर से घूरता रहता था और उनके मस्त उठे हुए मम्मों को देखता रहता था।
वक्त गुजरता गया और एक दिन उनकी शादी हो गई..
दीदी की शादी के 4 महीने बाद मेरे घर वाले किसी के शादी के लिए एक हफ्ते के लिए बाहर जाना था। इस कारण से मुझे घर में अकेला हो जाना था.. इसलिए दीदी घर आ गई थीं।
उनके आते ही घर वाले चले गए.. मैंने सोच लिया कि अब एक हफ्ते में मैं दीदी को किसी भी हालत में चोद कर रहूँगा और मैंने प्लान बना लिया।
सवेरे जब मैं नहाने गया.. तो मैं जानबूझ कर अपने कपड़े नहीं ले गया और नहाने के बाद सिर्फ़ गमछा पहन कर बाहर आया और दीदी को कहा- मेरे कपड़े कहाँ हैं?
तब दीदी मेरे कपड़े देखने लगीं.. तो मैंने लण्ड को गमछे के छेद से बाहर निकाला.. मैंने पहले ही गमछे में छेद कर रखा था। जब दीदी ने मेरी अंडरवियर मुझे दी.. तो मैंने कहा- इसमें तो चींटी लगी हैं।
मैं चींटी निकालने लगा.. तब मेरा 7″ का तना हुआ लण्ड दीदी को सलाम कर रहा था। दीदी ने उसको थोड़ी नजर भर कर देखा और शरमा के भाग गईं।
बाद में दीदी जब नहाने जा रही थीं.. तो मैंने मेरे मोबाइल से अपने ही घर के लैंड लाइन वाले फोन पर घंटी की.. और दीदी को आवाज लगा दी- प्लीज़ फोन उठा लो.. दीदी जब फोन सुनने गईं.. तब मैं बाथरूम में जाकर उनके सारे कपड़े ले आया।
जब दीदी नहा रही थीं.. तब मैंने बाथरूम के दरवाजे की दरार से उन्हें नहाते हुए देख रहा था।
दीदी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए.. सिर्फ़ अंडरवियर बाकी था। दीदी के सख्त मम्मे.. बड़े ही मस्त.. बड़े-बड़े तने हुए थे और अंगूर जैसे निप्पल थे।
दीदी नहाने लगीं.. जब दीदी ने सब जगह साबुने लगा लिया.. तो अंडरवियर में हाथ डाल कर चूत में साबुन लगाया।
दीदी ने शायद कभी चूत की शेविंग नहीं की थी.. उनकी झांटें साफ नज़र आ रही थीं।
फिर वे पानी डालकर नहाने लगीं और थोड़ी देर बाद दीदी ने अंडरवियर में हाथ डाल लिया और चूत को सहलाने लगींस।
मैं समझ गया कि दीदी अब गर्म हो गई हैं।
वे चूत को सहलाते-सहलाते हाँफने लगीं तब उनके मम्मे भी अपने रंग में आ गए और निप्पल तन कर दूध देने को तैयार हो उठे।
उनके मम्मे भी पूरे 37-38 इन्च के हो गए थे और थोड़ी देर बाद दीदी ने अपनी उंगली निकालीं और उस पर लगा हुआ चूत का रस चाट गईं।
इतना सब होने पर भी दीदी ने चड्डी नहीं निकाली।
नहाने के बाद गमछे से अपना तन पोंछने लगीं.. तब मैं वहाँ से चला गया।
बाद में दीदी ने मुझे आवाज़ दी.. मैं गया.. तो दीदी बोलीं- मेरे कपड़े दे दो.. शायद मैं बाहर भूल आई हूँ..
मैं कपड़े देखने का नाटक करने लगा.. और मैंने कहा- मुझे नहीं मिल रहे हैं..
तो दीदी बोलीं- मेरे पास कपड़े नहीं है.. पहले सारे कपड़े भिगो दिए.. अब क्या करूँ?
मैंने कहा- गमछा लपेट कर आ जाओ न..
तो दीदी बाहर निकलीं.. दीदी का पूरा बदन गमछे से साफ नज़र आ रहा था।
मैं दीदी को ही देख रहा था। गमछा भीग जाने के कारण पूरा पारदर्शी हो गया था था।
दीदी बोलीं- मेरे कपड़े कहाँ हैं।
मैं दीदी के मम्मे देख रहा था।
वो अभी भी अपने पूरे रंग में थे.. फिर दीदी कमरे में गईं.. मैं भी दीदी के पीछे-पीछे चला गया।
दीदी बोलीं- तुम यहाँ क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- आप को देख रहा हूँ।
तो दीदी ने मुझे गुस्से से कहा- मैं तेरी बहन हूँ।
उन्होंने मुझे एक ज़ोर का तमाचा मेरे गाल पर मार दिया और कमरे के बाहर निकाल दिया।
बाद में मैं दीदी से नज़र नहीं मिला पा रहा था।
उनके साथ बात भी नहीं कर रहा था।
दो दिन बाद दीदी ने कहा- मुझे कार चलानी सीखनी है।
मैंने कहा- मैं नहीं सिखाऊँगा।
तब दीदी मेरे पास आईं और मुझे समझाने लगीं- ये बात ग़लत है.. मैं तेरी बहन हूँ।
मेरे दिमाग में नया ही ख्याल आया और मैंने कहा- ठीक है।
मैं दीदी को गाड़ी सिखाने को तैयार हो गया और हम लोग खाली रोड पर गाड़ी ले गए।
वो रोड अच्छा था और दोपहर होने कारण वहाँ कोई ट्रैफिक भी नहीं था।
मैंने उनके साथ जाने से पहले ही मेरी अंडरवियर बाथरूम में निकाल दी थी। अब मैंने दीदी को ड्राइविंग सीट पर बैठाया और मैं दीदी के बगल वाली सीट पर बैठ गया।
मैंने दीदी को गाड़ी चलाने को कहा.. तो दीदी ने एकदम से तेज भगा दी।
दीदी एकदम से डर गईं और मैंने हैण्ड ब्रेक लगा दिया।
दीदी ने कहा- ये मेरे से नहीं होगा।
तो मैंने दीदी से कहा- फिर से ट्राई करो न..
फिर से दीदी ने वैसे ही किया.. तो दीदी बोलीं- रहने दो.. मेरे से नहीं होगा।
फिर मैंने दीदी को मेरी सीट पर बैठाया और ड्राइविंग सीट पर मैं आ गया।
दीदी से कहा- मैं कैसे चलाता हूँ.. वो देखो..
मैं गाड़ी चलाने लगा और साथ उनको समझाने लगा।
कुछ दूर जाने के बाद मैंने दीदी से कहा- अब आप चलाइए।
दीदी नहीं मानी.. तो मैंने कहा- एक काम करते हैं मैं यहीं पर ही बैठा हूँ.. और आप मेरे आगे बैठ जाओ.. मैंने पीछे से आपको बताता रहूँगा।
तो दीदी ने कहा- हाँ, यह ठीक है।
दीदी ने मेरी तरफ आने के लिए जब गेट खोला.. तो मैंने मेरे पैन्ट की चैन खोल दी.. और लण्ड को बाहर निकाल कर शर्ट से छुपा दिया।
दीदी ने आज सलवार-कुरता पहना था।
दीदी जब आईं तो मैंने उनको अपनी गोद में बैठा लिया और उनके पीछे होते-होते मैंने दीदी का कुरता ऊपर कर दिया और अपनी शर्ट को भी ऊपर कर दिया।
अब जैसे ही दीदी मेरी गोद में बैठीं.. तो मेरा लण्ड उनकी गाण्ड को टच होने लगा।
तो दीदी ने पीछे मुड़कर देखा.. पर कुछ कहा नहीं। उनको लगा कि मेरा लण्ड पैन्ट में होगा।
मैंने मेरे पैर उनके पैर के नीचे से ऊपर ले लिए ताकि वो हिल ना सकें।
मुझे उनके चूतड़ों से रगड़ने का सुख मिलने लगा जिससे मेरे लौड़े में और तनाव आ गया।
मैंने गाड़ी स्टार्ट की और चलाने लगा। मेरा लण्ड खड़ा होते-होते उनकी गाण्ड के छेद को टच होने लगा था।
मेरा लवड़ा पैन्ट से बाहर होने के कारण आराम से उनकी गाण्ड को सहला रहा था।
दीदी कुछ नहीं बोलीं.. बोलतीं.. तो भी क्या बोलतीं..
बाद में मैंने गाड़ी का स्टेयरिंग दीदी के हाथ में दे दिया और कहा- अब आप चलाइए।
मैंने अपने दोनों हाथ उनकी जाँघों पर रख लिए और धीरे-धीरे सहलाने लगा।
फिर धीरे से रफ़्तार बढ़ाना शुरू किया। अब दीदी से गाड़ी कंट्रोल नहीं हुई.. तो मैंने एकदम से ब्रेक मारा और दोनों हाथ जानबूझ कर दीदी के मम्मों पर रख दिए और मम्मों को दबा दिया।
ब्रेक लगने से दीदी एकदम से उठ सी गई थीं.. जिससे मेरा लण्ड अब तक दीदी की चूत को टच करने लगता।
तब दीदी ने कहा- अगर तुम ब्रेक नहीं मारते तो हम रोड के नीचे चले जाते।
मैंने कहा- हाँ..
दीदी के बोलने के पहले ही ब्रा के ऊपर से ही निप्पलों को ज़ोर से दबा दिया और छोड़ दिया।
तब दीदी ने सिसकारी भरी थी.. पर दीदी ने कुछ नहीं कहा। मेरा लण्ड अभी भी उनके चूतड़ों से चिपका हुआ था।
फिर दीदी ने कहा- चलो.. अब घर चलते हैं।
तो मैंने दीदी से कहा- आप गाड़ी चलाते रहो और हम वापिस चलते हैं।
दीदी नहीं मान रही थीं.. फिर भी जब मैंने बहुत कहा- डरती रहोगी तो सीखोगी कैसे?
तो वे मान गईं.. अब दीदी वैसे ही बैठी रहीं.. मैंने गाड़ी टर्न की.. और दीदी को चलाने दी।
मैंने अपना हाथ दीदी के पैरों पर रख लिया और सहलाने लग गया।
मैं धीरे-धीरे कमर को भी आगे-पीछे करने लगा.. पैर सहलाते हुए मैं उनकी जाँघ के ऊपरी हिस्से तक आ गया था.. बिल्कुल चूत के पास.. पर मेरी चूत को हाथ लगाने की हिम्मत नहीं हुई।
अब तक दीदी गर्म होना चालू हो गई थीं।
जब हम घर पहुँचने वाले थे.. तब मैंने कपड़े के ऊपर से ही मैंने चूत को ज़ोर-ज़ोर से हाथ को सहलाया।
तभी हम घर पहुँच गए.. तो दीदी कुछ भी ना बोलते सीधे भागते हुए बाथरूम चली गईं और खड़े-खड़े चूत में उंगली डाल कर पानी निकालने लगीं और चूत का सफेद पानी निकाल कर चाटने लगीं।
उसके बाद मैंने सोच लिया कि दीदी अब मुझे खुद चोदने के लिए बोलेगीं.. तभी मैं इनको चोदूँगा।
रात को दीदी ने खाना बनाया और हम खाना ख़ाकर सो गए। उस रात को कुछ नहीं हुआ.. सबेरे जब दीदी सोकर उठीं और झाड़ू लगाने मेरे कमरे में आने लगीं।
मैंने उनके आने की आहट पा कर अपना पैन्ट उतार दिया और लण्ड को खड़ा करके सोने का नाटक करने लगा।
मैंने अपने मुँह पर कंबल ले लिया जिसमें मैंने एक छेद ढूँढ कर रख लिया था.. उस छेद से मैं उन्हें देख रहा था कि दीदी क्या करती हैं।
जब वो कमरे में आईं और उन्होंने लाइट ऑन की तो उनकी नज़र मेरे तने हुए लण्ड पर पड़ी। मेरा लण्ड उनको देख कर पूरा तन चुका था और उनको सलामी दे रहा था।
एक मिनट देखने के बाद वो कमरे से जाने लगीं.. थोड़ी दूर जाने के बाद फिर से वापस आईं और मेरी तरफ़ देखा। फिर वहीं पर खड़ी होकर मेरे लण्ड को देखने लगीं.. उनको लगा कि मैं सोया हूँ।
थोड़ी देर बाद वो मेरे लण्ड को पास से देखने लगीं।
वो जैसे ही पास आने को हुईं.. मेरा लण्ड और तना.. कुछ देर देखने के बाद उन्होंने झाड़ू लगाना शुरु किया और झाड़ू लगाने के बाद फिर से मेरा खड़ा औजार देखने लगीं..
तो मैंने मेरा हाथ लण्ड के पास ले जाकर मेरे लण्ड का टोपे को नीचे कर दिया और लण्ड खड़ा करके उनको दिखाने लगा। मेरा लण्ड पूरा लाल हो गया था। लाल-लाल लण्ड देख कर उनके मुँह से एक आहनिकली..
फिर लण्ड को मैंने आगे-पीछे करना शुरू किया.. तो उनको शक हुआ कि मैं जाग रहा हूँ.. और वो उधर से चली गईं।
बाद में मैं उठा और ब्रश करके जब चाय पी रहा था.. तब दीदी से पूछा- आपने झाड़ू लगाई क्या?
तो दीदी बोलीं- हाँ..
मेरे कमरे में भी लगाई क्या..?’
हाँ.. लगाई.. क्यों?’
नहीं.. बस ऐसे ही..
दीदी बोलीं- रात को बहुत गर्मी थी क्या?
हाँ दीदी.. रात को बहुत गर्म था.. दीदी आपको कैसा लग रहा था?’
दीदी बोलीं- हाँ कल बहुत गर्म था..
फिर मैं नहा कर तैयार हो गया.. बाद में दीदी भी नहाने चली गईं.. तो मैं दीदी को नहाते देखने लगा, दीदी पूरी नंगी होकर नहा रही थीं.. पर आज उन्होंने चूत से पानी नहीं निकाला।
नहाने के बाद जब वो बाहर निकलीं.. तो उनके हाथ में पैन्टी-ब्रा था। मतलब आज उन्होंने ब्रा और पैन्टी नहीं पहनी थी।
सिर्फ़ सलवार और कुरता ही पहना हुआ था।
दोस्तो, मुझे मालूम था कि आज दीदी कौन सा सलवार सूट पहनने वाली हैं.. तो मैंने उनके पजामे की गाण्ड तरफ का हिस्सा थोड़ा फाड़ कर रखा था.. पर उनको पता नहीं चला था।
बाद में खाना बनाते और खाते वक्त मैं उनकी चूचियों को ही देख रहा था, उन्होंने आज ओढ़नी भी नहीं ली थी और उनके निप्पल भी साफ नज़र आ रहे थे।
आज वो मेरे ऊपर बहुत मेहरबान दिख रही थीं।
जब दोपहर हुई.. तो मैंने दीदी से कहा- चलो गाड़ी चलाते हैं।
तो आज दीदी तुरंत मान गईं और हम गाड़ी चलाने गए।
दीदी से मैंने कहा- आज हम घर पर ही गार्डन में चलाते हैं..
क्योंकि दोस्तों अगर चूत गर्म होगी तो मुझे रास्ते में चोदना पड़ेगा और आज इस साली दीदी को मैं आज किसी भी हालत में चोद कर चूत का रस पीना चाहता था।
मैंने आज शर्ट नहीं पहनी थी.. सिर्फ़ बनियान और पैन्ट में ही था.. और नो अंडरवियर..
मेरा फ़ार्म हाउस का गार्डन थोड़ा बड़ा था जिससे हम लोग उधर भी खूब आराम से गाड़ी चला सकते थे।
दीदी बगल की सीट पर बैठ गईं और मैं ड्राइवर की सीट पर.. जब गार्डन में गाड़ी लाकर खड़ी की और दीदी से कहा- अब आप चलाओ।
तो दीदी ने कहा- गार्डन छोटा है और मेरे से ब्रेक नहीं लगे तो?
तो फिर क्या करना है दीदी?’
तो वो शरमा कर बोलीं- कल जैसे बैठे थे.. वैसे ही बैठ कर सिखाओ न..
मैंने कहा- ठीक है..
दीदी जब गेट खोल कर मेरे पास आने लगीं तो मैंने मेरी पैन्ट की चैन खोल कर लण्ड बाहर निकाल लिया और पैन्ट थोड़ा नीचे सरका दिया.. और बनियान को भी ऊपर कर दिया।
जब उन्होंने गेट खोला तो मेरा पूरा तना हुआ लण्ड उनके सामने था.. पर वो कुछ नहीं बोलीं।
उन्होंने बस एक मिनट मेरे तने हुए लण्ड को देखा और मेरे लण्ड के ऊपर बैठ गईं और गाड़ी स्टार्ट करने लगीं।
मैंने थोड़ा उनकी गाण्ड को हिलाया और उनके फटे हुए पजामे से लण्ड को अन्दर कर दिया।
अब मैंने दोनों पैरों को मेरे पैरों में ले लिया।
अब उन्होंने गाड़ी स्टार्ट की और चलाने लगीं.. मैं मेरी सैटिंग जमा रहा था। थोड़ी देर बाद मेरा लण्ड उनकी गाण्ड के छेद से टच हुआ.. फिए मैंने सेकेंड राउंड में ज़ोर से एक्सीलेटर दबा दिया.. गाड़ी तेज हुई और ज़ोर से ब्रेक मारा।
तभी मैंने उनकी कमर पकड़ कर रखी थी.. ब्रेक मारते ही वो उचकीं.. और मेरा आधा लण्ड उनकी गाण्ड में घुस गया।
मैंने ब्रेक इतनी जोर से मारा था कि उनका पूरा ध्यान गाड़ी में था और मेरा लण्ड उनकी गाण्ड में था।
थोड़ी देर बाद फिर से वैसे ही किया और अब पूरा लण्ड उनकी गाण्ड में था.. पर वो कुछ नहीं बोलीं।
थोड़ी देर बाद वो गर्म होने लगीं.. और मैंने गाण्ड ऊपर-नीचे करना स्टार्ट किया.. जैसे ही वो गर्म हुईं.. तो मैंने मेरा लण्ड बाहर निकाल लिया और कहा- चलो बाकी काम घर में करते हैं।
जब हम घर आए तो मैं पूर नंगा हो गया और उनको भी नंगा किया। फिर मैं उनके मम्मे दबाने लगा.. बहुत देर तक मम्मों को ही चूसता रहा और निप्पलों को काटते रहा। फिर चूत को चाटना स्टार्ट किया.. अब वो बहुत गर्म हो चुकी थीं।
बोलीं- अब बस करो और जल्दी से चूत में डालो..
मैं बोला- क्या डालूँ?
वो बोलीं- लण्ड डालो..
मैं समझ गया.. अब वो पूरी गर्म हो उठी हैं।
तो मैं बोला- मेरी कुछ शर्तें हैं मानती हो.. तो मैं डालता हूँ।
वो बोलीं- कैसी शर्त.. मुझे सब मंजूर है..
मेरी पहली शर्त है.. तुम आज के बाद कब भी चुदवाने के लिए ना नहीं कहोगी.. बोलो मंजूर?’
हाँ मंजूर..
ओके.. दूसरी शर्त.. मैं तुम्हें कहीं पर भी चोदूँगा.. तुम नानहीं कहोगी.. बोलो मंजूर?’
हाँ..
तुम अपनी देवरानी को मेरे से चुदवाओगी.. बोलो मंजूर?’
देवरानी को मैं कैसे तैयार करूँगी?’
वो मुझे नहीं मालूम..
मैंने उनकी चूत में उंगली डाली तो बोलीं- ओके बाबा.. ठीक है..।
चौथी शर्त.. तुम्हारे पेट जो बच्चा है अगर लड़की हुई.. तो उसकी सील मैं तोड़ूगा और अगर लड़का हुआ तो तुम्हारी पहली चूत रहेगी.. उसके लिए बोलो मंजूर?’
अच्छा बाबा.. ठीक है.. अब तो डालो..
ओके.. अब मैं आपको चोदूँगा..
फिर मैंने उनकी चूत को इतना चाटा कि आखिरकार वो दो बार झड़ चुकी थीं। फिर मैंने उनकी चूत में लण्ड डाला तो वो तड़फ़ने लगीं.. शायद मेरा लण्ड ज्यादा मोटा था और फिर मैंने उनको दो बार दम से चोदा।
एक बार फिर गाण्ड भी मारी और हम दोनों थक कर सो गए और जब उठे तो रात के 9 बज चुके थे। वो बिस्तर से उठ नहीं पा रही थीं.. क्योंकि उनकी चूत में भयानक दर्द हो रहा था।
फिर रात को हमें खाना खाया और एक बार चोदने को कहा.. जब वो नहीं मानी तो मैं बोला- तुमने वादा किया है।
वो बोलीं- आज नहीं.. प्लीज़..
तो मैं बोला- ओके.. मुँह में ले लो..
तो भी वे नहीं मान रही थीं.. तो मैंने जबरदस्ती उनके मुँह में लण्ड डाल दिया और उनका मुँह चोदने लगा। थोड़ी देर बाद मेरा सारा स्पर्म वो पी गईं और हम सो गए।
सुबह जब वो रोटी बना रही थीं.. तो मैंने नीचे मुँह डाल कर उनकी चूत चाटने लगा.. वो बहुत मना करती रहीं.. पर मैंने आख़िरकार उनका पानी पी ही लिया।
यह मेरी दीदी के साथ मेरी सच्ची कहानी है।
हो सकता है कि आपको बुरा लगे.. पर ये मेरी सच्ची कहानी है..


Tuesday, July 21, 2015

प्यारी बहनिया

मैं विनय.. फिलहाल लुधियाना में पढ़ने के लिए रह रहा हूँ.. मेरी उमर 23 साल है और मैं एम.एससी. के पहले वर्ष में हूँ.. मेरी एक छोटी बहन है उसकी उम्र 20 साल है और उसकी शादी हो चुकी है .. मैं बहुत ही चंचल और हँसमुख लड़का हूँ।।
मैं ब्लू-फ़िल्में बहुत देखता हूँ। जब भी मौका मिलता है.. इंटरनेट पर ग्रेजुयेशन में एक्टिव हुआ और मेरे घर पर कंप्यूटर है। मैं अपने सामानके बारे में बताता हूँ.. जिसके बिना कहानी कभी पूरी नहीं हो सकती। मेरा लंड जिसे मैंने नापा.. तब मुझे पता चला कि मेरा लंड 6″ लंबा और 3″ मोटा है।
जहाँ तक लौड़े के खड़ा होने का सवाल है.. तो यही समझ लीजिए कि लंड की लंबाई और मोटाई लिखते-लिखते ही वो खड़ा हो चुका है।
वैसे भी जब कोई लड़की देख लेता है.. तो उसे चोदने की कल्पना खुद करके गीला तो तुरंत हो जाता है.. फिर बचता है।
मेरा काम उसके रस को हिलंत-विद्यासे बाहर निकालना है.. जो कि अंत में मुझे करना ही पड़ता है।
दोस्तो, यह बात जो मैं आपको बताने जा रहा हूँ.. होली के दिन की बात है।
यह जो कहानी है.. यह मेरे और मेरी बहन के बीच की है.. उससे अचानक से बने शारीरिक सम्बन्ध के बारे में है।
मेरी बहन का नाम शिल्पा है.. । मेरी बहन बला की खूबसूरत हैं, वो ना बहुत पतली हैं.. ना मोटी.. बस यूँ समझ लीजिए कि स्लिम से थोड़ी ज्यादा हैं।
शिल्पा पुरानी हिरोइन करिश्मा कपूर के जैसी दिखती हैं.. मुझे पूरा अंदाज़ा तो नहीं है लेकिन उसके मुम्में करीब 34 इन्च की होंगे.. चूतड़ 36 इन्च के सुडौल और एकदम उठे हुए है.. और भरा हुआ शरीर है.. जब वो चलती है.. तो उसके कूल्हे गजब मटकते हैं।
उसे देख कर लगता है कि लंड पैन्ट के अन्दर खुद ही आत्महत्या कर लेगा और पानी छोड़ देगा।
जब वो नाईटी में होती है.. तो उसकी छोटी सी ब्रा में क़ैद मुम्में आज़ाद होने की तड़फ में हल्के हल्के मचलते और हिलते रहते हैं और कभी-कभी तो बिना ब्रा के पूरी मस्ती में हिलते हैं..
मैंने अक्सर देखा है कि जब वो पोंछा आदि लगाती है या किसी दिन बिना ब्रा के होती हैं तो बार-बार नाईटी ठीक करके अपनी मुम्में एड्जस्ट करती रहती है।
अब मैं मुख्य घटना पर आता हूँ.. चूंकि मेरी बहन भी लुधियाना में ही रहती हैं.. उसकी फैमिली में 3 लोग हैं.. जीजा जी और उसकी एक जवान बहन अनु है.. जो बारहवीं में पढ़ रही है।
जीजा जी कंस्ट्रक्शन कम्पनी में हैं। वो लगभग 28 साल के हैं। वो काम पर 9 बजे निकल जाते हैं और रात को वापिस आने का कोई समय निश्चित नहीं होता है।
किसी भी हाल में रात 8 बजे के बाद और दस बजे तक ही घर वापिस आते हैं।
इसलिए अनु को एक्जाम दिलाने का काम मुझे दिया गया। ऐसे भी होली या किसी त्यौहार में मैं शिल्पा के यहाँ ही एक दो दिनों के लिए चला जाता था। लेकिन इस बार अनु के एक्जाम और होली के कारण मैं दस दिन पहले ही बहन के यहाँ चला गया।
मैं अनु को एक्जाम दिलाने ले जाता.. और उसे छोड़कर घर आ जाता और फिर शाम 4 बजे उसे घर वापस ले आता।
सब कुछ ऐसा ही चल रहा था..
वैसे तो मैं बहुत ब्लू-फिल्म देखता था लेकिन इन सबके बारे में ना सोचता था.. और ना ही मेरे मन में कभी शिल्पा या अनु के बारे में ग़लत ख्याल आते थे.. लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था।
इसी बीच होली आ गई और सबने दिन और रात में खूब होली खेली.. जिसके कारण हम सब थके थे और रात दस बजे सब सोने चले गए। शिल्पा के यहाँ 2 कमरे हैं.. जिसमें एक में अनु अकेली सोती थी.. क्योंकि वो एक्जाम के कारण रात में देर तक पढ़ती थी और दूसरे कमरे में नीचे जीजा बॉबी और शिल्पा और बिस्तर पर मैं अकेला सोता था।
होली के दिन हल्की गर्मी और ठंड दोनों थी..। सब सोने चले गए.. मैं बिस्तर पर लेट गया.. बॉबी नीचे सो गया.. अनु भी सो चुकी थी.. क्योंकि अगले दिन उसका आखिरी एक्जाम था।
शिल्पा इस वक्त भी रसोई में कुछ काम कर रही थी.. तभी बॉबी उठ कर बाथरूम गया और आकर बिस्तर पर लेट गया और मुझसे बो- विनय आज तुम नीचे सो जाओ.. क्योंकि मेरा शरीर बहुत दर्द कर रहा है.. इसलिए नीचे सोने का मन नहीं कर रहा है..
तो मैं बिस्तर से नीचे चला गया। उस वक्त कमरे की सारी लाइट ऑफ थीं.. बिस्तर पर जाते ही बॉबी थकान के कारण और होली में एक-दो पैग का असर होने के कारण तुरंत ही गहरी नींद में सो गया और मैं नीचे सो गया।
मुझे लगा कि शिल्पा ऊपर जीजा के साथ सोएंगी.. लेकिन शिल्पा काम खत्म करके सारी लाइट ऑफ करके बाथरूम गईं और सूट खोल कर नहा कर नाईटी पहन कर कमरे में आईं और रोज़ की तरह नीचे ही सो गईं।
मुझे थोड़ी नींद आ चुकी थी.. उसे नहीं पता था कि बॉबी ऊपर सोया है और मैं भी चादर ओढ़ कर सोया हुआ था। तभी शिल्पा ने अपना एक पैर मेरे ऊपर रख दिया.. तब मेरी नींद टूट गई.. लेकिन मैं कुछ बोल ना सका और लेटा रहा।
फिर वो मेरे से सट कर सोने लगी.. उसकी मुम्में मेरी पीठ में टच हो रही थीं.. और मुझे लग रहा था कि उसने ब्रा नहीं पहनी है। मुझे उसके चिपकने से बहुत नरम और मुलायम सा महसूस हो रहा था और मुम्में भी ज्यादा ही हिल रहे थे]
वो सोने लगी.. उसका पैर मेरे ऊपर था.. तो मुझे लगा कि उसके पैर पर नाईटी नहीं है.. तब मुझे ब्लू-फिल्म के सीन याद आने लगे और मेरा लंड खड़ा होने लगा।
तभी उसने दूसरी ओर करवट ली और सोने लगीं.. लेकिन इतनी देर में उसने मेरा नींद को उड़ा दिया था.. वो भी पूरी थकी हुई थी और उसे भी नींद आने लगी..
कुछ देर बाद मैं उसकी ओर घूम गया और मेरा लंड उसकी गाण्ड में टच करने लगा। वो तो समझ रही थीं कि उसके साथ बॉबी है।
यह सोचकर वो मेरी ओर को और अधिक खिसक आई और तब मेरा लंड उसकी गाण्ड में और भी अच्छे से एड्जस्ट हो गया। अब मैं धीरे-धीरे हिलने लगा.. और करीब 5 मिनट के बाद वो धीरे से बोलीं- कल कर लेना जी.. आज बहुत नींद आ रही है..
लेकिन मैं तो कुछ बोल नहीं सकता था इसलिए चुप रहकर लण्ड हिलाता रहा।
इसके बाद मैं भी गरम होने लगा और मेरे मन ने भी कुछ करने का इरादा कर लिया.. लेकिन फिर मैंने सोचा कि ऐसा क्या करूँ कि उसे पता भी ना चले.. और मैं उसके साथ चुदाई भी कर लूँ।
तब मैं उल्टा होकर सो गया और फिर मैंने सीधे ही उसकी नाईटी ऊपर को कर दी और पेट पर चढ़ा दी.. और उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा.. क्योंकि मुझे पता था कि वो सोचेंगी कि ये सब तो बॉबी कर रहा है
तभी वो फिर से बोलीं- कल कर लेना यार.. अभी नींद आ रही है।
लेकिन मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर उगे झांट के बालों पर चलाने लगा.. तो वो बोलीं- ठीक है.. आज ऊपर से ही कर लो.. मैं सो रही हूँ।
तब मैंने उसे सीधा लिटा दिया और उसके पैर फैला दिए और अपनी एक उंगली उसकी चूत में घुसा दी और आगे-पीछे करने लगा। करीब दस मिनट के बाद वो भी गीली होने लगी.. लेकिन उसे बहुत नींद आ रही थी और इसी कारण से वो साथ नहीं दे रही थीं।
तब मैंने चूत को चाटने का सोचा और दोनों हाथों से चूत फैला कर उसमें अपनी जीभ लगा कर चाटने लगा।
ये जैसे ही उसे समझ में आया.. वो धीरे से बोलीं- आज ये तुम्हें क्या हो गया है.. अभी तक नशा उतरा नहीं है क्या.. तुम अचानक मेरी चूत क्यों चाट रहे होइसे भी कोई चाटता है क्या भला?
शायद बॉबी ने कभी चूत नहीं चाटी थी.. और ना ही शिल्पा ने लंड चूसा था.. लेकिन मैं चुपचाप उसकी चूत चाटे जा रहा था। थोड़ी देर में उसे भी मज़ा आने लगा और वो आधी नींद में मज़ा लेने लगी.. लेकिन अभी भी वो पूरी तरह से सेक्स के लिए तैयार नहीं थी।
लेकिन मैं पूरी तरह से पहली चुदाई के लिए तैयार हो चुका था। करीब पन्द्रह मिनट के बाद मेरा लंड पैन्ट में अकड़ रहा था और मैंने सोचा कि वो जाग जाए इससे पहले उसे चोद कर ऊपर जाकर सो जाऊँगा.. इस कारण से मैंने अब देरी ना करते हुए अपना पैन्ट खोल कर नंगा हो गया.. उसकी चूत तो गीली थी हीमैं उठा और चूत पर लंड रख कर मैंने एक धक्का लगा दिया.. जिससे मेरा लंड उसकी चूत में दो इंच अन्दर चला गया।
वो धीरे-धीरे आआआ.. आआअहह..करने लगी.. क्योंकि उसे लग रहा था कि मैं ऊपर बिस्तर पर सोया हुआ हूँ.. और तेज आवाज से मैं जग सकता हूँ।
चूंकि वो शादीशुदा थी और चूत पूरी तरह से गीली थी इसलिए ना मुझे और ना उसे ज्यादा परेशानी हो रही थी.. लेकिन उसकी चूत में मेरा लवड़ा घुसते ही उसने फुसफुसा कर कहा- आज तुम्हें क्या हो गया है.. तुम्हारा लंड भी आज ज्यादा लंबा और मोटा लग रहा है।
लेकिन मैं चुपचाप उसे चोदने में लगा था.. मेरा लंड तो तैयार बहुत देर से था।
चूंकि यह मेरा पहली बार था.. इसलिए मैं 5 मिनट में ही उसकी चूत में ही झड़ गया.. वैसे वो मुझसे पहले ही झड़ गई थीं.. क्योंकि मैंने बहुत देर उसकी चूत में उंगली की थी.. इसलिए.. वरना शायद वो इतनी जल्दी नहीं झड़तीं।
झड़ जाने के बाद मैं उसके बगल में सो गया और वो बाथरूम जाने के लिए उठी.. तब बॉबी नींद में ही बोला- शिल्पा एक गिलास पानी देना..
तो वो चौंक गई कि ये आवाज़ तो ऊपर बिस्तर से आ रही है.. वे कुछ नहीं बोलीं और जाकर एक गिलास पानी लेकर आईं.. तब तक मैंने अपना पैन्ट पहन लिया था और नीचे ही सोया हुआ था।
तभी उसने अचानक लाइट ऑन कर दी और मुझे नीचे देखा और बॉबी को ऊपर.. तो उसके होश ही उड़ गए।
मैंने अपनी आँखें बंद कर ली थीं।
फिर उसने बॉबी को पानी दिया और लाइट ऑफ करके ऊपर ही लेट गईं।
अब तक बॉबी की नींद कुछ पूरी हो गई थी.. इसलिए वे पानी पीने के बाद शिल्पा को बिस्तर पर चोदने लगा
ऐसा मुझे उसकी आहेंसुनकर लगा।
शिल्पा बोलीं- कल चोद लेना.. अभी विनय नीचे सोया है।
तो बॉबी कहा- वो थक कर सोया हुआ है.. उसे पता भी नहीं चलेगा.. बस तुम चीखना मत..
बॉबी धक्के पर धक्का देने लगे और शिल्पा की आ से आहा..तक की चीख निकलती रही और बॉबी ने अपना पानी गिरा कर ही दम लिया..
ऐसा मुझे लगा..
फिर मैं सो गया.. सुबह मुझे अनु को लेकर 8 बजे जाना था.. तो मैं सुबह उठा और अनु को एक्जाम सेंटर छोड़ने चला गया।
रात की घटना के बाद.. सुबह मैं शिल्पा से नज़रें नहीं मिला पा रहा था।
जब मैं अनु को एक्जाम सेंटर छोड़ कर घर आया.. तो 9.30 बज चुके थे.. शिल्पा ने दरवाजा खोला और खोल कर रसोई में काम करने चली गई।
मैं उससे नज़रें नहीं मिला पा रहा था। मैं कमरे में जाकर लेट गयातभी वो चाय लेकर आई और रख कर चली गई।
मैंने चाय पी ली और कप रखने रसोई में चला गया.. फिर मैंने हिम्मत करके कहा- शिल्पा तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रही हो?
जब वो कुछ नहीं बोलीं.. तो मैंने फिर कहा- रात में जो भी हुआ.. वो ग़लती से हो गया.. तूने मेरे ऊपर जब पैर रखा और तेरी ब्रेस्ट.. मेरी पीठ से सटीं.. तो मेरे अन्दर उफान उठ गया.. मेरी समझ में ही नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ।
तो वो बोलीं- मुझे तो पता ही नहीं था कि वहाँ तुम सोए हुए हो.. लेकिन तुम्हें तो पता था.. और अगर तुम चाहते तो ये ग़लती हमसे नहीं होती..
तो मैंने कहा- हाँ.. मुझसे ग़लती हो गई.. लेकिन मैं क्या करता.. मुझे हर समय सेक्स करने का मन करता रहता है.. और ऐसे में मैं अपने आपको रोक नहीं पाया.. इसलिए प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो ना.. शिल्पा..
तो उसने कुछ नहीं कहा और काम करती रही।
मैं बार-बार सॉरीबोलता रहा.. तो दस मिनट के बाद उसने मुझसे कहा- जो हुआ सो हुआ.. लेकिन अब इस बात का पता किसी को नहीं चलना चाहिए..
तो मैंने वादा किया.. तब उसने कहा- ओके बाबा.. चलो माफ़ किया..
इतना सुनते ही मैं झट से उसके गले से लग गया और उसके गाल पर चुम्बन करते हुए कहा- थैंक्स शिल्पा..
तो वो मेरी इस हरकत पर मुझे देखती ही रह गई और कुछ नहीं बोलीं।
फिर वो रोटी बनाने लगीं और मैं वहीं खड़ा रहा।
फिर हमारे बीच बातचीत होने लगी.. तो कुछ देर बाद मैंने कहा- शिल्पा कल रात के बाद मुझे बड़ा आराम मिला और सुकून भी.. मुझे लग रहा था कि मैं स्वर्ग में पहुँच गया होऊँ.. शिल्पा एक बात बोलूँ?
तो वो बोली- क्या?
मैंने कहा- क्या एक बार हम रात वाला काम फिर से कर सकते हैं?
तो शिल्पा मेरी ओर घूम कर गुस्से में बोलीं- तुम्हारा दिमाग़ तो खराब नहीं हो गया है..
मैने हिम्मत जुटा कर उसे बाहों मे भर लिया वो कुछ कहती उसके पहले ही मैने उसके होठो पर अपने होंठ रख कर चूसने लगा वो अपने आप को छुड़ाने का नाटक कर रही थी पर मैने उसे कस कर पकड़ रखा था मेरे दोनो हाथ उसकी कमर से होते हुये उसके भारी चूतडो पर जम गये थे वो अपने आप को छुड़ाने का नाटक करते हुये बोली रात को इतना सब किया तब भी जी नही भरा मैने कहा उससे तो और प्यास बड़ गई है अब मैं अपने एक हाथ से उसके मुम्में दबाने लगा और दूसरे से नितंभो को दबाने लगा उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। मेरा लंड अब ज़्यादा तन चुका था और शिल्पा को चोदने को बेकरार था वो छुड़ा कर जाने लगी अब मैने उसे पीछे से पकड़ लिया और अपना तना हुआ लंड उसकी गांड पर गड़ा दिया इस समय हम दोनो ने कपड़े पहन रखे थे पर मेरे खड़े लंड का अहसास उसकी मतवाली गांड को हो गया था और अब दोनो हाथो को आगे लाकर उसके दोनो बड़े-बड़े मुम्में दबाने लगा क्या मुम्में थे उसके एकदम टाइट टाइट मेरे हाथो मे समा नही रहे थे। मैं जैसे कुत्ता कुतिया के उपर चढ़ कर धक्के लगाता है वैसे ही शिल्पा को घस्से मारने लगा।
तभी उसने मुझे ज़ोर से 2-3 झापड़ मार दिए।अगले ही पल मैंने उसकी मुम्मों से हाथ हटा लिए.. लेकिन मेरे इस दूध दबाऊ हमले से वो सहम भी गईं.. और शायद उसे मज़ा भी आया था।
मैं फिर भी वहीं खड़ा रहा और वो गुस्सा करने लगी।
मैंने फिर कहा- मैं क्या करूँ.. मेरा लंड रात से सो ही नहीं रहा है.. और मुझे लग रहा है.. कि इसमें से आग निकलने वाली है।
तो उसने कहा- जाओ यहाँ से.. मुझे काम करने दो..
मैंने कहा- प्लीज़ शिल्पा.. सिर्फ एक बार..
उसने मुझे फिर से एक झापड़ मारा.. तो मैं फिर से उसके मुम्मों को पकड़ कर दबाने लगा और झट से अपना पैन्ट खोल कर नीचे कर दिया.. तो मेरा लंड फुनफनाते हुए बाहर आ गया।
अब मैंने कहा- मैं क्या करूँ.. यह बैठ ही नहीं रहा है..
शिल्पा की नज़र मेरे लंड पर पड़ी.. तो उसने आँख बंद करके मुझसे कहा- जाओ यहाँ से.. जाओ अपने कमरे में..
तो मैंने कहा- इसे सुलाने का रास्ता बता दो.. मैं चला जाता हूँ..
तब उसने कहा- बाथरूम जाकर इस पर ठंडा पानी डालो.. तो ये बैठ जाएगा..
तब मैंने अपने पूरे कपड़े रसोई में उसके सामने ही खोल दिए और अपना खड़ा लौड़ा हिलाता हुआ बाथरूम में चला गया और लंड पर पानी डालने लगा।
कुछ देर बाद लंड बैठ गया.. तब मैं नंगा ही रसोई में फिर से आ गया।
शिल्पा ने भी मुझे और मेरे मुरझाए लंड को देख कर कहा- हो गया ना..
तभी मेरा लंड शिल्पा को देख कर फिर फनफना कर खड़ा हो गया और उसे सलामी देने लगा।
मैं तो लौड़े की हरकत से अन्दर से बहुत खुश था और अब शिल्पा ने भी मेरे लंड को खड़ा होते देखा तो उसकी चूत खुजलाने लगी.. लेकिन वो बोलीं- वापिस जाओ फिर वही काम करो..
मैंने भी वही काम 3 बार किया.. लेकिन शिल्पा को देखते ही लंड फिर से खड़ा हो जाता था।
मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था.. तब शिल्पा ने कहा- देखो विनय भैया.. तुम समझ ही नहीं रहे हो.. चलो मैं इसे सुला देती हूँ.. लेकिन वादा करो कि ये बातें किसी से भी नहीं कहोगे..
तो मैंने वादा किया.. तब शिल्पा हाथ धोकर मुझे अपने साथ बाथरूम ले गई और मेरे लंड पर पानी डालने लगी.. लेकिन मेरा लंड मान ही नहीं रहा था।
तब उसने उपने हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया.. मुझे तो लगा कि मेरे अन्दर का ज्वालामुखी फटने वाला है और मेरा लंड लोहे जैसा मजबूत हो गया।
तो उसने कहा- यह तो बहुत हार्ड है..
पानी डालते हुए लंड को हाथ से पकड़ कर आगे-पीछे करने लगी।
मुझे तो बहुत मज़ा आ रहा था.. मेरे मुँह से आआ.. आआहह.. शिल्पा.. ऊऊऊओ.. शिल्पा तुम कितनी अच्छी हो.. आआआ.. आअहह.. और तेज़ करो.. आआ.. आअहह.. ओहह.. निकलता रहा और वो मेरी मुठ्ठ मारती रही.. लेकिन मेरा पानी निकल ही नहीं रहा था।
करीब पन्द्रह मिनट बाद मुझे लगा कि मेरा पानी गिरने वाला है तो मेरे मुँह से ज़ोर-ज़ोर से आआहह.. आआहह.. ऊऊओहह.. शिल्पा.. तुम कितनी अच्छी हो..ये बातें निकल रही थीं।
तभी शिल्पा ने सोचा कि बहुत देर हो गई है.. तो वो मेरे लंड को बहुत ध्यान से देखने लगी.. तभी मेरे लंड ने पिचकारी मारी और सारा पानी शिल्पा के मुँह पर जा गिरा.. वो एक पल के लिए चौंकी.. फिर भी वो तेज़ी से हाथ चलाती रही और उसने मेरा पूरा पानी निकाल दिया।
फिर उसने खड़ी होकर फव्वारा चला दिया.. मैं तो नंगा था ही.. और वो नाईटी पहने ही भीगने लगीं। हम दोनों एक साथ नहाने लगे.. तभी मैंने कहा- बहुत मज़ा आया शिल्पातुम भी अपनी नाईटी खोल दो
मगर उसने कोई जबाव नहीं दिया.. मेरे 2-3 बार बोलने पर उसने अपनी नाईटी खोल दी। अन्दर उसने ब्रा और पैन्टी भी नहीं पहनी थी.. अब शिल्पा मेरे सामने बिल्कुल नंगी हो चुकी थी।
अब हम दोनों नहाने लगे और नहाते नहाते मैं लगातार उसके मुम्में और झांटों वाली चूत देख रहा था.. हल्की रोशनी में भी मुझे अपनी छोटी बहन की नंगी जवानी और मादक बदन साफ़-साफ़ दिख रहा था और मुझे उसके नंगे मुम्मों को पहली बार देख कर मज़ा आ रहा था। मैंने अब तक शिल्पा को सिर्फ़ कपड़ों के ऊपर से देखा था और मुझे पता था की शिल्पा का बदन बहुत सुडौल और भरा हुआ होगा, लेकिन इतनी अच्छी फिगर होगी ये नहीं पता था। शिल्पा के गोल संतरे से मुम्में, पतली सी कमर और गोल-गोल सुंदर से चूतड़ों को देख कर मैं तो जैसे पागल ही हो गया। इस कारण मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और ये उसको भी पता चल गया.. क्योंकि कभी-कभी लंड उसके शरीर से सट जाता था..
शिल्पा तुम्हारे मुम्में बहुत प्यारे हैं बहुत ही सुंदर और ठोस हैं। तू तो साली बनी ही चोदने के लिए है। अगर मुझे पता होता के तू मर्द को उसके नीचे लेट कर इतने मज़े देती हो तो तुझे घर में ही चोद देता जब त फ़्राक पहना करती थी और तेरी झांटें भी नहीं उगी थी... मैंने शिल्पा से कहा
फिर हम कमरे में आ गए.. वो अपने कपड़े पहनने लगी.. तो मैंने फिर कहा- शिल्पा.. मेरा लंड फिर खड़ा हो गया है.. अब क्या करूँ..?
उसने कहा- चल बिस्तर पर लेट जा फिर से मुठ्ठ मार देती हूँ।
तो मैं लेट गया और वो नाईटी पहन कर आईं और मेरी मुठ्ठ मारने लगी।
अब मैंने कहा- शिल्पा एक बात कहूँ..
तो उसने कहा- क्या?
मैंने कहा- प्लीज़ कल रात जैसा फिर से चुदाई करने दो ना..
तो उसने कहा- नहीं..
मैं बार-बार बोल रहा था कि जब एक बार हो ही गया तो एक बार और करने से क्या हो जाएगा.. और मैं किसी से कहूँगा भी नहीं..
इतनी देर से वो मेरी मुठ्ठ मार रही थी.. इसलिए वो भी गर्म हो गई थी, इस बार वो मना नहीं कर सकी।
उसने कहा- ठीक है.. लेकिन सिर्फ़ एक बार.. और यह बात किसी से मत कहना भैया..
तो मैंने कहा- भला मैं किसी से क्यों कहूँगा शिल्पा..
फिर मैंने झट से उठ कर उसकी नाईटी को खोल दिया.. अब उसने ब्रा और पैन्टी पहनी हुई थी।
मैंने जल्दबाजी में ब्रा को भी खोल दिया और उसे बिस्तर पर लिटा कर उसके मुम्में दबाने और चूसने लगा।
मैं उसके दूध कुछ ज्यादा ही ज़ोर से चूस और दबा रहा था.. कि तभी शिल्पा ने कहा- थोड़ा धीरे करो विनय भैया.. मैं कहीं भाग नहीं रही हूँ।
मुझे अपनी चुदास के चलते उसके ये शब्द सुनाई नहीं पड़े और मैं ज़ोर-ज़ोर से उसके मुम्में चूसता और दबाता रहा।
वो लगातार आआहह.. आआअहह.. ओह विनय भैया..’ करती रहीं।
मुझे उसके मुँह से अपना नाम सुनकर बड़ा मज़ा आ रहा था।
अब मैं नीचे आकर उसकी नाभि चाटने लगा।
उसका चुदास भरा जोश बढ़ता ही जा रहा था।
फिर मैंने अपना हाथ ले जाकर उसकी चूत पर रख दिया.. तो उसने कहा- प्लीज़ विनय भैया.. छोड़ दो.. ये ग़लत है..
तो मैंने उसके होंठों पर अपने हाथ रख कर उसे चुप करा दिया और फिर अचानक एक उंगली उसकी चूत में पेल दी। इससे वो चीख पड़ी और बोलीं- धीरे-धीरे डालो.. दर्द होता है..
फिर मैं उसकी मुम्में चाटता रहा और उंगली तेज़ी से अन्दर-बाहर करने लगा।
वो गीली होने लगी और मेरा हाथ भी गीला हो गया.. तभी मैंने अचानक अपना मुँह उसकी चूत पर लगा दिया.. तो वो चौंक पड़ीं.. और बैठ गईं.. अब वो मुझे हटाते हुए बोलीं- यह क्या कर रहे हो भैया?
तो मैंने कहा- तेरी चूत चाट रहा हूँ.. और इसका पानी पीना चाहता हूँ.. क्यों बॉबी ने.. कभी तेरी चूत नहीं चाटी है क्या?
तो उसने कहा- नहीं..
मैंने कहा- तब तो तूने 2 साल शादी के बाद भी सेक्स का असली मज़ा लिया ही नहीं.. खैर अब आराम से मज़ा लो..
वो सिसकारियाँ लेने लगीं और अब वो पूरी तरह से तैयार होती जा रही थीं, उसके मुँह से आवाज निकल रही थी आआ.. आआ.. आहह.. विनय.. ओह भैया.. पूरा पानी पी जाओ भैया..वो ये बहुत ही कामुकता से बोल रही थी।
मेरे इस काम से वो इतनी उत्तेजित हो गई थी कि दस मिनट बाद वो झड़ गईं और मैंने उसका पूरा पानी पी लिया। जब उसके रस की अंतिम बूँद निकल रही थीं.. तो मैंने उसका पानी अपने मुँह में लेकर उसे मुँह खोलने को कहा और उसके मुँह में उसकी ही चूत का माल उगल दिया.. और कहा- शिल्पा अपना पानी तुम भी तो टेस्ट करो..
जिसे वो बड़े मजे से पी गईं.. उसने कहा- बड़ा मज़ा आया..
तो मैंने कहा- लेकिन मेरा लंड तो अभी भी खड़ा है..
अब वो हाथ से मेरा लंड पकड़ कर तेज़ी से मुठ्ठ मारने लगीं तो मैंने कहा- बस करो.. नहीं तो मैं झड़ जाऊँगा।
यह कह कर मैंने उसे लिटा दिया और मैं उसके ऊपर आ गया। मैंने लंड को उसकी बुर के मुहाने पर रख कर बिना पूछे ही एक जोरदार धक्का लगा दिया.. मेरे इस अचानक के धक्के से वो चीख पड़ीं- धीरे करो भैया.. दर्द होता है..
तो मैंने कहा- क्यों.. तू तो चुदती रहती है ना..?
इस पर उसने कहा- लेकिन बॉबी का लंड केवल 4 इंच का है.. और आपका 6 इंच का है.. और आपका लंड मोटा भी है.. मुझे मोटे और लंबे लंड की आदत नहीं है।
मैंने कहा- ठीक है.. फिर धीरे चोदता हूँ।
यह कह कर मैंने और जोरदार धक्का मारा तो मेरा 6 इंच का लंड.. पूरा उसकी चूत की जड़ में चला गया।
वो बहुत जोर से चीख पड़ीं- आआआहह.. विनय भैया.. तूने मेरी चूत फाड़ दी साले.. ऊऊऊओहह.. क्या कर दिया तूने.. ओहह.. ओहह..
मैंने फिर से लंड को सुपारे तक बाहर निकाला और फिर एक जोरदार धक्का दे दिया और इस तरह से मैं उसे चोदता रहा और वो चीखती रही।
फिर मैंने कहा- अब मैं लेट जाता हूँ.. और तुम मेरे लंड पर बैठ कर ऊपर-नीचे करो..
तब वो वैसे ही करने लगीं।
फिर काफ़ी देर के बाद मैं झड़ने वाला था तो मैंने उससे पूछा- मैं झड़ने वाला हूँ.. कहाँ गिराऊँ?
शिल्पा ने कहा- भैया मेरी चूत में ही डाल दो और मैं भी बस आ ही रही हूँ..
करीब 5 मिनट के बाद मैं और मेरी बहन दोनों झड़ गए।
झड़ने के बाद मैं वैसे ही पड़ा रहा.. दो मिनट के बाद मेरा लंड छोटा होकर खुद ही बाहर आ गया और हम दोनों वैसे ही नंगे लेटे रहे।
फिर 5 मिनट के बाद मैंने फिर से अपना हाथ शिल्पा की मुम्मों पर रख कर उसे सहलाने लगा.. तो उसने मेरा हाथ हटा दिया।
मैंने फिर रखा.. तो उसने फिर मेरा हाथ हटा दिया.. लेकिन जब मैंने फिर से हाथ रखा.. तो वो कुछ नहीं बोलीं और चुपचाप लेटी रहीं।
तब मैं एक हाथ से एक दूध को दबाने लगा.. और दूसरे को मुँह में लेकर चूसने लगा। मैंने शिल्पा की चूचियों का दबाते हुए कहा- शिल्पा, तू बड़ी मस्त है ! बॉबी को तो खूब मज़े देती होगी तू !
शिल्पा- तू भी ले न मज़े ! तू  तो मेरा सगा भाई है, तेरा भी उतना ही हक बनता है मुझ पर ! अब से तू मेरा दूसरा खसम है !
मैंने कहा हाँ शिल्पा ! क्यों नहीं !
शिल्पा बोली हाय, कितना अच्छा लगता है अपने बड़े भाई से ये सब करवाना, सच बता कितनियों को चोदा है तूने अब तक?
मैंने कहा अब तक एक भी नहीं शिल्पा डार्लिंग, आज तुझसे ही अपनी ज़िंदगी की पहली चुदाई शुरू करूँगा।
मैंने उसकी घुंडियों को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा। शिल्पा सिसकारियाँ भरने लगी। मैंने उसे लिटा लिया, उसके बदन के हर अंग को चूसते हुए उसकी चूत पर आया, वो बिल्कुल गीली हो चुकी थी। मैं ही उसकी फ़ुद्दी को चूसने लगा।
शिल्पा पागल सी हो रही थी।
आह ! क्या शानदार चूत थी ! लगता ही नहीं था कि इसकी चुदाई हो रही थी ! गोरी गोरी चूत पर काली काली झांटें ! ऐसा लगता था चाँद पर बादल छा गए हों ! मैंने झांटों को हाथ से बगल किया और उसके चूत को उँगलियों से फैलाया, अन्दर एकदम लाल नजारा देख कर मेरा दिमाग ख़राब हो रहा था। मैंने झट से उसकी लाल लाल चूत में अपनी लपलपाती जीभ डाली और स्वाद लिया, फिर मैंने अपनी पूरी जीभ जहाँ तक संभव हुआ उसकी चूत में घुसा कर चूस चूस कर स्वाद लेता रहा।
शिल्पा जन्नत में थी, उसने अपनी दोनों टांगों से मेरे सर को लपेट लिया और अपनी चूत की तरफ दबाने लगी। दस मिनट तक उसकी चूत चूसने के बाद उसकी चूत से माल निकलने लगा। मैंने बिना किसी शर्म के सारा माल को चाट लिया।
शिल्पा बेसुध होकर पड़ी थी, वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी।
मैंने कहा सच बता शिल्पा, बॉबी से पहले कितनों से चुदवाया है तूने?
शिल्पा- बॉबी से पहले सिर्फ दो ने चोदा है मुझे !
मैंने कहा- हाय, किस किस ने तुझे भोगा री?
शिल्पा- जब मैं स्कूल में थी तब स्कूल की एक सहेली के भाई ने मुझे तीन बार चोदा। फिर जब मैं सोलह साल की थी तो कालेज में मेरा एक फ्रेंड था, हम सब एक जगह पिकनिक पर गए थे, तब उसने मुझे वहाँ एक बार चोदा। उसके बाद तो मेरी शादी ही बॉबी से हो गई।
मैंने- तब तो मैं चौथा मर्द हुआ तेरा न?
शिल्पा- हाँ ! लेकिन सब से प्यारा मर्द !
मैं उसके बदन पर लेट गया आर उसके रसीले होंठ को अपने होंठों में लिए और अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी। कभी वो मेरी जीभ चूसती, कभी मैं उसकी जीभ चूसता। इस बीच मैंने उसके दोनों टांगों को फैलाया और उसकी चूत में उंगली डाल दी। शिल्पा ने मेरा लंड पकड़ा और उसे अपने चूत के छेद के ऊपर ले गई और हल्का सा घुसा दिया। अब शेष काम मेरा था, मैंने उसकी जीभ को चाटते हुए ही एक झटके में अपना लंड उसके चूत में पूरा डाल दिया।
वो दर्द में मारे बिलबिला गई।
बोली- अरे, फाड़ देगा क्या रे? निकाल रे !
लेकिन मैं जानता था कि यह कम रंडी नहीं है, इसे कुछ नहीं होगा, मैंने उसकी दोनों बाहें पकड़ी और अपने लंड को उसकी चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिए। वो कस कर अपनी आँखें बंद कर रही थी और दबी जुबान से कराह रही थी लेकिन मुझे उस पर कोई रहम नहीं आ रहा था बल्कि उसकी चीखों में मुझे मजा आ रहा था।
70-75 धक्कों के बाद उसकी चीखें बंद हो हो गई। अब उसकी चूत पूरी तरह से मेरे लंड को सहने योग्य चौड़ी हो गई थी, अब वो मज़े लेने लगी। उसने अपनी आँखे खोल कर मुस्कुरा कर कहा- हाय रे मेरे दूसरे खसम, बड़ा जालिम है रे तू ! मुझे तो लगा मार ही डालेगा !
मैंने कहा- शिल्पा डार्लिंग, मैं तुझे कैसे मार सकता हूँ रे ! तू तो अब मेरी जान बन गई है और तुझे तो आदत होगी न बचपन से?
शिल्पा हंसने लगी. बोली- लेकिन इतना बड़ा लंड की आदत नहीं है मेरे शेर राजा ! मज़ा आ रहा है आपसे चुदवा कर !
करीब दस मिनट तक चोदने के बाद मेरे लंड से माल निकलने पर हो गया, मैंने कहा- शिल्पा डार्लिंग, माल निकलने वाला है।
शिल्पा- निकाल दे ना वहीं अन्दर !
अचानक मेरे लंड से माल की धार बहने लगी और मैंने पूरा जोर लगा कर शिल्पा की चूत में अपना लंड घुसा दिया। शिल्पा कराह उठी।
थोड़ी देर बाद हम दोनों को होश आया, मेरा लंड उसकी चूत में ही था।
शिल्पा आँख बंद करके लेटी थीं.. करीब दस मिनट के बाद हम दोनों उठे और बाथरूम जाकर.. फिर से नहाने लगे। दोनों ने एक-दूसरे को साबुन लगाया और मालिश करने लगे। फिर हम नहा कर नंगे ही कमरे में आ गए।
मैंने उससे कहा- मैं तुझे कपड़े पहनाता हूँ.. और वो मुझे कपड़े पहना दें।
मैंने उसे पैन्टी.. ब्रा और सूट पहना दिया। उसके होंठों पर लिपिस्टिक भी लगा दी..
इसके बाद जब वो मुझे अंडरवियर पहनाने लगीं.. तो मेरा लंड फिर से खड़ा होकर उसे सलामी देने लगा लेकिन किसी तरह से दोनों ने कंट्रोल करके कपड़े पहन लिए और तैयार हो गए।
चुदाई करते-करते भूख भी लग आई थी और थक भी गया था। जब मैंने घड़ी पर नज़र डाली.. तो 2 बज चुके थे। अब हम दोनों ने एक साथ खाना खाया और फिर बिस्तर पर आ गए।
करीब 5 मिनट लेटने के बाद मैंने शिल्पा को अपनी ओर घुमाया और उसके गाल पर चुम्बन करने लगा और उसके मम्मों सहलाने लगा।
फिर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चुम्बन करने लगा। मैं उसका होंठ चूस रहा था और वो मेरा..
फिर कुछ देर बाद मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और कुछ देर बाद उसने मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी।
अब हम बहुत ही सनसनाहट वाली चूमा-चाटी करने लगे।
हमने करीब आधे घंटे तक चूमा-चाटी की, फिर मैंने कहा- शिल्पा रात को चुदवाओगी ना?
तो वो कहने लगीं- अगर बॉबी हुए तो नहीं करवाऊँगी।
मैंने कहा- कुछ भी बहाना करके नीचे आ जाना..
तो उसने कहा- ठीक है कोशिश करूँगी..
इसके बाद मैंने शिल्पा की पूरे दम से चुदाई की और झड़ने के बाद मैं सो गया। शिल्पा वहाँ से चली गईं।
फिर मैं सोकर 3.30 बजे उठा और अनु को लाने चला गया और उसे लेकर 4.30 बजे मैं घर आया।
अभी तक सब नॉर्मल था.. अनु का एक्जाम भी खत्म हो चुके थे।
इसलिए वो भी आराम के मूड में थी और एंजाय कर रही थी। मैं जब अनु को लाने गया था.. तो मैंने एक डब्बा कोहिनूर एक्सट्रा टाइमवाला कंडोम का ले लिया था। यह सेफ्टी के लिए आवश्यक था।
फिर जब रात हुई.. तो हम सब सो गए। मैं नीचे सोया था.. बॉबी-शिल्पा ऊपर और अनु कमरे में सो रही थी।
करीब एक घंटे बाद मुझे कुछ हल्की सिसकारियाँ सुनाई दे रही थीं.. क्योंकि बॉबी शिल्पा को चोद रहा था। इससे मेरी नींद खुल गई.. करीब आधा घंटे बाद जब उसकी चुदाई रुकी.. तो शिल्पा ने कपड़े ठीक करने के बाद बॉबी से कहा- अब हो गया ना.. मुझे बहुत गर्मी लग रही है और मैं फर्श पर सोने नीचे जा रही हूँ।
कह कर वो नीचे मेरे बगल में आकर लेट गईं।
अब सब सोने लगे.. करीब 5 मिनट के बाद मेरा हाथ मेरी बहन के शरीर पर रेंगने लगा और मैंने उसकी नाईटी ऊपर तक उठा दी और उसके मुम्में चूसने और दबाने लगा।
आधा घंटे बाद मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी और आगे-पीछे करने लगा। अभी कुछ पल पहले ही चुदने के कारण शिल्पा की चूत गीली थी और वो झड़ने का नाम भी नहीं ले रही थीं.. तभी उसने भी मेरा लंड पकड़ लिया और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी।
आधा घंटे के बाद मैं झड़ गया.. पर शिल्पा को झड़ाने में मुझे पूरा एक घंटा लगा.. फिर हम सो गए।
सुबह मैं 8 बजे सो कर उठा.. तो मैंने सुना कि बॉबी को ऑफिस के काम से एक हफ्ते के लिए मधुबनी जाना है। शिल्पा की सास घर भी वहीं है.. तभी अनु भी जाने को ज़िद करने लगी।
अब तय हुआ कि बॉबी के साथ अनु भी जाएगी और अनु का एक्जाम हो चुके थे.. इसलिए बॉबी ने वहाँ दस दिन का प्रोग्राम बना लिया.. क्योंकि वो ऑफिस के टूर पर जा रहा था.. इसलिए कोई तनाव नहीं था और उसी शाम का रिज़र्वेशन हो गया।
शिल्पा मेरे कारण नहीं जा सकीं.. क्योंकि मेरे एक्जाम 15 दिन बाद शुरू होने वाले थे।
मैंने जब उन लोगों के जाने की बात सुनी तो मैं अन्दर से बहुत खुश था और उन लोगों के जाने का इंतजार करने लगा।
आख़िर वो घड़ी आ ही गई और मैं और शिल्पा दोनों उन लोगों को छोड़ने स्टेशन गए और ट्रेन निकल जाने के बाद जब मैं शिल्पा के साथ बाइक से लौट रहा था तो मैंने शिल्पा से कहा- अब दस दिन तक हमारी रोज सुहागरात होगी.. और अब तुम थोड़ा सट कर बैठ जाओ न!
तो वे अपनी चूचियां मेरी पीठ से चिपका कर बैठ गई। तभी मैंने मार्केट में एक जगह बाइक रोकी और शिल्पा से कहा- दो मिनट में आता हूँ।
फिर मैं शिल्पा को वहीं छोड़ कर.. जाकर 2 पैकेट सिगरेट और एक बॉटल वाइन की ले आया।
शिल्पा ने कहा- बैग में क्या लाया है?
तो मैंने कहा- घर चलकर देख लेना।
रास्ते में मैंने ढेर सारे फूल और सजावट का सामान लिया.. एक दुकान में शिल्पा के साथ गया और सेल्समैन से कहा- स्टाइलिश पैन्टी.. ब्रा और नाइट हाफ सूट दिखाओ..
शिल्पा मेरा मुँह देखने लगीं.. मैंने उसका हाथ पकड़ कर दबा दिया और फिर हमने 6 पैन्टी.. ब्रा और 2 नाइट सूट खरीदे।
शिल्पा ने कहा- इन सबका क्या करोगे?
तो मैंने कहा- सब घर चल कर पता चल जाएगा..
जब हम घर लौटने लगे.. तो रास्ते में अंधेरा हो गया था और सुनसान सड़क थी.. तो मैंने शिल्पा से कहा- मन कर रहा है कि तेरी चुदाई यहीं पर करूँ..
तो उसने कहा- तो रोका किसने है?
मैंने अचानक बाइक किनारे रोक दी तो शिल्पा चौंक गई और कहा- गाड़ी क्यों रोक दी?
तो मैंने कहा- चुदाई के लिए..
उसने कहा- मैं तो मज़ाक कर रही थी.. तुमने तो सीरियसली ले लिया।
मैंने कहा- मैं भी मज़ाक ही कर रहा हूँ.. मुझे ज़ोर से पेशाब लगी है!
और मैं वहीं लौड़ा निकाल कर पेशाब करने लगा। पेशाब करने के बाद मेरा लंड शिल्पा को देख कर पूरा खड़ा हो गया था।
फिर मैंने शिल्पा से कहा- शिल्पा सच में एक बार यहाँ डालने दो ना.. यहाँ कोई नहीं है।
वो मना करने लगीं और मैं अपना लंड पकड़ कर उसकी ओर बढ़ने लगा.. और उसे पकड़ लिया।
वो बोलने लगी- कोई देख लेगा..
मैंने कहा- कोई नहीं आएगा.. यह सुनसान सड़क है और अभी रात है.. कोई आएगा तो उसकी लाइट से हमें पता चल जायगा और कौन सा मैं तुझे चोदने वाला हूँ। बस एक बार डाल कर निकल लूँगा..
यह कह कर मैंने उसे बाइक की सीट के सहारे उल्टा लिटा दिया और उसकी साड़ी ऊपर उठा दी।
मैं इतना अधिक उत्तेजित था कि एक ही धक्के में मैंने अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया.. और वो दबी ज़ुबान में चीख पड़ी और बोलने लगी- अब घुसा लिया.. अब निकाल लो
लेकिन मैं तेज़ी से उसे उसी पोज़ में चोदने लगा और 5 मिनट बाद ही मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ और मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।
फिर हम घर आ गए.. घर में घुसते ही मैं उसे किस करने लगा और वे भी मुझे सहयोग करने लगी।
मैं करीब 5 मिनट तक चुम्मी करता रहा और मैंने कहा- अब दस दिन तक मैं तेरी जवानी का मज़ा लूँगा.. मेरी प्यारी बहना..
तो उसने कहा- ठीक है भैया.. तू ले ले.. अपनी सगी बहन की चूत की चुदाई का मज़ा..
ये सब करते-करते रात के 8 बज चुके थे और हमने खाना भी होटल से मंगा लिया था।
मैंने शिल्पा से कहा- चलो शिल्पा, नहा लेते हैं।
हम साथ में नहाने चले गए और पन्द्रह मिनट में नहा कर निकल आए।
जब वो नाईटी पहनने लगी.. तो मैंने कहा- शिल्पा नाईटी नहीं.. अपनी शादी वाली साड़ी पहनो और न्यू पैन्टी-ब्रा.. जो अभी लाया हूँ.. उसे पहनो न..
तो उसने कहा- ठीक है..
वो तैयार होने चली गई.. और मैं घर सजाने लगा और पूरा घर ख़ास कर बेडरूम को अच्छे से सज़ा दिया। जब शिल्पा आधा घंटे के बाद बाहर निकली.. तो मैं उसे देखता ही रह गया। वो बिल्कुल नई दुल्हन लग रही थी।
अब मैं उसके नजदीक गया और कहा- आज मैं अपनी बहन नहीं.. अपनी बीवी के साथ सुहागरात मनाना चाहता हूँ.. क्या बोलती हो?
तो उसने कहा- यह कैसे हो सकता है?
मैंने कहा- बस देखती जाओ.. आज मैं अपनी बहन से शादी करके उसे अपनी दुल्हन बनाऊँगा।
मैं जाकर दो फूल माला ले आया और एक मोम्बत्ती जला दी.. फिर एक माला उसके गले में डाल दी.. और दूसरी उससे अपने गले में डलवा ली।
फिर उसकी साड़ी के पल्लू से अपने कपड़े में गाँठ लगा कर उसके साथ 7 फेरे लेने लगा। सात फेरों के बाद मैंने उसकी माँग में सिंदूर भर दिया और कहा- लो हो गई आज से तु मेरी पत्नी.. लेकिन हाँइस बात का पता किसी को और कभी नहीं चलना चाहिए।
वो मेरी इस हरकत से मानो अभिभूत हो गई थीं, बोलीं- ठीक है मेरे पतिदेव..
फिर उसने सज़ा हुआ घर देखा तो कहा- घर क्यों सज़ाया है?
मैंने कहा- मेरी पत्नी के स्वागत और हमारी सुहागरात के लिए..
फिर इसके बाद मैंने उसे वहीं पर किस करने लगा और धीरे-धीरे उसके सारे गहने उतार दिए।
फिर मैंने उसकी साड़ी उतार दी.. इसके बाद ब्लाउज भी उतार दिया। अब वो सिर्फ़ पेटीकोट और ब्रा में थी और जानलेवा माल लग रही थी।
तभी मैंने एक झटके में उसकी ब्रा खींच कर अलग कर दी।
अब वो शर्माने लगीं और मैं उसका एक मुम्मा चूसने लगा.. मुम्में को चूसते-चूसते इतनी ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था कि वो चीखने लगीं और बोलीं- धीरे दबाओ न.. लगती है न..
मुझे उसकी चीख सुनकर बहुत मज़ा आ रहा था.. इसलिए मैंने और ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया और वो चीखती रहीं।
फिर मैं उसकी दूसरा मुम्मा चूसने लगा और एक बार दाँतों से निप्पल को काट लिया।
वो इतनी ज़ोर से चीखीं कि मुझे मज़ा आ गया।
इसके बाद मैंने उसका पेटीकोट और पैन्टी उतार दी और उसकी चिकनी चूत चाटने लगा।
वो तड़फने लगीं आअहह.. आआआआह.. विनय भैयाअच्छे से चूसो.. अगर आप नहीं होते.. तो मैं इस मज़े से अंजान रह जाती.. मज़ा आ गया।
वो इस तरह से सीत्कारने लगीं।
करीब दस मिनट के बाद मैंने उसे छोड़ते हुए कहा- अब तु मुझे नंगा कर..
तो उसने मुझे नंगा कर दिया और फिर मेरा तन्नाया हुआ लंड पूरे 6 इन्च लम्बा 3 इन्च मोटा हवा में लहराने लगा.. उसे सलामी देने लगा।
अब में सोफे पर लेट गया और मैंने शिल्पा से कहा- अब तुम मेरा लंड मुँह में लेकर चूसो।
तो उसने मना कर दिया.. लेकिन फिर मैंने कहा- मैंने तेरी चूत चाटी है.. और चूत का पानी भी पिया है.. अब तु भी मेरा लवड़ा चूसो।
मेरे बहुत कहने पर उसने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।
अब मुझे पेशाब लगी थी.. तो मैंने उसे बिना बताए उसका सर ज़ोर से पकड़ा और उससे कहा- मुझे पेशाब लगी है.. और मैं तुम्हारे मुँह में मूतूंगा और तु उसे पी लेना।
तो वो गों..गों..करके मना करने लगीं.. लेकिन फिर भी मैं धीरे-धीरे उसके मुँह में मूतने लगा और उसे ज़बरदस्ती अपना पूरा पेशाब पिला दिया..
जब कुछ पलों बाद उसने मुँह हटा पाया तो वो लम्बी साँसें ले रही थीं।
उसके बाद मैंने फिर से उसे अपना लंड चूसने को कहा.. तो उसने कहा- अब मैं नहीं चुसूंगी।
तब मैंने ज़बरदस्ती उसके मुँह में अपना लंड पेल दिया और वो फिर से लौड़ा चूसने लगीं।
करीब 10 मिनट लवड़ा चुसवाने के बाद मैंने शिल्पा को सोफे पर उल्टा लिटा दिया और उससे कहा- आज हमारी सुहागरात है.. लेकिन तु तो पहले से चूत की चुदाई करवा चुकी हैं.. तो मेरे लिए क्या सील बन्द है।
तो वो बोलीं- तू भी इसी चूत में अपना लंड डाल दे..
मैंने कहा- नहीं मुझे फ्रेश छेद चाहिए।
तो वो बोलीं- मैं फ्रेश चूत कहाँ से लाऊँ?
मैंने कहा- ठीक है.. चूत नहीं है.. लेकिन तेरी गाण्ड तो हैमैं आज तेरी गाण्ड ही मारूँगा..
उसने कहा- क्या बोल रहे हो.. भला कोई गाण्ड भी मारता है क्या?
तो मैंने कहा- मैं समझ गया था.. कि बॉबी ने तेरी गाण्ड नहीं मारी होगी.. ठीक है आज मैं तेरी गाण्ड का उद्घाटन करूँगा।
शिल्पा बोलीं- नहीं.. मैं गाण्ड नहीं चुदवाऊँगी..
तो मैंने कहा- मैं तो आज हर हाल में तेरी गाण्ड मारूँगा..
फिर उसने कहा- भैया मेरी गाण्ड मत मारो प्लीज़..
मैंने कहा- नहीं.. मैं आज तेरा पति हूँ.. और मेरे लंड को तेरी गाण्ड पर पूरा अधिकार है।
वो समझ गई कि मैं उसकी गाण्ड मारकर ही रहूँगा।
फिर वो मान गईं। मैंने सोचा कि बिना तेल के ही शिल्पा की गाण्ड मारता हूँ। तब शिल्पा चीखेगी तो और मज़ा आएगा। लेकिन फिर सोचा पहली बार है तो देखता हूँ कि क्या होता है।
मैंने शिल्पा को कुतिया की तरह सोफे पर उल्टा कर दिया और उसके हाथ बाँध दिए।
तो वो बोली- हाथ क्यों बाँध रहे हो?
मैंने कहा- बस ज्यादा मज़े के लिए..
लेकिन असल में मैं उसकी गाण्ड बहुत ही बेदर्दी से मारना चाहता था।
फिर मैं तेल की सीसी ले आया और शिल्पा की गाण्ड पर पूरा डाल कर मालिस करने लगा और जब उसका जिस्म पूरा चिकना हो गया.. तो मैं उसके चूतड़ों पर ज़ोर-ज़ोर से झापड़ मारने लगा।
वो बोलीं- ये क्या कर रहे हो.. आ आआहह.. विनय भैया छोड़ दो।
वे चीखने लगीं.. लेकिन हाथ बँधे होने के कारण वो कुछ कर नहीं पा रही थी।
फिर मैं एक लंबा सा स्केल ले आया और उससे उसकी गाण्ड पर ज़ोर-ज़ोर से मारने लगा, उसे दर्द होने लगा.. लेकिन मैंने मारना नहीं छोड़ा। अब वो दर्द से चीखने लगी..
फिर मैंने उसे तब तक माराजब तक कि उसका पूरा पिछवाड़ा लाल नहीं हो गया।
अब वो रो रही थी और कहने लगीं- विनय भैया.. प्लीज़ मुझे छोड़ दो..
मैंने कहा- बिना गाण्ड मारे कैसे छोड़ दूं?
उसने कहा- ठीक है गाण्ड मार लो.. लेकिन तुम मुझे मार क्यों रहे हो?
तो मैंने कहा- ज्यादा मज़ा देने और लेने के लिए मेरी प्यारी बहना..
फिर मैंने अपना लंड उसकी गाण्ड पर रखा और फिर एक झापड़ ज़ोर से उसकी गाण्ड पर मारा.. वो फिर दर्द से चीख उठी।
तभी मैंने एक ज़ोर का धक्का लगा दिया और मेरा सुपारा उसकी गाण्ड में घुस गया.. अचानक लगे इस धक्के से वो बहुत ज़ोर से चीखीं।
तो मैंने कहा- क्या हुआ?
उसने कहा- प्लीज़ विनय भैया.. मेरी गाण्ड से अपना लंड निकाल लो.. तुम मेरी चूत चोद लो प्लीज़तुमने मेरी गाण्ड फाड़ दी.. ओह माँआ.. बचा लो.. इस दरिंदे से.. आआअहह अहह..
तभी मैंने दूसरा धक्का मारा और मेरा आधा लंड उसकी गाण्ड में घुस गया।
इस बार वो और भी ज़ोर से चीखीं- आआअहह ऊऊओह.. साले.. तेरा लंड है.. कि मूसल.. छोड़ मुझे.. आआहह.. अहह.. छोड़ मुझे.. निकाल मेरी गाण्ड से अपना लण्ड.. ऊऊह..
तब मैंने कहा- कैसा लग रहा है शिल्पा.. अभी तो आधा लंड ही गया है।
ये कह कर मैंने पूरी ताकत से तीसरा धक्का मारा और मेरा पूरा लंड उसकी गाण्ड में जड़ तक घुस चुका था।
तभी मैंने उसकी कोई परवाह किए हुए लंड बाहर निकाला और फिर से धक्का देकर अपना लंड पूरा उसकी गाण्ड में घुसा दिया।
वो रोने लगी और चीख भी रही थी और मैं उसकी कोरी गाण्ड को बेरहमी से मारे जा रहा था।
लगभग पन्द्रह मिनट के बाद मुझे लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूँ और अब शिल्पा को भी कुछ आराम हो चला था।
तभी मैंने अपना लंड गाण्ड से निकाल लिया तो शिल्पा ने कहा- भगवान का शुक्र है कि तुम झड़ गए.. नहीं तो मैं आज मर ही जाती।
तो मैंने कहा- मैं अभी झड़ा नहीं हूँ और नहीं झड़ने के लिए ही लंड निकाल लिया है।
अब मैंने एक सिगरेट जला ली और शिल्पा के मुँह के पास खड़ा होकर लंबे कश लेने लगा।
मैंने शिल्पा से कहा- लो डार्लिंग.. मेरा लंड चूसो..
शिल्पा ने ना चाहते हुए भी मेरा लंड मुँह में ले लिए और अब वे मजे से लौड़े को चूस रही थीं। मैं कश लेकर सांस रोक कर रखता था.. तो मुझे नशा होने लगा.. जिस वजह से मेरा लंड बैठने लगा।
फिर 5 मिनट लंड चुसवाने के बाद मैंने शिल्पा के हाथ खोल दिए और वो सोफे पर बैठ गईं।
मैंने उसे भी सिगरेट पीने को कहा.. तो वो मना करने लगीं.. लेकिन मैंने ज़िद की तो उसने सिगरेट अपने हाथ में ले ली।
मैंने कहा- लंबे कस लो और सांस रोक कर धुएँ को अन्दर रोक कर रखना.. जब तक हो सके..
तो वो ऐसा करने लगीं.. फिर कुछ देर में उसे भी नशा होने लगा और मैं उसके लिए एक पैग बना कर ले आया और उसे पीने को दिया।
ना चाहते हुए भी वो पी गईं.. और अब हल्का नशा होने लगा।
तब मैंने कहा- अब फिर उल्टा हो जाओ शिल्पा..
फिर से मैंने उसके हाथ बाँध दिए और फिर से उसी तरीके से उसकी गाण्ड मारने लगा।
आधे घंटे के बाद मैं जब झड़ने वाला था.. तो मैंने लंड निकाल लिया और उसके मुँह में डाल कर चुसवाने लगा।
दो मिनट में ही मैं उसके मुँह में ही झड़ गया.. वो मेरे माल को थूकना चाहती थीं लेकिन मैंने उसे पीने पर मजबूर कर दिया।
वो मेरे लंड का पानी पी गईं और फिर मैंने उसके हाथ खोले और दोनों सोफे पर नंगे ही लेट गए।
आधे घंटे के बाद हम दोनों उठे और वो कपड़े पहनने लगीं।
मैंने कहा- आज कपड़े मत पहनो शिल्पा..
तो उसने नहीं पहने और हम दोनों नंगे ही पड़े रहे थे। वो जब उठ कर बाथरूम के लिए चलने को हुईं तो वे थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थीं।
फिर हमने साथ-साथ खाना खाया और फिर मैंने वाइन निकाल कर पैग बनाए। हम दोनों वाइन पीने लगे। वो पीना तो नहीं चाहती थी.. लेकिन मेरे कहने पर पीने लगीं दोनों ने 4-4 पैग पिए और सोफे पर ही सो गए।
रात के करीब एक बजे मेरी नींद खुली तो मैं बाथरूम गया और फिर मैंने शिल्पा को भी उठाया और कहा- शिल्पा उठो..
तो उसने कहा- क्या हुआ?
मैंने कहा- उठ कर मेरा लंड चूसो..
वो समझ गई थीं कि ये मना करने पर भी मानेगा नहीं.. लेकिन फिर भी उसने कहा- अब कल सुबह कर लेना विनय भैया..
तो मैंने कहा- मैं अभी अपनी बीवी को चोदूँगा..
तब वो समझ गईं और उठ कर मेरा लंड चूसने लगीं। जब मेरा लंड तैयार हो गया तो मैंने भी पन्द्रह मिनट उसकी चूत चाटी और उंगली की.. तो वो झड़ गईं और मैं उसका पूरा पानी पी गया।
फिर मैं उसे उठा कर बेडरूम में अपनी सेज़ पर ले गया और उसे उल्टा कुतिया पोज़ में कर दिया।
तो उसने कहा- अब ऐसे क्यों कर रहे हो?
मैंने कहा- मैं फिर से आपकी गाण्ड मारूँगा।
वो मना करने लगीं और कहा- बहुत दर्द होता है..
लेकिन मैं तो मानने वाला ही नहीं था, यह बात वो भी समझ चुकी थीं और वो चुप हो गईं।
मैं उसकी गाण्ड मारने लगा.. वो चीखती रही.. लेकिन इस बार वो थोड़ा कम चीख रही थीं। आधा घंटे के बाद मैं उसकी गाण्ड में ही झड़ गया और लंड उसकी गाण्ड में डाले हुए ही उसके ऊपर ही लेट गया।
मुझे पता नहीं चला कि कब नींद आ गई।